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Sunday, September 18, 2022

बायोटेक्नोलॉजी बिभाग द्वारा आयोजित किया गया

 देवेश प्रताप सिंह राठौर......  

आनलाईन पूर्ववर्ती छात्र व्याख्यान

बायोटेक्नोलॉजी विभाग बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झाँसी द्वारा पूर्वर्ती छात्र व्याख्यान आयोजित किया गया | माननीय कुलपति बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रो० मुकेश कुमार पाण्डेय के दिशा निर्देशन और डीन साइंस प्रो० आर ० के ० सैनी,  प्रो ० पूनम पूरी, समन्यवक एलुमनाई एसोसिएशन के सराहनीय प्रयासों से अटल एलुमनाई व्याख्यान का आनलाईन सफल आयोजन 17 सितम्बर 2022 को किया गया | कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन डॉ० भानुमती सिंह द्वारा किया गया | विभाग प्रमुख डॉ० सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बायोटेक्नोलॉजी विभाग की स्थापना के बाद यहाँ से बहुत सारे विद्यार्थी पढाई पूरी करके आज देश दुनिया में अनेको महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत है निसंदेह आज के एस कार्यक्रम से वर्तमान समय में पढ़ रहे विद्यार्थियों को एक बेहतरीन अवसर मिलेगा जिससे वह अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पूर्वर्ती


छात्रो के अनुभवों से बहुत कुछ सीख सकते है साथ ही यह भी कहा कि आज के सभी वक्ता सबसे पहले बैच के छात्र है कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले डॉ० भीम प्रताप सिंह का परिचय विभाग के परास्नातक की छात्र रितिका वर्मा ने किया | तद्पश्चात डॉ० भीम जो कि अभी राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान, भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, सोनीपत हरियाणा में सह आचार्य और सह डी० एस० डब्लू० के पद पर कार्यरत है, ने बताया कि विभाग से अपनी शिक्षा प्राप्त करके कैसे वह इस पद तक पहुचे, उससे परिचय कराया और उसके बाद राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान की खूबियों से अवगत कराया और कहा की संसथान का प्रमुख कार्य उद्यमिता विकास पर जोर देना है और कहा कि अपने स्तर से विभाग और छात्रों को पूरा सहयोग देने की बात की | विभाग के बी०एस०सी० द्वतीय वर्ष के छात्र ने पूछा की बायोटेक्नोलॉजी की पढाई के बाद खाद्य उद्योग में क्या अवसर है | इसके पश्चात डॉ० सुधीर कुमार सिंह जो कि अभी सीनिअर मेनेजर (वैक्सीन टेक्नोलॉजी  डेवलपमेंट) भारत बायोटेक में कार्यरत है जिनका संक्षिप्त परिचय अभिषेक कुमार सिंह (बी० एस० सी० द्वतीय वर्ष) ने पढ़ा | डॉ० सिंह जो कि एक मायक्रोबायोलॉजिस्ट है और उन्होंने सूक्ष्मजीवो  के लिए मीडिया डिजाईन शोध पर किये कार्यों की बात की उन्होंने अपनी शिक्षा यात्रा का परिचय देने का बाद कहा कि इंडस्ट्री और अकादेमिक्स के बीच की  दूरिया कम करने की जरुरत पर ध्यान खींचा और कहा कि दोनों को एक दुसरे से मिल कर काम करने की जरुरत है उन्होंने छात्रो को इंडस्ट्री में जॉब पाने के टिप्स भी दिए और बताया कि इंटरव्यू  में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते है और इस बात भी पर जोर दिया कि पढाई के साथ टेक्निकल ज्ञान हासिल करके आसानी से जॉब मिल सकती है | इसके बाद डॉ० अखिलेश कुमार जो कि इडेन हॉर्टिकल्चर सर्विसेज के संस्थापक और सी०इ०ओ० और इडेन हॉर्टिकल्चर मैगजीन के एडिटर इन चीफ भी है जिनका संक्षिप्त परिचय अभिषेक कुमार यादव (एम०एस०सी० छात्र) द्वारा पढ़ा गया | डॉ० अखिलेश ने अपनी विश्वविद्यालय के दौरान अपनी पढाई का जिक्र करते हुआ बताया कि कैसे लैब की पर्याप्य सुबिधाये न होते हुए सबसे पहले बैच के एम०एस०सी० के छात्रो ने अपनी पढाई पूरी कि और आई०जी०एफ०आर०आई० जाकर उपकरणों को सीखने का जिक्र किया और छात्रो को बताया कि आप के अन्दर कुछ सीखने और करने का एक जज्बा होना चाहिए | आगे उन्होंने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी के छात्र बहुत उपयोगी और बहुप्रतिभाशाली होते है वे  लाइफ साइंस के किसी भी क्षेत्र में शोध और जॉब कर सकते है और कहा कि कैसे एक बायोटेक्नोलॉजी का छात्र एग्रीकल्चर के क्षेत्र में काम करके उपलब्धि हासिल कर सकता है अपनी इस्राइल में प्राप्त शिक्षा के बारें में भी बताया है और कहा कि इस्राइल जैसा देश जिसके पास संसाधनों की कमी है उसके बावजूद कैसे एग्रीकल्चर के क्षेत्र में आगे है हमे ऐसे देश से बहुत कुछ सीखने की जरुरत है | डॉ० अखिलेश ने कहा कि हर समस्या एक अवसर है और कहा कि भारत जैसा देश जिसके पास संसाधनों की कमी नहीं है | हमें  बाहर की समस्याओं को हल करने कि जगह अपने देश की समस्याओं को पहचान कर उन पर शोध करने की आवश्यकता है |  छात्रा अदिति यादव ने पूछा की इस्राइल से पी०एच०डी० कैसे की जा सकती है, छात्र अन्सुमन ने पूछा बायोटेक्नोलॉजी की बाद उद्यमी कैसे बना जा सकता है, छात्रा रितिका वर्मा ने लघु शोध और फाजिया ने बायोटेक्नोलॉजी में जॉब से सम्बंधित प्रश्न पूछे |  अंत में धन्यवाद प्रस्ताव डॉ० हेमंत कुमार  के द्वारा किया गया | कार्यक्रम के दौरान डॉ. जोस मैथु , डॉ विनय सिंह चौहान और विभाग के लगभग सभी छात्र उपस्थिति रहे |

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