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Sunday, July 10, 2022

बौद्धिक संपदा अधिकार और पेटेंट आर्थिक विकास के सूचक - प्रो मुकेश पाण्डेय......

रिपोर्ट.... देवेश प्रताप सिंह राठौर

बुविवि और यूजीसी के संयुक्त तत्वधान में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स का हुआ उद्घाटन

देश भर से 120 से अधिक शिक्षकों ने की सहभागिता विशेषज्ञों ने रखे विचार

झांसी। वैश्विक स्तर पर आज आर्थिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। इस आर्थिक वृद्धि का मूल्यांकन करने पर जो महत्वपूर्ण कारक सामने आता है वह शोध और पेटेंट की संख्या। जो देश शोध में सक्रिय एवं पेटेंट में अग्रणी है वही आज वैश्विक स्तर पर आर्थिक क्षेत्र में नेतृत्व कर रहे हैं। उक्त विचार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पाण्डेय ने रिफ्रेशर कोर्स के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए। इसका आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षक एवं शोध में कार्यरत मानव संसाधन वैश्विक स्तर पर सबसे उन्नत लोगों में है। लेकिन हम अपने शोध कार्यों का पेटेंट कराने में कम रुचि दिखाते हैं। इसका एक कारण जागरूकता का अभाव है। वर्तमान में यूजीसी इस प्रकार के अनेक कार्यक्रमों को आयोजन कर रहा है। उन्होंने


कहा कि निश्चित ही रिफ्रेशर कोर्स से देशभर के शिक्षकों को बौद्धिक संपदा अधिकार और पेटेंट के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। रिफ्रेशर कोर्स के संयोजक डॉ राजेश कुमार पांडे ने बताया की उद्घाटन सत्र के साथ ही अन्य तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार व्यास, निदेशक, दूरवर्ती सतत शिक्षा केंद्र, ग्रामोदय विश्वविद्यालय झांसी ने नई शिक्षा नीति के अनेक पहलुओं को प्रतिभागियों के सामने रखा। द्वितीय सत्र में प्रोफेसर अमृतेश शुक्ला, वनस्पति विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने बौद्धिक संपदा अधिकार के अनेक तकनीकी एवं कानूनी पहलू से प्रतिभागियों को अवगत कराया। अंतिम सत्र में प्रोफेसर राजेश कुमार दुबे, निदेशक, यूजीसी एचआरडीसी जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर ने 15 दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के संचालन, प्रतिभागियों के दायित्व एवं उनके मूल्यांकन आदि से संबंधित जानकारी रिफ्रेशर कोर्स में सहभागिता कर रहे शिक्षकों को प्रदान की। सह संयोजक डॉ कौशल त्रिपाठी ने बताया कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास में आज एक और अध्याय का सृजन हो गया। कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडे के निर्देशन में आयोजित प्रथम रिफ्रेशर कोर्स से निश्चित ही आने वाले समय में अकादमी गतिविधियों में और अधिक वृद्धि होगी। इसके पूर्व सह निदेशक निधि संदाल ने यूजीसी द्वारा संचालित अनेक कार्यक्रमों की जानकारी दी। तकनीकी सहायता प्रमोद कुमार ने एवं संचालन डॉ राजेश पांडे ने किया।

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