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Friday, September 2, 2022

अधिकारियों की नकारात्मक सोच से कार्यों में व्यवधान..........

देवेश प्रताप सिंह राठौर.............. 

भारत देश में बहुत सारे राज्य हैं उन राज्यों में बहुत से राज्य  हैं लगभग सभी  राज्यों  पर  भ्रष्टाचारी अभी  भी  व्याप्त है और आज भी फल फूल रही है,  मोदी जी की सरकार केंद्र में उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार है योगी जी के सख्त दिशा निर्देशों के बावजूद भी सरकारी विभाग जिला प्रशासन कार्यों का निस्तारण पूर्ण ईमानदारी के साथ नहीं कर रही है, बिजली विभाग और स्वास्थ्य विभाग हो यहां पर आज भी सुविधा शुल्क की आवश्यकताएं पढ़ती हैं, क्योंकि यह ऐसे विभाग हैं जिसमें मुख्य रुप से जिले का बिजली विभाग आज भी अधिशासी अभियंता से लेकर जूनियर इंजीनियर तक अधिकांश लोग काम को फंसाने का कार्य करते हैं, क्योंकि योगी जी की सरकार में खुलकर पैसा मांग नहीं सकते उनके चमचे नहीं मांग सकते लेकिन इतना परेशान कर देते हैं इतने कानून नियम बना देते हैं इतनी परेशानियां खड़ी कर देते हैं कि आपको उनके बारे में सोचना पड़ेगा और जो पूर्व में आता आया है भ्रष्टाचारी उस भ्रष्टाचारी के दोषी स्वयं बनते हुए जानते हुए कि यह गलत हम कर रहे हैं लेकिन आदमी परेशान हो जाता है


शिकायत होने पर भी कार्रवाई उचित नहीं होती है ऐसी स्थिति में आदमी यही सोचता है अरे भाई ले देकर काम कराओ बहुत भागदौड़ करा देते हैं, दुनिया भरे के नियम कानून बता देते हैं, सारे कागज पूरे कर दो फिर कोई ना कोई कुछ बता देते  जिससे काम बाधित ही सके  ,सारे कागज पूरे हैं फिर भी अड़ंगा लगा देते हैं, इसलिए किन्ही पचड़े में ना पढ़ते हुए आदमी आज भी भ्रष्टाचारी में लिप्त हो रहा है क्योंकि भ्रष्ट तंत्र आज भी विभागों में बैठा हुआ है। भारत देश बहुत बड़ा देश है बहुत से राज्य हैं कहीं कुछ कम कहीं अधिक भ्रष्टाचारी पूरे देश में व्याप्त है,वर्तमान केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी जी की सरकार ने भ्रष्टाचारी पर बहुत कुछ अंकुश लगाया है लेकिन अभी भी भ्रष्टाचारी विभागों से लेकर प्राइवेट संस्थानों तक अर्ध सरकारी संस्थानों तक अभी भी व्याप्त है आखिर कैसे दूर होगी लेकिन वर्तमान सरकार जिस तरह से कार्य कर रही है उम्मीद है आने वाले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचारी बहुत अधिक कम हो जाएगी, यह मेरा विश्वास है,सरकारी विभागों में अर्ध सरकारी  विभागों में प्राइवेट संस्थानों में आज भीआज भी कार्य नहीं हो रहा है ,आज हम बात करते हैं चाहे कोई भी राज्य क्यों ना हो आपको बताना चाहते हैं किसी भी सरकारी विभाग में चले जाओ बिना पहचान के कार्य नहीं हो रहा है, पहले से कार्य शैली में परिवर्तन हुआ है परंतु परिवर्तन अभी ना के बराबर है आपको बताना चाहते हैं लगभग सरकारी विभागों में कभी न कभी किसी ना किसी काम से जाना होता है हर  किसी का वहां की अनियमितताओं को देखते हैं तो बड़ी पीड़ा होती है अगर किसी अधिकारी को किसी कर्मचारी को काम ना करना हो तो इसमें सबसे बड़ा सुंदर जवाब प्राप्त होता है सरवर नहीं है, या सरवर बहुत स्लो चल रहा है, इस तरह झूठ बोलते हैं और सब कुछ चल रहा हो तो बहाना बना देंगे कागजों की कमी जबकि हफ्ते भर पहले व्यक्ति पूरे कागज किस संदर्भ में क्या-क्या लगने हैं पूरी जानकारी संबंधित अधिकारी नोट करा देता है उसके बावजूद भी जब हम कागजों को कंप्लीट करके आप  के पास ले जाएंगे तब  दूसरा काम रोक अभियान का एक हिस्सा और पकड़ा देंगे जाएंगे इस कागज को और कंप्लीट करके ले आओ तब वह दूसरा व्यक्ति कहता है भाई जब आपने लिख वाया था, पूरे कंप्लीट करके लाते हैं फिर दूसरा पकड़ा देते हो कागज इकट्ठे बता दो कंप्लीट कर के एक साथ ला कर दे , सारे कागज पूरे हो जाते हैं फिर कोई ना कोई कमी उसमें ढूंढ कर फिर बताते हैं,यह बार-बार कमी क्यों बताता है कागजों की इसका मतलब आप समझ गए होंगे लेकिन जो व्यक्ति यह बात कहा है वह व्यक्ति ने स्पष्ट तौर पर मन बना लिया था मैं एक पैसा नहीं दूंगा मेरा काम हुआ या ना हो चाहे मुझे  जितने भी चक्कर कटाए,आपको बताना चाहते हैं  अन्य कोई भी राष्ट्रीय कृत बैंक हो पंजाब नेशनल बैंक मैं मैंने देखा किसी की केवाईसी की फोटो कॉपी नहीं ली जाती है सिर्फ उसके नंबरों के आधार पर कंप्यूटर में अंकित करके उसको ओके कर दिया जाता है,और जो लोग केवाईसी की फोटोकॉपी स्वयं प्रस्तुत होकर देते हैं उनके खाते अपडेट नहीं होते हैं उनके एड्रेस अपडेट नहीं होते हैं इस संदर्भ में जब मैंनजरों से बात करी और वहां के स्टाफ से बात  करी, सिर्फ एक ही जवाब मिलता है कोई ना कोई बहाना बनाकर व्यक्ति को मूर्ख बना देते हैं इसी तरह सरकारी विभागों में कार्य नहीं हो पा रहे हैं जो अधिकारी से लेकर बाबू तक बैठे हुए हैं सारी मिलीभगत है जब बाबू की शिकायत अधिकारी से करो जाकर एक कार्य नहीं कर रहा है अधिकारी  उसके सामने इस तरह कहता है , और बाबू तो बहुत ही शातिर दिमाग की आदमी होता है और कोई ना कोई बात झूठ फरेब बता कर फिर ओ अधिकारी कहते हैं मैं यह देख लो यह तो पूरा करना पड़ेगा मतलब स्पष्ट है सही आदमी और बिना आपरोच बिना पहुंच वाले बिना परिचित लोगों के आज भी कार्य नहीं हो रहे हैं , उन्हें विभागों के चक्कर और ठोकर खानी पड़ रही है,परेशान हो रहे हैंउसेसे स्पष्ट हो जाता है यह सब मिलीभगत है बिना पैसे लिए कुछ होना नहीं है यह सब सिलसिला अभी भी चल रहा है परंतु पहले से बहुत कम है यह हम कह सकते हैं दावे के साथ,

