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Monday, June 27, 2022

कभी खत्म नहीं होती संस्कारों की श्रृंखला और नींव : वाजपेयी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। आयुष ग्राम ट्रस्ट के संस्थापक व पूर्व उपाध्यक्ष भारतीय चिकित्सा परिषद आचार्य डा. मदन गोपाल वाजपेयी के प्रेरणा मार्गदर्शन में आयुष ग्राम उच्चतर माध्यमिक संस्कृत विज्ञान गुरुकुलम में एक मास से चल रही संस्कारशाला का समापन समारोह सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ वेदाचार्य सचिन भानु गर्ग ने वैदिक मंगलाचरण से किया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि सीएमओ डा. भूपेश द्विवेदी मौजूद रहे। प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र बहुगुणा ने संस्कारशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुये कहा कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रमों के साथ प्राचीन वैदिक संस्कृति, संध्योपासन, नित्यकर्म, आयुर्वेद आदि के संस्कारों का बीजारोपण करना था। मुख्य अतिथि ने कहा कि आचार्य डा. वाजपेयी का सद्प्रयास वास्तव में प्रेरणादायक और अनुकरणीय है। बच्चे न केवल अपने देश की प्राचीन संस्कृति से जुड़ेंगें बल्कि आगामी शिक्षा के लिए तैयार होंगें। मुख्य वक्ता डा. सर्वज्ञ भूषण ने संस्कारशालाओं की उपयोगिता पर विचार रखते हुए कहा कि इस व्यस्त जीवन में बच्चों को जो संस्कार, वैदिक परम्पराओं का ज्ञान परिवार से मिलना चाहिए वह

संबोधित करते सीएमओ।

अज्ञानता या व्यस्तता के कारण नहीं मिल पाता है। वे बच्चे विद्यालयों में जाकर केवल परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी विषय ही पढ़ पाते हैं। धीरे धीरे अपनी परम्पराओं से दूर हो जाते हैं। ऐसे में इस प्रकार के आयोजनों की आवश्यकता है। सारस्वत अतिथि चंद्रदत्त त्रिपाठी पूर्व प्रधानाचार्य पालेश्वर नाथ इंटर कॉलेज पहाड़ी ने कहा कि कोई भी शिक्षा तब तक फलीभूत नहीं होती जब तक वह उत्तम संस्कारों से युक्त न हो। विशिष्ट अतिथि आचार्य माताप्रसाद शुक्ल ने बताया कि गुरुकुलों में प्राचीन काल में संस्कारशाला के आयोजन की एक समृद्ध परंपरा रही है। गुरु का उद्देश्य शिष्य को केवल शिक्षा देना मात्र नहीं बल्कि उसे ऐसे संस्कार देना है जो उसे समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य डा. वाजपेयी ने कहा कि संस्कारों की श्रृंखला और नींव कभी समाप्त नहीं होती। इसलिए व्यक्ति को संस्कार जहां से मिलें उसे ग्रहण करने के लिए अपनी दृष्टि सदैव खुली रखनी चाहिए। इस अवसर पर डा. वेदप्रताप वाजपेयी, आलोक कुमार, सीमा सहित गुरुकुलम के समस्त आचार्यों, विद्यार्थी, आयुष ग्राम के लोग मौजूद रहे।


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