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Monday, July 11, 2022

संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

रिपोर्ट देवेश प्रताप सिंह राठौर


संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान के छठवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 21 जुलाई 2022 से 23 जुलाई 2022 पर्यन्त चलेगा। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय - संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान- परंपरा । इसके उपविषय वेद, वेदांग, साहित्य, दर्शन, धर्मशास्त्र,पुराणेतिहास, तन्त्रादि विषयों से संबंधित हैं। इस संगोष्ठी के आयोजक अध्यक्ष श्री अरुण कुमार मंगल जी (अधिवक्ता) व आयोजक मण्डल के सदस्यों से ज्ञात हुआ है कि इस संगोष्ठी में कुछ  पूर्व केन्द्रीयमंत्री, कुुछ राज्यस्तर के पूर्व मंंत्री, अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति, विशेष अतिथि आदि अनेक गणमान्य सदस्यों के सम्मिलित होने का अनुमान है । इस संगोष्ठी में लगभग 450 लोग भाग ग्रहण करेंगे, जिनमें लगभग 100 विद्वान, 200 शोध छात्र व 150 श्रोतागण उपस्थित रहेंगे । इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में  संस्कृतानुरागी तथा भारतीयसंस्कृतिनिष्ठ अनेक


विद्वान विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों जैसे-  दिल्ली विश्वविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, पुरी विश्वविद्यालय, दरभंगा विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जवाहरलालनेहरु विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तिरुपति आदि अनेक विश्वविद्यालयों व गुरुकुलों से विषय - विशेषज्ञ उपस्थित होंगे। यह संगोष्ठी ज़ूम मीट के माध्यम से होगी तथा यूट्यूब में भी इसका तीनों दिन लाइव प्रसारण होगा।  संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान मध्यप्रदेश ,सचिव डॉ  रमा शर्मा ने बताया कि यह संस्थान संस्कृत भाषा व भारतीय संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन हेतु निरंतर 5 वर्षों से कार्य कर रही है । यह संस्था का छठवाँ स्थापना दिवस है और इसी उपलक्ष्य में इस प्रकार का आयोजन संस्था द्वारा किया जा रहा है । इस संस्था के अनेक कल्याणकारी उद्देश्य हैं, जैसे - भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाना, भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना, संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण व उसका संवर्धन करना इत्यादि, और इन्हीं सभी उद्देश्यों को ध्यान में रखकर इस संस्था के द्वारा गत 5 वर्षों से वृक्षारोपण, गौ सेवा आदि अनेक प्रकार के प्रकल्प चलाए जा रहे हैं जो भारत को हर रूप से सुदृढ़ बनाने के मार्ग पर सतत् प्रयासरत है। इस संस्था द्वारा भविष्य में एक गुरुकुल/आश्रम के निर्माण की भी परिकल्पना है जिसमें भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने हेतु बहुआयामी विषयों का समावेश होगा । इस प्रकार इस गुरुकुल से अनेक प्रखर बुद्धि युक्त विद्वान हमारे भारत को मिल सकेंगे। संस्था द्वारा महिलाओं के योगदान को नमन करने व महिलाओं को पुनः उस शिखर तक पहुंचाने हेतु निरंतर प्रयास के रूप में विदुषी सम्मेलन का भी आयोजन किया जाता है । इसके अलावा इस संस्था द्वारा अनेक व्याख्यानमालाओं का आयोजन भी निरंतर हो रहा है, जिससे संस्कृत व संस्कृति के अनुरागी लाभान्वित होते हैं ।  इस संस्था द्वारा छात्रों को UGC NET/JRF की कक्षा भी निःशुल्क प्रदान की गई है और आगे भी की जाएगी। इस संस्था के द्वारा शिक्षाप्रियदर्शिनी  निःशुल्क अंतर्राष्ट्रीय शोधपत्रिका भी प्रकाशित की जा रही है । इसके साथ-साथ यदि  संस्था के विस्तार को कहा  जाय तो यह अनेक राज्यों  जैसे दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा और आन्ध्रप्रदेश आदि राज्यों में भी संस्कृतभाषा एवं भारतीयसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सफलतापूर्वक कार्य कर रही है।

 एक पहल भारतीय संस्कृति की ओर...

जयतु संस्कृतम् ! जयतु भारतम् ! जयतु भारतीया संस्कृतिः !

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