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Friday, July 29, 2022

पढ़ाई के नाम पर मोबाइल की जद में जकड़े जा रहे बच्चे

कोरोना के समय मोबाइल बने थे पढ़ाई का साधन, अब बच्चों की लत से अभिभावक परेशान

नियमित कक्षाओं के बावजूद आनलाइन वर्क, स्कूलों पर उठ रहे सवाल 

वर्क के बहाने परिजनों के फोन हथियाकर पढ़ाई की जगह खेलते गेम

फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई का माध्यम रहे मोबाइल फोन अब अभिभावकों पर भारी पड़ रहे हैं। बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत ने अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दी है। नियमित खुलने वाले स्कूलों में भी दिए जा रहे ऑनलाइन वर्क से जहां अभिभावक बच्चों को मोबाइल फोन देने पर मजबूर हैं वहीं बच्चे वर्क खत्म होने व बीच में ही गेम खेलने में घंटो बिता रहे हैं। जिससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है बल्कि आंखों की रोशनी और मानसिक और बौद्धिक क्षमताओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कभी मोबाइल फोन लेकर कक्षा में आने पर स्कूलों की तरफ से बच्चे को नोटिस दिया जाता था अभिभावकों को विद्यालय बुलाकर बच्चे के क्लास में मोबाइल फोन लेकर आने की शिकायत करने के साथ ही चेतावनी भी देते थे। स्कूलों की सख्ती से बच्चे भी डरते थे। वहीं अभिभावक भी इस विषय पर सख्त रुख अख्तियार करते थे लेकिन कोरोना महामारी के दौरान सभी सीमाएं टूट गयी। लॉकडाउन में स्कूलों की तालाबंदी के दौरान इसी मोबाइल फोन ने बच्चों को पढ़ाई में ऐसी मदद हासिल हुई कि बच्चे उसके लती बन गये। कम पढ़े लिखे अभिभावकों के साथ ही शिक्षित परिवारों के बच्चों में भी मोबाइल फोन की लत इस कदर गहरा चुकी है कि अभिभावकों को इससे पार पाने में पसीने छूट रहे हैं। रोज़ स्कूल खुलेने व क्लास लेने के बाद भी विद्यालय के शिक्षकों का आनलाइन वर्क देने का चलन हो गया है। जिसको लेकर अभिभावकों में स्कूलों के प्रति आक्रोश है। कभी मोबाइल फोन को मना करने वाले स्कूल खुद अब बच्चों में मोबाइल कल्चर को बढ़ावा देते नजर आ रहे है। पढ़ाई के नाम पर घंटो मोबाइल फोन पकड़े बच्चों की इस हरकत से परिजन परेशान होकर स्कूलों को दोषी ठहरा रहे है।

मोबाइल के जरिए वर्क करता छात्र।

आभासी दुनिया बच्चों को अपनों से कर रही दूर

फतेहपुर। मनोचिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई या फिर आनलाइन गेमिंग हो या फिर कोई और वजह देर तक मोबाइल फोन का प्रयोग किशोरों एवं युवाओं के साथ बच्चों के मानसिक स्तर की क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। बच्चे आनलाइन गेमिंग की जद में आकर कई बार अपराधिक कदम तक उठा लेते हैं। मोबाइल फोन का अधिक प्रयोग बच्चों के मानसिक विकास को तो प्रभावित करता है बल्कि उनकी क्षमताओं को भी कमतर कर देता है बल्कि मानसिक रोगी तक बना देता है, जिससे बच्चों के स्वभाव व हावभाव पर भी असर पड़ता है। माता-पिता का समय नहीं मिल पाता। इससे वह मोबाइल की आभासी दुनिया को ही अपनी असली दुनिया समझते हैं। साथ ही माता पिता से जुड़ाव भी खत्म होने लगता है।

अभिभावक संघ मिलेगा डीएम से

फतेहपुर। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष दीपक कुमार डब्लू के अनुसार प्रतिदिन स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों को ऑनलाइन वर्क दिया जाना समझ से परे है। वर्क के बहाने बच्चे मोबाइल फोन काफी देर लिए रहते हैं। जिससे कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। इस समस्या को लेकर जल्द ही अभिभावक संघ डीएम से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करवाएगा और मोबाइल पर वर्क देने वाले स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करेगा।

आंखों की रोशनी को करती प्रभावित

फतेहपुर। नेत्र चिकित्सकों का कहना रहा कि बच्चों के मोबाइल फोन व लैपटॉप के अधित प्रयोग करने से उनकी विज़न क्षमता प्रभावित हो रही है। जिससे छोटे-छोटे बच्चों को भी चश्मा लगाना पड़ रहा है।

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