सत्य की राह में कांटे हैं, पर विजय सत्य की............. - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Friday, July 29, 2022

सत्य की राह में कांटे हैं, पर विजय सत्य की.............

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

( स्वतंत्र पत्रकार)

...........बहुत सारे लोग सत्य सत्य की बात करते हैं सत्य के पथ पर चलने में बहुत से कांटे हैं, बहुत सी परेशानियां उठानी पड़ती हैं बहुत सारी परेशानियों के बाद जब हमें विजय मिलती है सत्य के रूप में और सत्य एक न एक दिन सत्य की विजय होती है,लेकिन सत्य और असत्य के बीच की जो दायरा है वह बहुत ही कांटो का रहता है इनमें व्यक्ति टूट जाता है सत्व को प्राप्त करते करते हैं, बहुत कुछ नुकसान हो चुका होता है खो चुका होता है लेकिन कहावत कही गई है सत्य की विजय होती है यह बिल्कुल सत्य है,दुनिया में मूल्यवान वही होता है जो या तो दुर्लभ होता है या जिसका कुछ महत्त्व होता है और उसका तो मूल्य और अधिक होता है जिसका ना तो उत्पादन किया जा सकता है और ना ही उसे नियंत्रित किया जा सकता है ‘समय’ उनमें से सबसे प्रमुख है दुनिया में आने वाले प्रत्येक मनुष्य के पास एक निश्चित मात्रा में समय होता है जो उसके जन्म के लेने के समय से ही निरंतर एक नियमित गति से घटता जाता है और जो क्षण व्यक्ति एक बार जी लेता है वह दोबारा उस जीवन में लौटकर नहीं आता अतः समय


