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Friday, June 24, 2022

महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट.........

देवेश प्रताप सिंह राठौर...............

महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महा विकास आघाड़ी  सरकार में जारी राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने आज एक बडा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुझे शिवसेना के 42 विधायकों का समर्थन मिलेगा। परंतु ताजा स्थिति हो गई है कि 50 के लगभग एकनाथ शिंदे के समर्थन में शिव सेना के विधायक आ गए हैं, दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ने डिप्टी स्पीकर को पत्र लिखा है कि वह शिवसेना के विधायक दल के असली नेता है। 


वहीं इससे पहले महाराष्ट्र में गहराये राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना के तीन और विधायक गुरुवार को गुवाहाटी के रैडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गये। शिंदे खेमे का दावा है कि अभी उन्हें 41 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। एकनाथ शिंदे के समर्थन के विधायकों की संख्या बढ़ती जा रही है उतार-चढ़ाव के बीच स्थित महाराष्ट्र की सरकार उधव ठाकरे की गिरने की बन रही है, एकनाथ शिंदे के खेमे की ओर से 3 दिन पहले 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया है कि बागी नेता एकनाथ शिंदे नेता बने रहेंगे और इसे प्रदेश के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेजा गया है।एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अयोध्या जाने से हमें रोका और  आदित्य ठाकरे को अयोध्या जाने दिया हमें अयोध्या जाने के लिए क्यों रोका बहुत सारे प्रश्न एकनाथ शिंदे ने किए है, कहां है हिंदुत्व की राह से भटक गए हैं उधव ठाकरे तथा हमारा ढाई वर्षों से निरंतर अपमान होता रहा है हमारे विधायकों का अपमान होता रहा है हमें वर्षा में जाने से रोका जाता था एनसीपी और कांग्रेस के विधायक और उनके लोग उनसे मिलने के लिए पहुंच जाते थे,हमें अपने क्षेत्र के विकास के लिए फंड नहीं प्राप्त होता था बहुत से आरोप एकनाथ शिंदे ने लगाए हैं इन सभी आरोपों के बीच एक बात स्पष्ट है बाला साहब ठाकरे के जो सिद्धांत थे जिस तरह से उन्होंने शिवसेना का निर्माण किया था उनकी एक अलग हिंदुस्तान से लेकर विश्व के पटल पर एक अलग पहचान थी वह पहचान उधव ठाकरे ने मुझे लगता है,बहुत कम कर दी, हिंदुत्व की बात आती है तो बाला साहब ठाकरे  हिंदुत्व शान थे, पर हिंदुत्व पूरा गर्व करता था आज भी करता है,उद्धव ठाकरे ने जिस तरह से महाराष्ट्र में पालघाट की घटना हो अन्य  घटनाएं ऐसी है जो हुई उधव ठाकरे के कार्यकाल में उसमें उनकी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया इन सब चीजों को आकलन करने की जरूरत थी,  उधव ठाकरे की सरकार आज संकट में है 56 विधायक हैं शिवसेना के 50 विधायक लगभग एकनाथ शिंदे के समर्थन में गुवाहाटी में मौजूद है, जब 2020 में फिल्मी अदाकारा कंगना रनौत का घर गिराया गया था उस समय बहुत सी बातें होती थी जो समय दिया गया था उस समय का पालन नहीं किया या उसके पहले ही कंगना रनौत का घर गिरा दिया गया कंगना रनौत ने अपने वक्तव्य में कहा था आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा समय का पहिया है जो समय पर बदलता है और वह समय आज आ गया है राजनीतिक संकट के रूप में शिवसेना आज सामना कर रही है, उधर ठाकरे की सरकार जाना लगभग तय हो चुका है,

राजनीतिक संकट के बाद, शिवसेना ने एकनाथ शिंदे को पार्टी विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया था। हालांकि, विद्रोहियों ने संकल्प के साथ पलटवार किया है। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार रात अपना आधिकारिक आवास‘वर्षा'खाली कर दिया और कहा कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन बागी विधायकों को आना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि उन्हें उन पर भरोसा नहीं है। महाराष्ट्र में उपजे राजनीतिक संकट के केंद्र में रहने वाले शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कभी पार्टी कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी और वह अपने संगठनात्मक कौशल तथा जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए। कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में ऑटो चालक के रूप में काम करने वाले 58 वर्षीय शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में ठाणे-पालघर क्षेत्र में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है। 

चार बार के विधायक रहे शिवसेना नेता शिंदे वर्तमान में महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभाग के मंत्री का प्रभार संभाल रहे हैं। वह राज्य की राजनीति में अपनी सफलता के पीछे पार्टी संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का आभार कई बार जताते रहे हैं। नौ फरवरी 1964 को जन्मे शिंदे ने स्नातक की शिक्षा पूरी होने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी और राज्य में उभर रही शिवसेना में शामिल हो गए। मूलरूप से पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा जिले से ताल्लुक रखने वाले शिंदे ने ठाणे जिले को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। पार्टी की हिंदुत्ववादी विचारधारा और बाल ठाकरे के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर शिंदे ने शिवसेना का दामन थाम लिया। 

ठाणे शहर की कोपरी-पचपखाड़ी सीट से विधायक शिंदे सड़कों पर उतरकर राजनीति करने के लिए पहचाने जाते हैं और उन पर हथियारों के साथ जानबूझकर चोट पहुंचाने और दंगा करने समेत विभिन्न आरोपों में दर्जनों मामले दर्ज हैं। शिंदे 1997 में ठाणे नगर निगम में पार्षद चुने गए थे और इसके बाद वह 2004 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने थे। शिंदे के कद का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि उन्हें पार्टी में दूसरे सबसे प्रमुख नेता के रूप में देखा जाता है। शिंदे के बेटे डॉ श्रीकांत शिंदे कल्याण सीट से लोकसभा सदस्य हैं। शिंदे को 2014 में संक्षिप्त अवधि के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी नियुक्त किया गया था। एकनाथ शिंदे शिवसेना के बहुत ही भ्रष्ट नेता है बाला साहब ठाकरे के जमाने के विश्वसनीय लोगों में है शिवसेना में इनकी अच्छी पहचान मानी जाती है परंतु एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है जब तक उधव ठाकरे त्यागपत्र नहीं देंगे एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन वापस नहीं लेंगे तब तक कोई भी वार्ता का रास्ता तय नहीं हो सकेगा।

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