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Sunday, September 4, 2022

डीएम के प्रयास से दूर हो रहा बांदा का सूखाः गिरराज गोयल

जनपदीय जल संरक्षण गोष्ठी का कालिंजर में हुआ आयोजन

बुन्देलखण्ड को पानीदार बनाने पर जलशक्ति निदेशक ने दिया जोर

फोटो नंबर-1 व 2

बांदा, के एस दुबे । जन-जन तक जल पहुंचाना है, जल संरक्षण अपनाना है की थीम पर ’’जनपदीय जल संरक्षण गोष्ठी’’ का आयोजन एतिहासिक दुर्ग कालिंजर में आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गिरराज गोयल निदेशक, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार व विशिष्ट अतिथि उमाशंकर पाण्डेय, भारत सरकार से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त जल योद्धा एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी अनुराग पटेल द्वारा की गई। सर्वप्रथम सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। इसके पश्चात् मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को बुके देकर एवं बैच अलंकरण कर स्वागत किया गया। 

 


मुख्य अतिथि निदेशक गिरराज गोयल द्वारा कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा कि आज कालिंजर के इस अजेय दुर्ग पर भगवान नीलंकण्ठ ने अपने आर्शीवाद से मुझे जनपदीय जल संरक्षण गोष्ठी में बोलने का अवसर दिया है। जब मुझे जनपद में जल संरक्षण गोष्ठी का प्रस्ताव जिलाधिकारी द्वारा भेजा गया तभी मैंने सोचा था कि मैं उक्त गोष्ठी में जरूर जाऊंगा और जल ग्राम जखनी भी देखूगां। उन्होंने कहा कि प्यासे बुन्देलखण्ड की तकदीर को बदलने के लिये जो ठानी है। वह जरूर साकार होगा। जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने बांदा को पानीदार बनाकर सभी का दिल जीत लिया है और आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिये जो कार्य किया जा रहा है वह इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। हम लोग बरसात के पानी को रोकते नहीं और वह नदी, नाले से समुद्र में चला जाता है और

पेड़ काटे जा रहे है तथा भूमिगत जल का दोहन कर रहे है। इन सभी बातों को सोचना चाहिए और यह चिंता का विषय है। हमें इस परिस्थिति को बदलना पड़ेगा। वैसे तो बांदा में विभिन्न योजनायें चल रही है जिसमें जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, कैच द रेन, वन ड्राप मोर ड्राप आदि चलायी जा रही है। प्रधानमंत्री मंत्री द्वारा जल जीवन मिशन की शुरूआत की गई। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत एक डेढ वर्ष में सभी के घरों में पानी पहुंच जायेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंन्त्रता के बाद से पानी सप्लाई मैंनेमेन्ट, पानी डिमाण्ड मैंनेजमेंट एवं वाटर बजट प्रणाली का अध्ययन करना चाहिए। पूरे विश्व में मात्र 2.5 प्रतिशत ही पानी पीने योग्य है और पूरे विश्व में 17 प्रतिशत आबादी भारत की है। हमारे देश में 81 प्रतिशत पानी किसानों को कृषि के लिये जरूरत पड़ती है। हम जब पैसों की चिन्ता करते हैं और सोचते है कि कितना खर्च करें। ठीक उसी प्रकार हमें पानी के लिये चिन्ता करने की जरूरत है। इसी को देखकर मा0 प्रधानमंत्री जी ने अटल भूजल योजना लांच की गई है।