आपको बताना चाहते हैं जिला पंचायत चुनाव हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हुए बुंदेलखंड झांसी में एन आई सी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट कार्यालय के मुस्लिम जाति के हैं जात कोई भी हो धर्म कोई भी हो लेकिन इंसानियत मानवता होनी चाहिए अगर कोई किसी को हिंदू कहता है तो हिंदू कहने का मुझे बुरा नहीं लगता है मुझे गर्व होता है, झांसी के एनआईसी कार्यालय प्रमुख अल्पसंख्यक जाति के हैं (वर्तमान में अब अल्पसंख्यक नहीं है)पर मैंने लिखित तौर पर सजातीय लोगों की ड्यूटी काटने का आरोप लगाया था इस संदर्भ में मैंने प्रार्थना पत्र दिए थेऔर कहा था झांसी के एनआईसी कार्यालय प्रमुख जो अल्पसंख्यक है (आज अल्पसंख्यक देश में नहीं है यह लोग) उन्होंने बहुत ही अपने स जातियों लोगों को जो स्वस्थ थे और उनके चहेतों को सिर्फ मौखिक तौर पर ही ड्यूटी  कट गई, और जो लोग वास्तव में अस्वस्थ थे बीमार थे कोई ना कोई परेशानी से ग्रसित है रोते बिलखते अपनी परेशानी बताते मैंने एनआईसी कार्यालय झांसी में गिड़गिड़ा के लोगों को देखा थे उनके पास गए प्रार्थना पत्र दिए दुनिया भर की कहानी बताइ इसमे कुछ नहीं हो सकता ड्यूटी जाना पड़ेगी बीमार हूं तबीयत खराब हो इससे हमें कोई लेना देना नहीं जाइए यहां से डीएम साहब से मिलिए, जब उन्होंने भगा दिया डीएम साहब से मिलिए जब लोग डीएम साहब के पास गए डीएम साहब ने कहा सीडीओ साहब से मिलिए इसी मिलने का सिलसिले में आदमी परेशान हो गया और उसने सोचा अब कहीं जाने से कोई फायदा नहीं चुनाव की ड्यूटी है हमारी कोई पहुंच है नहीं ना हमें कोई विभाग में जानता है ना हमें कोई कर्मचारी जानता है ना हमारा कोई नेता परिचित है अब हमको अस्वस्थ था की स्थिति में भी ड्यूटी चुनाव की करनी है यह मन लोगों ने बना लिया और इसी मन में बहुत से लोगों की जान चली गई अफसोस की बात है अगर जिला प्रशासन उन लोगों की वास्तविकता को समझ पाता तो मेरा विचार है शायद कुछ लोग बस सकते थे जो सही थे वैसे चुनाव की ड्यूटी में लगभग सभी लोग ड्यूटी कटाने का प्रयास करते हैं लेकिन कभी-कभी हम यह भूल जाते हैं वास्तव में जो सही है उनको अनदेखी करके एक अपराध कर देते हैं जो जीवन भर एक आम जनमानस के चेहरे पर और मन में एक भाव आते हैं शायद ऐसा हो गया होता शायद जिलाधिकारी ने मेरी बात सुन ज्योति शायद सीडियो साहब ने सुन लिया होता तो व्यक्ति सायद को रोना के काल में समा गया शायद वच सकता था, प्रश्न उठते हैं कई, लोग जिला पंचायत के चुनाव में वर्ष 2021 में जब करो ना का बहुत ही पिक समय था झांसी में चुनाव की ड्यूटी अनिंताओ का अंबार था, कुछ लोग ऐसे थे जिनको बुखार था जुखाम था अगर जांच होती तो कोरोना पाजतिव थे और एनआईसी कार्यालय प्रमुख झांसी मैं ड्यूटी इसलिए नहीं काटती कि उनकी सजातीय जाति के नहीं थे, जिला पंचायत चुनाव की ड्यूटी के आंकड़े उठाकर देख लीजिए एनआईसी झांसी कार्यालय प्रमुख के पास उपलब्ध अवश्य होगे बहुत से लोग ऐसे थे जिनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी फिर भी ड्यूटी  की , चुनाव की  लोग डरते हैं और हर व्यक्ति