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Sunday, September 18, 2022

पोषण अभियान महिला स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण के लिए सार्थक प्रयास : ओममणि

उद्यान महाविद्यालय कान्फ्रेंस हाल में हुअ कार्यक्रम का आयोजन 

विधायक ने सामुदायिक विज्ञान भवन में चल रही गतिविधियों को देखा 

बांदा, के एस दुबे । कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र एवं इफको के संयुक्त तत्वाधान में पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का भव्य आयोजन उद्यान महाविद्यालय के कान्फ्रेन्स हाल में किया गया। इसका उद्देश्य कृषकों, महिला कृषकों, कन्याओं को पोषक अनाजों व टिकाऊ खेती के लिए पौधरोपण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डा. एनपी सिंह द्वारा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में विधायक नरैनी ओममणी वर्मा तथा विशिष्ठ अतिथि के रूप में बलराम सिंह कछवाह सदस्य, प्रबन्ध समिति अटारी कानपुर रहे। कार्यक्रम में अधिष्ठाता कृषि, अधिष्ठाता उद्यान, अधिष्ठाता वानिकी एवं सह अधिष्ठाता गृह विज्ञान आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। डा. श्याम सिंह, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केन्द्र ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद केन्द्र की विषय वस्तु विशेषज्ञ एवं कार्यक्रम समन्यवक डा. दीक्षा पटेल ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य से सभी को अवगत कराया। 

अवकलोकन करतीं विधायक ओममणि वर्मा

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विधायक नरैनी ओममणी वर्मा ने अपने उद्बोधन में बुन्देलखण्ड की पुरानी संस्कृति, परम्परागत भोज्य पदार्थां को संजोकर रखने के लिये सभी का आवाहन किया। साथ ही भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे पोषण अभियान को महिला स्वास्थ्य एवं महिला सशक्तिकरण के लिए सार्थक प्रयास बताया। उन्होने महिलाओं को घर से निकलकर आत्मनिर्भर बनने के लिये प्रेरित किया। विधायक द्वारा सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में चल रही विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया गया। महाविद्यालय में लेबोरेट्री नर्सरी स्कूल एवं डे-केयर सेण्टर स्थापित है जो कि नौनिहालों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है जिसका अवलोकन करते वक्त बच्चों के साथ वार्तालाप भी किया और कहा कि इस तरह का केन्द्र निश्चय ही बच्चों के भविष्य निर्माण में सहायक होगा।

कार्यक्रम के अध्यक्ष डा. एनपी सिंह, कुलपति बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने कहा कि बुन्देलखण्ड में नवयुवकों एवं नवयुवतियों में खून की कमी की विकट समस्या है। इसके समाधान के लिए दैनिक आहार में गुड़, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, करौंदा, चुकन्दर को शामिल करने लिये कहा। उन्होंने कहा कि एक परिवार तभी स्वास्थ्य रहता है जब परिवार की महिलायें स्वस्थ रहती हैं। इसलिये आजकल जब मिलावटखोरी की वजह से पोषण युक्त अनाज, सब्जी दूध आदि प्राप्त नही हो पाते हैं तो हमें अपने घर पर ही सब्जी उगाकर परिवार के पोषण का ध्यान रखना चाहिये। उन्होंने विश्वविद्यालय की आगामी कार्ययोजना में गौआधारित प्राकृतिक खेती पर परिक्षण की योजना पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने सभी कृषकों एवं महिलाओं से बायोफोर्टीफाईड किस्मों की तकनीकी जानकारी के लिये कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों की सलाह लेने का आवाहन किया। 

श्री बलराम कछवाहा सदस्य, प्रबन्ध समिति अटारी, कानपुर ने अपने उद्बोधन में पोषक अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिये सभी कृषकों को प्रेरित किया और कहा कि इससे दुगना लाभ होगा जैसे स्वास्थ्य ठीक होगा साथ ही बदलती जलवायु के अनुरूप उत्पादन में वृद्धि होगी। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डा. एनके बाजपेयी ने बताया कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र कुपोषण से प्रभावित है, उन्होंने कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिये स्थानीय पोषक अनाज जैसे बाजरा, जौ, ज्वार, मोटे अनाज के उपयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम में तीन तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया जिसमें डा. आनन्द सिंह ने पोषण वाटिका की मानव स्वास्थ्य में भूमिका, डा. कमालुद्दीन ने बायोफोर्टीफाईड प्रजातियों का परिचय एवं महत्व, डा. वन्दना कुमारी ने प्रोषक अनाज की मानव स्वास्थ्य में भूमिका विषय पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को पोषण वाटिका किट, जामुन, नीबू एवं करौंदे की 100 पौध का वितरण भी किया गया।  इस कार्यक्रम में 80 कृषक 90 महिला कृषकों समेंत कुल 190 लोगों ने प्रतिभाग किया। डा. श्याम सिंह ने सभी अतिथिगण, कृषकों, महिला कृषकों तथा विभिन्न विभागों से आये हुये अधिकारी एवं कर्मचारियों को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डा. सौरभ द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. मंजुल पाण्डेय, डा. मानवेन्द्र सिंह, ई. अजीत कुमार निगम, गिरजेश सिंह यादव, कमल नारायण, धर्मेन्द्र कुमार सिंह आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 


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