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Thursday, June 23, 2022

फुटपाथ पर डेरा जमाए लोगों को नगर पंचायत ने हटाने का दिया फरमान

महाराणा प्रताप के वंशज कहे जाने वालों को जीवन यापन करने की हो रही चिंता

बिना जगह दिए नगर पंचायत जबरन कर रहा कार्रवाई

खागा/फतेहपुर, शमशाद खान । नगर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत फुटपाथ पर कब्जा किए हुुए लोगों को हटाने का काम जोरों से चल रहा है। अतिक्रमण अभियान के तहत फुटपाथ पर चाट, फल, जूस, जैसी आदि खाद्य सामग्री बेचने वालां का अक्सर जमावड़ा रहता था। जिसको हटाने का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में फुटपाथ पर तीस वर्षों से ज्यादा समय से महाराण प्रताप के वंशज कहे जाने वाले लोहगड़वा भी अपना जीवन यापन कर रहे हैं। अगर इस अभियान में इन्हे हटाया गया तो ये कहां जाकर अपना जीवन यापन करेंगे। नगर पंचायत को चाहिए कि पहले इनके रहने का सही प्रबंध करें। 

फुटपाथ पर डेरा जमाए लोहगड़वा समाज के लोग।

महाराणा प्रताप के वंशज कहे जाने वालों को नगर पंचायत पुल के नीचे जगह दे रहा है। जहां पर सब्जी के व्यापारी अपनी सब्जियों की दुकान सजाते हैं ऐसे में कहा जाए कि नगर पंचायत जगह के नाम पर लालीपॉप देकर हटाना चाहता है। खेती के काम आने वाली देसी चीजों जैसे खुरपी, खुरपा, हंसिया फावड़ा बनाने वाले लोहार जाति के ज्यादातर लोग घुमंतू जीवन जीते हैं। खुले मैदान में रहना और रोजी-रोटी के लिए इधर-उधर घूमना इनके जीवन का हिस्सा माना जाता है। इनमें अपने पुरखों का दिया हाथों का हुनर तो है लेकिन इनमें से अधिकांश को पढ़ना-लिखना नही आता। अक्सर देखा जाता है कि फुटपाथ के किनारे रंग-बिरंगे तिरपालों के दर्जनों झोपड़े बने हुए हैं। यहां रहने वाली ज्यादातर महिलाओं और लड़कियां रंग बिरंगे कपड़े पहनती हैं। इनके तंबू से गर्म लोहे पर चलाए जा रहे हथौड़े की आवाजें अक्सर सुनाई देती हैं। जिससे वो लोग अपना जीवन-यापन करते हैं। लोहगड़वा समुदाय की यह एक अस्थाई बस्ती है। ये लोग इतने हुनरमंद होते हैं कि कैसे भी लोहे को कोयले की आंच में तपाकर किसी भी तरह के और कैसे भी लोहे को आकार दे देते हैं।

लोहार पिट्टा जाति का इतिहास

खागा/फतेहपुर। लोहार पिट्टा जाति के लोगों का इतिहास पुराना है। इनकी जड़े राजस्थान के मेवाड़ से जुड़ी हैं। इन समाज के लोगों का पुराना काम तलवार, कटारी, ढाल आदि बनाना था। राजवंश काल में मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप की प्रजा में इन्हें यही काम मिला था। अकबर से हल्दी घाटी युद्ध के दौरान इन्होने बैल गाडियों में अपना परिवार व गृहस्थी लेकर चले गए थे। महाराणा प्रताप को वीरगति मिलने के बाद ये लोग उत्तर भारत की ओर चले तब से उन्होने खेती किसानी के उपयोग में आने वाली वस्तुएं बनानी शुरू कर दीं। जो आज भी ये लोग कर रहे हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

खागा/फतेहपुर। इस मामले में एसडीएम अजय नारायण सिंह का कहना था कि फुटपाथ के किनारे रह रहे लोगों को पुल के नीचे जगह दी जा रही है। वहीं पर रहकर यह लोग अपना जीवन यापन करेंगे।


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