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Thursday, July 14, 2022

मानक विहीन नर्सिंग होम का मायाजाल, सेटिंग गेटिंग के सहारे करोड़ो का होता कारोबार

आंख बंद रखने के नाम पर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को लाखों रुपए की मिलती चौथ

सेहत महकमे के भ्रष्टाचार के चलते हर वर्ष सैकड़ां लोग गंवाते जान

टीन शेड और एक कमरे में पक्का तलाब में संचालित हो रहा था ओम नर्सिग होम

फतेहपुर, शमशाद खान । अवैध रूप से जनपद में संचालित मानक विहीन नर्सिंग होम में मरीज़ों की होने वाली मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को शहर के पक्का तालाब स्थित ओम नर्सिंग होम एवं प्रसव केंद्र में गलत ऑपरेशन के कारण बांदा जनपद की एक महिला की मौत होने व परिजनों के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद भी जनपद के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद नहीं टूटी। टीन शेड और एक कमरे के मकान में मानक विहीन नर्सिंग होम व प्रसव केंद्र स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में चलाया जाना आसानी से समझा जा सकता है। जनपद में अवैध व मानक विहीन नर्सिंग होम की अच्छी खासी तादात है। शहरी सीमा के अंदर ही बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चलने वाले नर्सिंग होम सैकड़ों की तादात में निकलेंगे। वही जनपद स्तर पर संख्या हज़ार को आसानी से पार कर सकती है। चिकित्सा विभाग के अफसरों से सांठगांठ के भरोसे निजी नर्सिंग होम संचालको ने बाहरी डाक्टरों की

ओम नर्सिंग होम एवं प्रसव केंद्र।

डिग्री दिखाकर अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है तो कई ऐसे भी है जहां झोलाछाप डाक्टरों ने बिना किसी दस्तावेज़ व बिना किसी सुविधा के नर्सिंग होम का संचालन करना शुरू कर दिया है। जहां चंद पैसों के लिये दलालों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रो के भोले भाले लोगो को फँसाकर उनके मरीज़ों को अपने अस्पताल में भर्ती कराया जाता है और शुरू होता है तीमारदारो के शोषण का सिलसिला। मरीज के इलाज के नाम पर तीमारदार से मोटी रकम वसूलने के बाद झोलाछाप डाक्टरों के द्वारा बिना किसी सुविधा वाले अस्पतालों में इलाज किया जाता है। इस बीच मरीज़ को आराम मिला तो ठीक नही तो पैसा ऐंठने के बाद नर्सिग होम संचालक तीमारदारों को बुलाकर बेहतर इलाज के लिए कानपुर या प्रयागराज जनपद लिए रेफर कर अपने सर से बला टाल देते है। इस बीच तमाम मरीज़ या तो दम तोड़ देते है या फ़िर अपने मरीज़ की जान बचाने के लिए परिजन उन्हें लेकर भागते है। झोलाछाप डाक्टरों के अवैध नर्सिंग होम व मानक विहीन अस्पताल का प्रतिवर्ष करोड़ो रूपये का कारोबार होता है। अफसरों की निगाहों से बचने के लिए भ्रष्ट कर्मियों के ज़रिए सांठ गांठ की जाती है और मरीज़ों से वसूली जाने वाली रकम में से चौथ स्वास्थ्य विभाग के अफसरो तक पहुचाई जाती है। प्रति माह मोटी रकम के लालच में स्वास्थ्य विभाग के अफसर मानक विहीन व अवैध नर्सिंग होम पर आँख मूंदे रहते है। जिससे झोलाछाप डॉक्टर अपनी मनमानी जारी रखते हैं। पूर्व में अवैध नर्सिंग होम के संचालन के मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी पुष्पा सिंह ने बड़ी कार्रवाई की थी। जिसमें अवैध रूप से नर्सिंग होम संचालन करने वाले अपने अपने अस्पताल में ताला डाल कर खुद भी कार्रवाई से भय से भूमिगत हो गए थे लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी पुष्पा सिंह के जाते ही अवैध नर्सिंग होम के संचालक बेलगाम होकर लोगों की जान से खिलवाड़ करने में जुट गए। भ्रष्टाचार के मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां ज़ीरो टॉलरेंस अपनाते हैं वही भ्रष्ट अफसरों पर नज़र रखने का सख्त निर्देश दे रखा है। स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक का हाल ही में विभिन्न सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण कर स्वास्थ्य महकमे में काम न करने वाले अफसरों व कर्मियों को फटकार लगाई व कई कर्मी कार्रवाई की जद में भी आये है। जनपद में अवैध नर्सिंग होम संचालन का मामला स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के दरबार में है। अवैध नर्सिंग होम व मानक विहीन अस्पतालों के संचालक व भ्रष्ट अफसरों के सिंडिकेट पर किस तरह की कार्रवाई होती है यह देखने की बात है।


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