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Wednesday, June 22, 2022

निस्तारण की भावना ना के बराबर............................

देवेश प्रताप सिंह राठौर (वरिष्ठ पत्रकार)...........


हम बात करते हैं उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन की और पुलिस प्रशासन आज भी बहुत ही कम मैसेज जिला प्रशासन के अधिकारी हैं जो किसी कार्य को निस्तारण पर ध्यान देते हैं,अधिकतर लोग सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों को एक दूसरे पर डालने का कार्य कर रहे हैं, थाने में जाओ चौकी में जाओ कोतवाली में जाओ यहां पर सिर्फ कोई भी परेशानी की सुनवाई या प्रार्थना पत्र दिया गया सिर्फ खानापूरी होती है,पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक शिकायत जाती है वहां पर थोड़ी बहुत व्यक्ति को सांत्वना और न्याय की बात समझ में आती है, परंतु जब वहां से लेटर लिख जाता है उसके बावजूद भी पेंडिंग पड़ा रहता है, या चक्कर काटते रहो इतने चक्कर कट आएंगे खुद ही चुपचाप बैठ जाओगे, उस पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता है, हम एक दो दशक पूर्व की बात बता रहे हैं


बहुत से लोगों ने प्रार्थना पत्र थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कर दिए अपनी जान माल की रक्षा की गुहार की सुरक्षा की मांग की लेकिन उनके प्रार्थना पत्र को रद्दी की टोकरी में डालते रहे और जब घटना दुर्घटना हो जाती है उसके बाद पुलिस प्रशासन उसके घर में पहुंच जाता है अगर यही पहले से सचेत हो जाए तो मुझे लगता है बहुत सारी जाने और दुर्घटनाएं होने से बचाई जा सकती हैं,जब घटनाएं दुर्घटनाएं हो जाती हैं जानकारी प्रदान होने के बावजूद जब पुलिस प्रशासन एवं  जिला प्रशासन उस पर एक्शन नहीं लेता है, बाद में कोई घटना दुर्घटना हो जाती है उसमें प्रश्न उठते बहुत  सारे उठते आए हैं आज से नहीं वर्षों से लेकिन क्या होता है कुछ नहीं जो व्यक्ति जीवित रहते अपनी प्रार्थना पत्र देता है, वह जब नहीं रहता है उसकी बातों पर उसके प्रार्थना पत्रों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होती है, उसके बाद जब वह घटना दुर्घटना ग्रस्त हो जाता है तब पूरा जिला प्रशासन उसके घर पर ऐसे पहुंचता है जैसे बहुत बड़ा व्यक्ति हो बहुत पहुंच वाला व्यक्ति इतना पुलिस प्रशासन वहां पर दिखाई देता है अगर यह पहले से सचेत हो जाए तो मुझे लगता है बहुत सी स्थितियों में सुधार हो सकता है,अगर यही कार्य पहले कर लिया जाए तो उस व्यक्ति की जिंदगी बच सकती थी ऐसे बहुत सारे प्रश्न उठते हैं आज भी बहुत सी चोरियां अन्य बहुत सी चीजें हो रही हैं सरकार अच्छा कार्य कर रही है ईमानदारी से कार्य कर रही है प्रदेश का विकास हो रहा है परंतु अकेला चना क्या भाड फोड सकता है, सभी की भागीदारी और सभी का सहयोग की जरूरत है कि प्रदेश से भ्रष्टाचारियों देश से भ्रष्टाचार जब दूर ही सकेगी जब बिना पहुंच वाला व्यक्ति, गरीब, एवम् आम जन मानस  सब को न्याय मिल सके बिना कोई शोर से पारस बिना चेहरे देखे सबके साथ एक भाव से न्याय की प्रक्रिया लागू हो तब तक हम भ्रष्टाचारी दूर नहीं कर सकते, जब तक यह जन-जन में भावना नहीं जाएगी तब तक मुझे लगता है हम अभी विकास में अधूरे हैं,लेकिन सरकार हर जिले में जिला अधिकारी को जिला प्रशासन को पुलिस प्रशासन को उनकी कार्यशैली पर प्रतिदिन क्या कर रहे हैं हस्तक्षेप नहीं बना सकती क्योंकि कोई भी कार्यवाही सरकार के द्वारा उस जिले में पहुंचती  है,जिला प्रशासन के पास बहुत से बहाने होते हैं और सबसे बड़ा प्रश्न और उत्तर होता है रस्टिकेशन चल रहा है, आपका कार्य प्रासेज में है, आपके प्रार्थना पत्र पर काम चल रहा है ऐसे बहुत से बहाने होते हैं जो 2 शब्दों में ही पूरे सिस्टम को खराब कर देते हैं हकीकत में वह सिर्फ झूठ बोलते हैं।

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