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Sunday, July 17, 2022

सावन का पहला सोमवार 18 जुलाई को

मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिये सावन मास में व्रत एवं तप किया था। सावन मास में शिव उपासना का विशेष महत्व है। शिव भक्त श्रावण के सभी सोमवार को सावन व्रत रख कर शिव उपासना करते है। सोमवार को महादेव का प्रिय वार माना जाता है और सावन मास उनको अति प्रिय है । शिव पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव  उसकी समस्त मनोकामना को पूर्ण करते हैं सावन माह में श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए जाते हैं शिव के साथ गणेश, पार्वती व नन्दी जी की भी पूजा की जाती है। श्रावण में जल, दूध , दही, शहद, घी, चीनी, जनेऊ, चन्दन, बेलपत्र, भांग-धतूरा आदि से पूजन कर कर्पूर से आरती करने का विधान है।


सावन मास में शिवलिंग उपासना से नवग्रहों के रोगों एवं कष्टों की शन्ति जन्मकुण्डली में  ग्रहों के खराब प्रभाव से होने वाले रोगों एवं कष्टों को हम शिव उपासना से अनुकूल कर सकते है। अगर कुण्डली में सूर्य ग्रह खराब है तो नेत्र रोग , ह्नदय रोग, सिर दर्द से आराम के लिए शिवलिंग पर आक के पुष्प-पत्ते एवं बिल्व पत्रांे से पूजन करना चाहिए। चन्द्र ग्रह से मानसिक  रोग , अवसाद खाँसी, जुकाम आदि से आराम के लिए तिल मिश्रित दूध से अभिषेक करना चाहिए। मंगल ग्रह की खराबी से उच्च रक्तचाप संबधी , मांसपेशियों में पीड़ा से आराम के लिए शिवलिंग पर गिलोय जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करना चाहिए। बुध ग्रह की खराबी से चर्म रोग, स्मरण शक्ति कमजोर और बुद्धि विकार होते है। इससे आराम के लिए शिवलिंग पर विधारा जड़ी-बूटी के रस से शिवलिंग पर अभिषेक करें। गुरू ग्रह की खराबी से चर्बीं, आंते , लीवर की खराबी होती है। इसके लिए केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें । शुक्र ग्रह की खराबी से वीर्य कमजोर , मधुमेह, यौन रोग, नपुंसकता आदि से आराम के लिए पंचामृत ( दूध दही घी शहद शकर) से अभिषेक करें। शनि ग्रह की खराबी से जोड़ों का दर्द, वायु विकार हडडियों के दर्द  आदि से आराम के लिए गन्ने का रस/ छाछ से अभिषेक करें। राहु- केतु की पीड़ा से सिर चकराना, मानसिक परेशानी , पिंडलियों व कमर में दर्द, बवासीर , फोड़े फुंसी , उदर पीड़ा, निम्न रक्त चाप से आराम के लिए भांग धतूरे से शिवलिंग पर अभिषेक करें

 -   ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल  स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ।

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