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Sunday, September 11, 2022

टीबी मरीजों को गोद लेने की पहल में निजी संस्था भी शामिल

10 टीबी मरीजों को लिया गोद, पोषण किट बांटी 

बांदा, के एस दुबे । देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के लिए हर दिन नए-नए प्रयास हो रहे हैं। इसी में एक टीबी रोगियों का गोद लिया जाना है। टीबी मरीजों को गोद लेने की पहल में अब निजी संस्थाएं भी शामिल हो गई हैं। केयर लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशनल सोसाइटी ने 10 टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण किट बांटी। 

टीबी की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार योजनाओं के साथ करोड़ों रुपये खर्च कर मरीजों तक लाभ पहुंच रही है। बेहतर पोषण के साथ देखरेख के लिए टीबी मरीजों को गोद लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। पूर्व में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अफसरों, सामाजिक संस्थाओं व संभ्रांत लोगों से टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लेने अपील की थी। जिले में मुहिम शुरू हुई। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक अधिकारी, कर्मचारियों, शिक्षकों के आवेदन पर मरीज को गोद दिया गया। वह लोग मरीजों को नियमित दवा लेने और सेहत का विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जब मरीज की सेहत बेहतर होजाती है तो गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। 

टीबी मरीजों को पोषण किट देते चिकित्सक

ठसी क्रम में केयर लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशनल सोसाइटी ने 10 टीबी मरीजों को गोद लिया और उन्हें पोषण किट बांटी। सोसाइटी सचिव डा. मोहम्मद शरीफ ने कहा कि टीबी रोगियों को गोद लेकर उनकी सहायता कई तरीके से की जा सकती है। सबसे पहले टीबी मरीजों से भावनात्मक संबंध बनाया जाना महत्वपूर्ण है। टीबी मरीज को यह विश्वास दिलाएं कि नियमित दवा सेवन से वह जल्द ठीक हो सकते हैं। दवा सेवन के प्रति लापरवाही बरतने से टीबी गंभीर हो सकता है। उनकी सोसायटी ने 10 टीबी रोगियों को गोद लिया है। इसमें तीन महिलाएं व दो बच्चे भी शामिल हैं। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप वर्मा ने कहा कि गोद लेने वाले मरीजों को निक्षय पोषण योजना के लाभ के साथ भूना चना, सत्तू, सोयाबिन, गुड़, मूंगफली, बिस्किट आदि खाद्य पदार्थका एक किग्रा का पैकेट भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को 500 रुपए दिए जा रहे हैं। जनपद में 2662 टीबी मरीज हैं। इनमें 450 बच्चें व 1100 महिलाएं हैं। इस मौके पर डीटीओ डा. संजय कुमार शैवाल, एसटीएस अशरफ हयात हाशमी, पीपीएम कोआर्डिनेटर गणेश प्रसाद, इंद्र कुमार साहू व सोसायटी अध्यक्ष सफूरा खान मौजूद रहीं। शहर के हरदौल तलैया की रहने वाली 29 वर्षीय खैरुन (काल्पनिक नाम) बताती हैं कि दो माह पहले उन्हें टीबी रोगी होने की जानकारी मिली। उनका इलाज चल रहा है। गरीबी के चलते वह बेहतर खानपान नहीं ले पा रहीं थी। यहां मिली पोषण किट से उन्हें काफी मदद मिलेगी। संस्था के प्रतिनिधियों ने उन्हें बेहतर इलाज व जरूरत पड़ने पर किट देने का वादा किया है।  

टीबी का प्रमुख लक्षण है खांसी 

बांदा। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि टीबी के लक्षणों में सबसे प्रमुख खांसी है जो लंबे समय तक चलती है। 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहती है। खांसी के साथ खून आता है। ऐसे लक्षणों वाले व्यक्ति को टीबी जांच की सलाह दें तथा उन्हें अस्पताल ले जाने में मदद करें। उन्होंने लोगों से अपील की, कि सामाजिक दायित्व के तहत मरीजों को अस्पताल आने जाने, इलाज और खानपान का खर्च उठा सकने में मदद करें। टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करें तथा आवश्यक पड़ने पर उनके लिए आहार का प्रबंधन करें। 


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