निदेशक ने कहा कि देश को पानीदार कैसे बनाया जाये। इसको देखते हुये प्रधानमंत्री ने अमृत सरोवर योजना को लांच किया। अमृत सरोवर में जब बारिश का पानी इकठ्ठा होगा। अमृत सरोवर के जल से आस-पास के क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ेगा तो उसके आस-पास के हैण्डपम्प, नलकूप का जल स्तर भी बढ़ेगा। अमृत सरोवर से निश्चित भूमि को पानीदार बन जायेगा और प्यासी भूमि की प्यास बुझ पायेगी। उन्होंने कहा कि बांदा में मैंने जो देखा है मेरी आंखे चौधिंया गई है। जिलाधिकारी अनुराग पटेल के कुशल नेतृत्व में जो जल संरक्षण का कार्य किया गया है, वह वास्तव में सराहनी है। इस तरह के कार्या में एैसे जिलाधिकारी के कुशल नेतृत्व एवं जन सहयोग दोनो की जरूरत है। अन्त में निदेशक द्वारा जनपद में भ्रमण के दौरान जल संरक्षण के कार्या को देखा गया उसकी उन्होंने कंठ मुक्त से प्रंशसा की। विशिष्ट अतिथि उमाशंकर पाण्डेय द्वारा कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुये कहा कि जिलाधिकारी श्री अनुराग पटेल के पूर्व में कराये गये कार्या की सराहना करते हुये कहा कि बांदा का सौभाग्य है कि धरातल से जुड़कर और लोगों को अपने साथ जोड़कर कार्य करने वाले एैसे जिलाधिकारी है। 

जिलाधिकारी अनुराग पटेल द्वारा कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा कि ऐतिहासिक दुर्ग कालिंजर को विकसित करने का प्रसाय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उरई में प्रधानमंत्री द्वारा जब बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे के लोकार्पण कार्यक्रम में अपने सम्बोधन में कहा गया कि बुन्देलखण्ड में जितने भी किले है उन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाये। उसी दिन रात्रि में मुख्यमंत्री द्वारा सूचना चाही गई जिसमें बांदा के कालिंजर दुर्ग, भूरागढ़, रनगंवा एवं स्योढ़ा के किलों को विकसित करने के लिये सूचना भेजी गई है। कालिंजर दुर्ग को विकसित करने के लिये कैफटेरिया, लाइट एण्ड साउण्ड शो, कैमिंग ट्रैकिंग, राक क्लाइंग, नेचर ट्रेल, पैराग्लाइडिंग का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही जल गोष्ठी की तरह कालिंजर विकास गोष्ठी करेंगे और उसमें कालिंजर को विकसित करने के लिये जन सामान्य से सुझाव प्राप्त किया जायेगा। जल्द ही कालिंजर देश ही नहीं पूरे प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में उभरेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के 58 निरक्षर ग्राम प्रधानों को साक्षर बनाने के लिये साक्षर प्रधान, गांव की शान अभियान चलाया गया। जल्द ही द्वितीय चरण में कुल 96 क्षेत्र पंचायत सदस्य व 2 जिला पंचायत सदस्य निरक्षर पाये गये उन्हें भी साक्षर बनाने का प्रयास किया जायेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में 123 बीघे (21.498 हे0) की मृतप्राय मरौली झील को पुर्नजीवित किया गया है इसी प्रकार गहरार नदी, चन्द्रावल नदी के साथ-साथ 50 तालाबों को जलकुम्भी मुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि जिले की समस्याओं के लिये एक मजबूत वकील के रूप में आपके क्षेत्र के विकास के किये सरकार व शासन से मांग करता रहूंगा।  अन्त में जिलाधिकारी द्वारा निदेशक, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार को अंगवस्त्र व मुमेन्टों भेट की गई एवं श्रीमती मीराबाई पटेल, जिला पंचायत सदस्य द्वारा मुख्य अतिथि को तलवार भेंट की गई। कार्यक्रम में मंच का संचालन इन्द्रवीर सिंह द्वारा किया गया।  जनपदीय जल संरक्षण गोष्ठी में उपजिलाधिकारी नरैनी रजत वर्मा, खण्ड विकास अधिकारी, नरैनी, ग्राम प्रधान बिल्हरका, रमेश ग्राम प्रधान फतेहगंज, ग्राम प्रधान मरौली, कटरा कालिंजर, बरछाडढिया, धर्मेन्द्र सिंह ग्राम प्रधान मटौंध ग्रामीण सहित लगभग 300 ग्राम प्रधान, सचिव सहित अन्य अधिकारीगण व ग्रामवासियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।


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