जिस हालातों में हो चुनाव ड्यूटी में जाने का प्रयास करते हैं,क्योंकि रोजी रोटी की बात होती है नियम कानून सख्त है जिस कारण आदमी मौत के मुंह में बीमारी से जूझ रहा था वह भी चुनाव ड्यूटी में गया मैं आपको बता नहीं सकता हूं मैंने ऐसे ऐसे दृश्य देखे हैं ,जब मैं क्षेत्र पंचायत मोठ में मैंने देखा एक आदमी स्ट्रक्चर से चला आ रहा और उसका पूरा परिवार औरतें सब उसी के साथ आ रही मैं वही पर  मैं था मैंने पूछा क्या हुआ भैया इनकी तबीयत बहुत खराब है 3 दिन से बुखार आ रहा है जुखाम है चल नहीं पा रहे हैं और चुनाव ड्यूटी कटवाने गए थे भगा दिया किसी ने चुनाव की ड्यूटी नहीं काटी हालत देखकर मेरे भी रोमें  खड़े हो गए, क्योंकि उसमें कोरोना का प्रचंड रूप चल रहा था थोड़ी देर में देखा उस समय जिलाधिकारी आंद्रे वापसी आए हवा की तरह आए 1 एवम्2 मिनट रुके इधर उधर देखा जोe स्ट्रेचर पर लेटा था बंदा एक निगाह वहां मारी उसके बाद गाड़ी में बैठे फिर चले गए, वहां पर पोलिंग एजेंट ने मुझे बताया पीठासीन अधिकारी मिले बहुत सारे कर्मचारी मिले जी की डू टियां लगी थी उसमें एक लोग ऐसे थे जिनकी जांच नहीं हुई थी कोरोना की लेकिन   उनकी स्थिति देखक मैं 100% कह सकता था कि यह पोज टिव है कोरोना के चुनाव की ड्यूटी के बाद 18 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई थी, कई एक को मैंने देखा बहुत तेज बुखार था  मैं उनके पास गया मैंने कहा सर आपकी जो तबीयत बहुत खराब है,मैं भी बहुत डर रहा था लेकिन मैं भी अपनी ड्यूटी कर रहा था अपना फर्ज निभा रहा था इसलिए मैं वहां पर अपने चैनल की तरफ से वहां पर कवरेज कर रहा था, बाद में मुझे भी कोरोना पोजीटिव हो गया और  आप लोगों की दुआओं से और अच्छे कर्मों के कारण मुझे जीवन पुनः प्राप्त हुआ मैं मां दुर्गा की कृपा से मैं आप लोगों के समक्ष आज उपस्थित हूं, जब एक सीओ रैंक का अधिकारी को मैंने देखा वह बहु त छीक रहे थे और उनकी तबीयत बहुत बिगड़ती जा रही थी मेरा मन नहीं माना मैं गया उनके पास मैंने का सर आपकी तबीयत कुछ गड़बड़ लग रही है तो उन्होंने कहा मेरी 2 दिन से तबीयत खराब है लेकिन जिससे  अधिकारी से कहो कोई सुनता ही नहीं है उस अधिकारी ने कहामुझे कोरोना पॉजिटिव है, मैं सुनकर तुरंत पीछे की ओर चला मैं भी डर गया इतनी पास सिंह से बात करता रहा और यह इस तरह बोले मैं भी डर गया जब उन्होंने कहा 100 परसेंट कोरोंनाआपको बता रहा हूं ,लेकिन क्या करूं मजबूर हूं ड्यूटी करना पड़ रहा है, कोई सुनने वाला नहीं है,इस तरह का जिला प्रशासन मैंने कभी नहीं देखा यह उस अधिकारी के शब्द थे, जिनका सोच शिफारस है वह सब घर पर बैठे हुए हैं हत्या करते हैं स्वस्थ हैं लेकिन कहीं ना कहीं से उनके शुभचिंतक एनआईसी कार्यालय झांसी विभाग में बैठे हुए हैं।