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Saturday, June 18, 2022

श्रीकृष्ण जन्मदिवस की कथा का हुआ सुन्दर वर्णन

तिलहर मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा का चौथा दिन

ओरन(बांदा), के एस दुबे । नगर पंचायत ओरन के प्रसिद्ध श्री तिलहर माता मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन कथावक्ता आचार्य शशिकांत त्रिपाठी ने भक्तों को श्रीकृष्ण जन्म के सुंदर प्रसंग का वर्णन किया। भागवत कथा के मुख्य यजमान दरबारीलाल कुशवाहा ने भावबिभोर होकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया।

कथा प्रसंग में कथा व्यास आचार्य पंडित शशिकांत त्रिपाठी जी ने कृष्ण जन्म का वर्णन करते हुए बताया कि अपने चाचा देवक की बेटी के विवाहोपरान्त कंस ने अपने ही रथ पर वासुदेव और देवकी को छोडने जा रहे थे। तभी आकाश से गर्जना होती है कि कंस, देवकी के गर्भ से जन्मीं आठवीं संतान तेरा काल बनकर तेरा नाश करेगी। कंस ने भय के वशीभूत होकर अपनी बहन देवकी एवं वासुदेव को कारागार में डाल दिया और एक एक कर छह संतानों का जन्म लेने के साथ ही वध कर दिया। सातवें गर्भ का संकर्षण हो गया। उधर देवकी ने आठवां गर्भ धारण किया तभी कंस ने सैनिकों को सावधान कर दिया कि मेरा काल आ रहा है।जब प्रभु के प्राकट्य का शुभ अवसर आया तब


ष्कालरू परमशोभनाष्- मौसम सुहावना हो गया, रात्रि मे पंकज विकसित हो गये।भादो महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार का दिन,रोहणी नक्षत्र,हर्षण योग,बव करण, मध्यरात्रि में भगवान नारायण चतुर्भुजी रूप में प्रकट हुए और कहा कि मुझे गोकुल नंदबाबा के यहां छोड़ आओ। वहां से योगमाया को साथ ले आना। ऐसा कहकर पुनः नवजात बालक बन गये।

कथावाचक श्री त्रिपाठी ने बताया कि उधर गोकुल में कृष्ण के जन्म पर बधाइयों का दौर शुरू हो जाता है जिसमें चौरासी कोस ब्रज को आमंत्रित किया जाता है। कथा स्थल पर इस मौके पर ब्रज में हो रही जय जयकार नंद घर लाला आयो है भजन पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। उन्होंने कहा कि हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसकी संतान संस्कारवान हो। वह राम जैसा आज्ञाकारी हो उनके जैसी मर्यादा का पालन करने वाला हो लेकिन इसके लिए यह भी जरूरी है कि जननी मां को भी कौशल्या जैसा बनना पड़ेगा। पंडित राम नरेश आचार्य,गायक ओंकार सिंह ने सोहर गाकर भगवान का स्वागत किया। कथा यजमान दरबारी कुशवाहा,श्रोतागण पंडित राम नरेश, रमाकांत त्रिपाठी, साकेत बिहारी,आशू शिवहरे, राम औतारकुशवाहा,शिवकुमार कुशवाहा, चुन्नू कुशवाहा, रामहित  सहित सैकडो की संख्या में नगर वासी भक्तगण मौजूद रहे।


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