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Friday, July 22, 2022

करोड़ों की शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे, प्रशासन बेखबर

भूलेख में दर्ज है गाटा संख्या और रकबा, राजस्व विभाग कर रहा अनदेखी

फतेहपुर, शमशाद खान । योगी सरकार ने भले ही करीब तीन साल पहले शत्रु संपत्ति को सुरक्षित रखने, उन्हे अवैध कब्जे से मुक्त कराने का शासनादेश जारी किया है, लेकिन जिले के प्रशासनिक अमला पर इसका कोई प्रभाव नहीं है। गाटा संख्या 1931 कस्टोडियन भूमि का मामला सुर्खियां बना तो मजबूर होकर प्रशासन ने उसको राज्य सरकार के पक्ष में कुर्क करने की बात कही, लेकिन शहर में बेसकीमती अन्य शत्रु संपत्तियों पर अभी भी अवैध कब्जे बरकरार हैं। जिनसे सरकारी अमला व राजस्व विभाग पूरी तरह से मुंह फेरे हुए हैं।

करोड़ों की शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे, प्रशासन बेखबर

शहर के कस्बा दक्षिणी की ही अगर बात की जाए तो गाटा संख्या 1931 के अलावा गाटा संख्या 1968 की खतौनी में जेर इंतजाम कस्टोडियन के कर्ताधर्ताओं ने किसी को दिया, कहां गई जमीन? कुछ भी राजस्व विभाग को पता नहीं है। गाटा संख्या 1968 का रकबा करीब डेढ़ बीघा बताया जा रहा है, जो सन् 1960 फसली के पूर्व खतौनी में दर्ज है। ऐसा नहीं है कि राजस्व विभाग इस बात से अनभिज्ञ है, लेकिन लेखपाल से लेकर उप जिलाधिकारी तक शत्रु संपत्तियों से मुंह फेरे हुए हैं। भूलेख में दर्ज अन्य कस्टोडियन खतौनियों की बात करें तो एक पड़ताल के बाद कस्बा दक्षिणी की जो खतौनियां प्रकाश में आयीं है। उनमें 1426-1431 फसली खतौनी के अनुसार गाटा संख्या 2317 मि. रकबा 0.2670 हे., गाटा संख्या 2321 रकबा 0.1210 हे., गाटा संख्या 2346 रकबा 0.0080 हे., गाटा संख्या 2988 रकबा 0.1210 हे. अर्थात् कुल भूमि 0.5170 हे. प्रशासनिक संरक्षण से दूर है। इसी तरह कस्बा दक्षिणी में ही गाटा संख्या 2200 क रकबा 0.1460 हे. व गाटा संख्या 2200 ख रकबा 0.1740 हे. अर्थात् कुल भूमि 0.3200 हे. दर्ज है। यह भूमि किस दशा में है, राजस्व विभाग के जिम्मेदारों को पता नहीं है।

कस्टोडियन भूमि में आलीशान इमारतें कैसे बनीं?

कस्बा दक्षिणी में दर्ज खतौनियों पर गौर करने के बाद जब एक राजस्व कर्मी से बात की गई तो नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ लोगों ने कागजातों में हेराफेरी करके खरीद-फरोख्त की गई और उसी को आधार बना कर लोगों ने कस्टोडियन भूमि पर मकान आदि बना लिया। गाटा संख्या-2317 मि. व गाटा संख्या 2321 की भूमि वर्मा तिराहा से कलक्टरगंज की शुरूआत में सड़क के किनारे से ही शुरू होती है, जो करोड़ो रुपये कीमत की है। इसी तरह अन्य कस्टोडियन जमीनों पर भी कुट रचित षड़यंत्र के तहत कागजात तैयार कर लोगों ने कब्जा कर रखा है।

एसडीएम का रिसीव नहीं हुआ फोन

शहर की कस्टोडियन भूमि पर अवैध कब्जों के बावत उप जिलाधिकारी सदर से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। सीयूजी नंबर की घंटी बजती रहीं लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका। इसलिए अधिकारिक तौर पर प्रशासनिक पक्ष की या होने वाली किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं हो सकी।


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