मैंने यह समाचार अपने आर्टिकल में कई बार को रो ना  के संदर्भ में जो लापरवाही  2021 में झांसी में हुई उस चीज का वर्णन मैंने हमेशा किया क्योंकि उसमें कुछ जाने ऐसी गई जिन को बचाया जा सकता था, ऐसा मेरा मानना है लेकिन ईश्वर के आगे कुछ चलता नहीं सिर्फ एक भाव रहते हैं शायद ऐसा हो गया होता तो बस यात्रा शायद ऐसा होता तो बच जाता है यह एक मन में विचार उठते हैं परिवार के परिवार घर के घर बर्बाद हो गए बच्चे अनाथ हो गए लेकिन उस समय के जिला प्रशासन की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली पर मैंने हमेशा उत्तर प्रदेश सरकार को बताने का प्रयास किया और आज भी कर रहा हूं, झांसी बुंदेलखंड ना के बराबर चल रहा है,आज यहां बुलडोजर क्यों धीरे चल रहा है झांसी जैसे जिले में जहां पर भू माफिया खनन माफिया माफिया ही माफिया वहां पर बुलडोजर ना के बराबर चल रहा है, हर गली मोहल्ले में गैर कानूनी संपत्तियों का जमावड़ा है परंतु बुलडोजर के नामों पर सिर्फ जब उत्तर प्रदेश सरकार धक्का देती है तब थोड़ा बहुत चल जाता है फिर शांत हो जाते हैं क्योंकि  यहां का सत्ता पक्ष का नेता विपक्ष का नेता सभी एक थाली के चट्टे बट्टे हैं क्योंकि वह नहीं चाह ते झांसी में बुलडोजर चले बुलडोजर चलेगा तब बहुत ही सत्ता पक्ष के विधायकों के यहां भी बुलडोजर चलेगा ऐसा मेरा मानना है क्योंकि सारे गैरकानूनी कार्यो में सत्ता पक्ष का नेता और विपक्ष का नेता दोनों की बहुत तगड़ी भागीदारी है, जब सरकार का  चाबुक  चलता है, तब कहीं थोड़ी बहुत कार्यवाही कर देते हैं, जिससे लगे बुलडोजर चल रहा है गैरकानूनी संपत्तियों पर और जो बड़े-बड़े मगरमच्छ बैठे हुए हैं उनकी अकूत संपत्ति गैरकानूनी आज भी सुरक्षित और बरकरार है।

मेरी सरकार से मांग है किसी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी किसी बैंक के मैनेजर जो चेहरे देखकर कार्य करते हैं जो सत्य को झटका देते हैं और सही लोगों के कार्य इतना समय लगाते हैं कि वह व्यक्ति परेशान हो जाता है आखिर सुविधा शुल्क देने के लिए मजबूर होना पड़ता है,ऐसा आज भी हो रहा है तरीका बदला है पहले से बहुत कम है लेकिन आदत अभी गई नहीं है।

आप बताइए जिसकी तनखा ₹55000 हो एक क्लर्क साधारण पोस्ट वाला आदमी उसके पास दो या तीन मकान कई एक प्लाट पढ़े हो गाड़ियां लग्जरी हो बच्चे पढ़ रहे हो बाहर जिनका खर्चा महीनों में दसियों हजार हो कैसे संभव है 50 एवम् 55 हजार में, जब एक छोटा सा क्लर्क का यह हाल है तो अधिकारियों का क्या हाल होगा इससे आप आकलन लगा सकते हैं। कोई भी व्यक्ति ईमानदारी के वेतन  भोगी है फॉर्च्यूनर गाड़ी  मेंटेन नहीं कर सकता है यह मेरा विश्वास है। चाहे जितना अच्छा वेतन हो सरकारी विभाग में उस हिसाब से खर्चे भी होते हैं यह सब संभव नहीं है जरूर कोई ना कोई कमीशन या गलत काम भ्रष्टाचारी के रूप में अवश्य करते होंगे यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं।

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