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Wednesday, August 31, 2022

बांदा-कानपुर स्टेट हाईवे तालाब की शक्ल में तब्दील

राहगीरों को हर पल बना रहता जान-जोखिम का खतरा

फतेहपुर, शमशाद खान । योगी सरकार-2 के गड्ढ़ा मुक्त सड़कों की हकीकत देखना है तो कानपुर महानगर से जिल के बिंदकी कस्बा से होते हुए बांदा को जोड़ने वाले राजमार्ग पर कभी भी यात्रा की जा सकती है। अधिकारियों की लापरवाही कहें या फिर सरकार की खोखली घोषणाओं का परिणाम, जिसके चलते राजमार्ग पर यात्रा करना जान-जोखिम में डालने से कम नहीं है। रात्रिकालीन यात्रा तो और भी खतरनाक साबित होती जब तालाब की शक्ल में तब्दील सड़क पर जलभराव के चलते खंदकों का अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है।

तालाब की शक्ल में तब्दील बांदा-कानपुर स्टेट हाईवे।

कानपुर महानगर को सबसे कम दूरी की यात्रा से जोड़ने वाले इस मार्ग की दुर्दशा का खामियाजा करीब पांच लाख की आबादी के लोग तो भुगत ही रहे हैं। साथ ही अन्य जिलों के आवागमन करने वाले लोगों को भी इस महामारी से निपटने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इस मुख्य मार्ग बांदा.से कानपुर मार्ग पर चौडगरा कस्बा से बांदा के चिल्ला कस्बा के बीच लगभग 44 किलोमीटर की दूरी में हाईवे अपना असली चेहरा खो चुका नजर आता है। जगह-जगह तालाब जैसे हालात बने हुये हैं, जबकि जिले पर आने वाली दो विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व सत्ताधारी दल भाजपा से चुने गये विधायक करते हैं। इनमें एक पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। सड़क की बदतर हालत की जानकारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि बहुत अच्छे तरीके से है, लेकिन उनके प्रयास जनता की इस समस्या के निदान की ओर नजर नहीं आते हैं। सरकार के दावों की जमीनी हकीकत जानने और जनता के सवालों से बचने के लिये हालांकि इस मार्ग से आने-जाने में सभी जनप्रतिनिधि कतराते हैं।विधानसभा चुनाव के समय सत्ताधारी दल के क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने आम जनता के बीच बड़े-बड़े वादे करते हुये अपने इरादे भी व्यक्त किया था, लेकिन उनके किये गये वादे और इरादे वर्तमान में हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। क्षेत्रीय जनता और राहगीरों की माने तो इस हाईवे पर डामर की जगह पानी भरा नजर आता है। करीब 44 किमी लम्बाई की सड़क पर अधिकतर जगहों पर दो से तीन फिट गहरे गड्ढों का जोखिम भरा सफर करना लोगों की मजबूरी बन गया है। हालात ऐसे हो गये हैं किइस मार्ग से जुड़े लिंक मार्गों और ग्रामीण इलाकों में रोगियों के लिये एम्बुलेंस जैसे महत्वपूर्ण सुविधाएं समय से नहीं मिल पाती हैं। इलाकई ग्रामीणों की चर्चाओं पर गौर करें तो लगभी 8 साल से सड़क की बदहाली का आलम यूं ही चला आ रहा है। इसका प्रभाव ललौली कस्बा की बड़ी इलाकाई बाजार पर भी पड़ा है। स्थानीयों का कहना है कि कभी ललौली में बड़ा बाजार हुआ करता था और बांदा तक के व्यापारियों का आवागमन था, लेकिन सड़क की बदहाली के चलते बाजार अब सिर्फ गांव की बाजार तक सिमट कर रह गया है। क्षेत्र के अजमतपुर, कीर्तीखेड़ा, शिवरी, रावतपुर, नरैचा, जोनिहा, कोरवां, भवानीपुर व अन्य दर्जनों गांवों समेत आस-पास गांव के लिए हाईवे एक बड़ा संकट बन गया है। सड़क की बदहाली के चलते हाल ये है कि ट्रकों के आए दिन टायर फटने, एक्सल टूटने की घटनाएं वाहन स्वामियों को भारी पड़ रही है। जनका के जुबान पर एक ही सवाल होता है कि आखिर कब सच साबित होगा योगी सरकार का गड्ढ़ा मुक्त सड़कों का सपना?

जिम्मेदारों की बात

फतेहपुर। कानपुर-बांदा राजमार्ग को लेकर मुख्य विकास अधिकारी सत्य प्रकाश का कहना है कि राजमार्ग को दुरुस्त कराने का प्रयास चल रहा है। शासन से मार्ग के दुरुस्तीकरण के लिए बजट की मांग की गई है। बजट मिलते ही मार्ग को दुरुस्त कराया जाएगा।


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