अत्यंत ही मूल्यवान होता है लेकिन क्या सत्य उससे भी अधिक मूल्यवान होता है इसको जानने के लिए सबसे पहले यह जानना होगा कि वास्तव में सत्य क्या होता है।सत्य शब्द संस्कृत के सत शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है शास्वत, वास्तविक या यथार्थ सत्य वास्तव में एक नैतिक मूल्य होता है जिस पर मानव समाज टिका होता है, सत्य एक साथ साध्य और साधन दोनों है जिसके द्वारा जिसको प्राप्त करने के लिए प्राचीन काल से लोगों द्वारा प्रयास किया जाता रहा है।सत्य को अगर हम साधन के रूप में लेते हैं तो यह मनुष्य के प्राकृतिक अधिकारों जैसे स्वतंत्रता समानता आदि को प्राप्त करने का एक माध्यम है क्योंकि वही व्यक्ति अपने हित में स्वतंत्र रूप से विवेकशील निर्णय ले सकता है जिसे वास्तविकता का पूर्ण व सही ज्ञान हो तभी वह व्यक्ति वास्तव में स्वतंत्र माना जाएगा तभी व्यक्ति समाज में अपना उचित स्थान बनाए रख सकता है और तभी वह अपने खिलाफ किए जाने वाले कार्यों के विरुद्ध आवाजा उठा सकता है, साम्यवादी विचारधारा के अनुसार पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य का पृथ्वी के प्रत्येक संसाधन पर बराबर का अधिकार होता है लेकिन आज समाज में हमें अत्यधिक असमानता देखने को मिलती है और यह असमानता कुछ लोगों के द्वारा अन्य लोगां के अधिकारों को हड़पकर वह उन्हें उनके प्राकृतिक अधिकारों के बारे में सत्य ना बनाने के कारण बनी हुई है अतः सत्य जानकर ही व्यक्ति धरती पर अपने प्राकृतिक अधिकारों को प्राप्त कर समानता का जीवन जी सकता है।कहा जाता है कि सत्य के रास्ते पर चलने वाले की ही जीत होती है और इतिहास में इसके अनेकों उदाहरण भी हैं चाहे वह पौराणिक कथाओं में रावण के खिलाफ राम की विजय हो या महाभारत में पांडवों की या वास्तविक जीवन में महात्मा गांधी द्वारा सत्याग्रह के हथियार का प्रयोग कर भारत को आजादी दिलवाना हो सभी जगह सत्य की ही जीत हुई है लेकिन सत्य का रास्ता इतना आसान नहीं है सत्य को एक साधन के रूप में प्रयोग करने वालों को इसके लिए अत्यधिक मूल्य चुकाना पड़ा है जैसे राम को वनवास पांडवों को सत्य को उद्धाटित करने वाले बुद्धिजीवियों को सत्य की कीमत चुकानी पड़ती है और कई बार यह कीमत उनकी जान होती है अतः सत्य अत्यधिक मूल्यवान होता है इसीलिए शायद साहिर लुधियानवी जी ने कहा है किइसके अलावा सत्य केवल इसलिये ही मूल्यवान नहीं होता कि इसके लिये अत्यधिक मूल्य चुकाना पड़ता है बल्कि इसलिये भी मूल्यवान होता है कि स्वयं में एक मूल्य है जिस पर अन्य मूल्य टिके हैं जैसे-विश्वास, ईमानदारी, संवेदनशीलता, दया, अपनत्व और जिन पर टिकी है मानव की मानवता इस प्रकार सत्य एक तरह से मानव के अस्तित्व का आधार है।इसी प्रकार बहुत से विद्वानों ने इस धरती व संसार को मोह माया मानते तथा इसे क्षणिकवाद उठा मानते हैं यह जीवन का वास्तविक लक्ष्य सत चित आनंद को प्राप्त करना मानते हैं क्योंकि धरती पर मनुष्य का वास्तविक लक्ष्य भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने से नहीं बल्कि उस परमात्मा को प्राप्त करने में है जो प्रत्येक मनुष्य का अंतिम लक्ष्य है इसलिए कहा गया हैा,एकर सत्य के पराजित होने या अनुपस्थित होने से मानवता और यहाँ तक की मानव के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा हो सकता है।वही अगर हम सत्य को यदि एक साथ के रूप में मानते हैं तो भी इसे जानने के लिए सदियों से विभिन्न विद्वानों ने अनेकानेक प्रयास किए हैं सत्य की खोज के लिये महात्मा बुद्ध, महावीर जयंती ऐसे लोगों ने अपना राज-पाठ त्यागकर संयासियों का जीवन बिताया महात्मा बुद्ध के शब्दों मेंहाँ यह अलग बात है कि कई बार सत्य के रास्ते पर चलने वालों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा वांछित लक्ष्य प्राप्त होने में देर लगती है लेकिन यह सत्य है कि विजय हमेशा सत्य की ही होती है लेकिन यह भी सही है कि भगवान के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं।इस प्रकार हम देखते हैं कि जहाँ सत्य को प्राप्त करने के लिए अत्यधिक मूल्य चुकाना पड़ता है वहीं सत्य को प्राप्त कर लेने से हम अपने लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर लेते हैं जिससे मानवता का आधार मजबूत होता है और मानवमात्र पर विश्वास टिका रहता है क्योंकि जहाँ सत्य नहीं होता वहाँ अराकता और अन्याय अपना मुँह उठाते हैं और शायद इसीलिये भारत सरकार ने अपना राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते रखा है तथा भारतीय नागरिकों को सत्य जानने के लिये सूचना का अधिकार अधिनियम पारित कर सत्य की प्राप्ति हेतु एक महत्त्वपूर्ण हथियार मुहैया करवाया है क्योंकि धरती पर समय तो प्राकृतिक रूप से सबको बराबर मिला है वही धरती पर प्राकृतिक अधिकार भी बराबर ही मिले हैं लेकिन समय के साथ ही झूठ का सहारा लेकर व्यक्ति क्यों उसके प्राकृतिक अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है जिसे सत्य के माध्यम से ही वह दुबारा प्राप्त कर सकता है अन्यथा धरती पर उसे मिला अधिकार वह प्राप्त नहीं कर पाएगा और बिना अधिकारों के उसका जीवन निरर्थक ही रहेगा इसीलिये किसी ने कहा है कि जीवन लंबा नहीं महान होना चाहिए। मान सम्मान और स्वाभिमान के साथ जिया हुआ जीवन ही सच्चा जीवन है। तभी हम कहतेे हैं सत्य परेशान होता है पराजित नहीं।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages