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Friday, July 15, 2022

‘संभव’ अभियान से बच्चों का पोषण होगा ‘संभव’

तीन माह अलग-अलग थीम पर चलेगा अभियान 

माताओं को बताए जा रहे स्तनपान के फायदे

आंगनबाड़ी केंद्रों पर चल रहीं गतिविधियां 

बांदा, के एस दुबे । बच्चों को कुपोषण के कंलक से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर संभव अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें चिन्हित कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के साथ ही उनकी माताओं के स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। यह अभियान तीन माह यानी सितंबर तक चलेगा। प्रत्येक माह के लिए अलग-अलग थीम है। इस माह जुलाई में स्तनपान प्रोत्साहन को लेकर अभियान चल रहा है। 


जिला कार्यक्रम अधिकारी राम प्रकाश ने बताया कि अगस्त में अभियान की थीम ऊपरी आहार प्रोत्साहन और सितंबर के लिए एनीमिया प्रबंधन एवं दस्त से बचाव रखी गई है। अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में (एनआरसी) भर्ती कराया जाएगा। वर्तमान में जिले में सैम (गंभीर कुपोषित) 2643, मैम (माध्यम कुपोषित) 8536 और गंभीर अल्पवजन (अतिकुपोषित) 10585 बच्चे चिन्हित हैं। कुपोषित बच्चों के घरों में खान-पान, स्वास्थ्य जांच और साफ-सफाई संबंधी व्यवहार की जानकारी, पुरुषों की सहभागिता, गोद भराई, पोषण किट वितरण इत्यादि गतिविधियां चल रही हैं। 

सीडीपीओ (बिसंडा) प्रियांशु पटेल ने बताया कि बच्चे के उचित शारीरिक विकास के लिए कम से कम 6 माह तक बच्चे को केवल मां का दूध दिया जाना आवश्यक होता है। इस दौरान बाहर का दूध अथवा ऊपरी आहार, शहद, घुट्टी या टॉनिक बच्चे की आंतों में इन्फेक्शन पैदा करता है। जिससे बच्चे को दस्त होने लगती है और बच्चा कुपोषित हो जाता है। यूनिसेफ के जिला समन्वयक (पोषण) देवेंद्र कुमार ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर गतिविधियां आयोजित कर गर्भवती व धात्री महिलाओं को स्तनपान के फायदे बताए जा रहे हैं।


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