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Friday, June 17, 2022

श्रीमद् भागवत कथा का श्रोताओ ने किया रसपान

ओरन/बांदा, के एस दुबे । नगर के प्रसिद्ध तिलहर माता मन्दिर परिसर मे चल रही श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन श्रोताओं ने सुंदर भागवत कथा का रसपान किया। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस  कथा व्यास आचार्य श्री शशिकांत त्रिपाठी जी के सुंदर मुखारविंद से भक्तों ने श्रीमद् भागवत कथामृत का रसपान किया।

कथा वाचक श्रीमद्भागवत महापुराण में शौनकादि द्वारा पूछे गए इस प्रश्न ‘के के विशुद्धयन्ति’ के उत्तर में धुंधकारी जैसे पापात्मा दुराचारी को भी भागवत कथा सत्संग से भगवान की परम गति प्राप्त हुई, इस कथा का विधिवत वर्णन किया। इसके अलावा राजा परीक्षित के श्राप की कथा, नारद जी के पूर्व जन्म की कथा का वृतांत सुनाया बताया कि, किस प्रकार नारद जी दासी पुत्र होकर के भी भगवान की कृपा से देवर्षि बने तथा ब्रह्माजी के मानस पुत्र के रूप में


प्रकट होकर के संसार में कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। परम पूज्य त्रिपाठी जी ने बताया कि अनुराग और विराग दोनों एक साथ नहीं हो सकते, संसार के साथ अनुराग और संसार के साथ विराग संभव नहीं, तथा भगवान से अनुराग और संसार से विराग संभव है। अतः गृहस्थ को चाहिए कि संसार से विराग कर भगवान में अनुराग करें। गृहस्थ जीवन को छोड़कर भगवान के चरणारविन्दों पर मन लगाने हेतु कथा व्यास ने भक्तों को आहूत किया। कथा यजमान दरबारी कुशवाहा,श्रोतागण पंडित राम नरेश, रमाकांत त्रिपाठी, साकेत बिहारी,आशू शिवहरे, राम औतारकुशवाहा,शिवकुमार कुशवाहा, चुन्नू कुशवाहा, रामहित  सहित सैकडो की संख्या में नगर वासी भक्तगण मौजूद रहे।


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