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Saturday, June 11, 2022

भविष्य में सभी को रूलाएगी पानी की बर्बादी

जल संरक्षण के अभियान होते फेल, प्रतिदिन लाखों लीटर पानी होता बर्बा

फतेहपुर, शमशाद खान । जल संरक्षण के तमाम दावों के बाद भी शहर से लेकर गांव तक आज भी जल की बर्बादी जारी है। तेजी से गिरते जा रहे भूगर्भ जल स्तर को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा चौकाने वाले आंकड़े जारी किए जाने के बावजूद जल संरक्षण करने व पानी की बर्बादी रोकने में शासन व प्रशासन के तामाम दावे खोखले व स्वयंसेवी संगठनों के प्रयास भी बेमायने साबित हो रहे है। कुओं, जल, पोखरों को बचाए जाने की मुहिम के साथ ही तालाब, जलाशयों में पानी को एकत्र किए जाने की मुहिम भी चलाकर जहाँ जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। जल संरक्षण के लिए स्वयंसेवी संगठनों द्वारा प्रयास किए जा रहे है लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों द्वारा रूचि न लेने के कारण वह निष्प्रभावी से होकर रह गए हैं। प्रयासों के बाद भी पानी की बर्बादी में भी बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। 

बिना टोंटी के नल से बहता पानी।

पानी की किल्लत के नाम पर करवाए गए सबमर्सिबल के बोर पानी बर्बाद करने का एक बड़े कारणों में से एक है। जिस कार्य में एक बाल्टी पानी मात्र लगता है सबमर्सिबल के तेज प्रेशर के कारण उस कार्य में सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। पानी की आसानी से उपलब्धता के कारण लोगों द्वारा पानी की फिजूल बर्बादी की जा रही है। नहाने धोने के जैसे मुख्य दिनचर्या के कार्यों को यदि छोड़ दिया जाए तो बर्तनों को धोने, घरों के फर्श या बेकार के छिड़काव में लोगों द्वारा प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है। इन दिनों शहर सहित ग्रामीणांचलों में गाड़ियों के धुलाई सेंटरों को बाढ़ सी आ गई है। सरकार द्वारा कोई तय मानक न होने से जगह जगह बने गाड़ी धुलाई सेंटर एक-एक गाड़ी धुलने में ही सैकड़ो लीटर पानी खपा देते हैं। पानी बर्बादी के लिए नगर पालिका भी जिम्मेदार है। कई कई दिनों तक लीकेज लाइन रिपेयर न किए जाने से रोजाना हजारों लीटर पानी नालियों में बह जाता है। लोगों तक साफ पानी पहुंचाने का दावा करने वाले आरओ प्लांट द्वारा पानी को शुद्ध करने के नाम पर भी जमकर पानी की बर्बादी की जा रही है। लगभग 100 लीटर पानी से मात्र 40 लीटर पानी ही शुद्ध किया जाता है। जिससे लगभग 60 लीटर पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। अधिकतर आरओ प्लांट संचालको द्वारा इस बर्बाद होने वाले पानी को संरक्षित करने के बजाए नालियों से बहा दिया जाता है। खपत के हिसाब से एक प्लांट द्वारा ही हजारो लीटर पानी रोजाना बर्बाद किया जा रहा है। जबकि जनपद में सैकड़ों आरओ प्लांट कार्य कर रहे है। सरकारी मशीनरी की लापरवाही के कारण दिनो-दिन खुल रहे गाड़ियों के सर्विस सेंटरों की भरमार हो रही है तो वहीं नित नए आरओ प्लांट की भी स्थापना की जा रही है। जबकि पानी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए स्थापित किए जा रहे निजी सबमर्सिबल जल की बर्बादी का एक बड़ा कारण बन रहे हैं।


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