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Wednesday, June 29, 2022

नई सरकार की ओर महाराष्ट्र...................

देवेश प्रताप सिंह राठौर.................... 

     शिवसेना के 39 विधायकों के एकनाथ शिंदे गुट के साथ होने के बाद माना जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार अल्पमत में हैं। बुधवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे सरकार को फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने को कहा।    राज ठाकरे करेंगे बीजेपी का समर्थनबहुमत परीक्षण में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने बीजेपी को समर्थन देने का फैसला किया है। एमएनएस का विधानसभा में एक विधायक है। इसके कयास पहले से ही लगाए जा रहे थे कि राज ठाकरे बीजेपी के साथ जा सकते हैं। सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि राज ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच फोन पर बात हुई है। वहीं ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि शिंदे का गुट राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में विलय कर सकता है। महाराष्ट्र में बहुमत परीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एम सुनवाई चल रही है। महाराष्ट्र के राज्यपाल के द्वारा  30 जून गुरुवार का दिन तय किया और उद्धव सरकार को विधानसभा बुलाया।    महाराष्ट्र में बहुत जल्दी नई सरकार बनेगी महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर के विधायकों के निलंबन के आदेश को 11 तारीख तक रोक लगा दी है उसके बाद सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा मुझे लगता है इसी बीच नई सरकार बन


सकती है, मुझे लगता है उसके पहले सरकार महाराष्ट्र में नई बन जाएगी,महाराष्ट्र में शिवसेना का एक बड़ा जनाधार रहा है और जिसके पास उसका चुनाव निशान रहेगा, पार्टी पर जिसका कब्जा रहेगा, भविष्य में उसी के लिए वहां की राजनीति में जगह बनाने की संभावना भी रहेगी। इसलिए बागी विधायक जानते हैं कि अगर उन्होंने अलग पार्टी बनाई, तो उन्हें उस तरह समर्थन हासिल नहीं हो सकेगा, जैसा शिवसेना में रहते मिला करता था। इसका उदाहरण उनके सामने है कि शिवसेना से अलग होकर राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई, पर वैसा समर्थन नहीं मिल सका, जैसा शिवसेना को प्राप्त है। इसलिए वे उसे हथियाने का प्रयास कर रहे हैं। मगर उद्धव ठाकरे अपने पिता की बनाई पार्टी को इस तरह किसी को हड़पने नहीं दे सकते। उसे बचाने के लिए वे अपनी राजनीतिक गोटियां ठीक कर रहे हैं।बागी विधायकों ने पार्टी पर अधिकार पाने के लिए निर्वाचन आयोग में अर्जी भी दे दी है। कानूनी नुक्ते से निर्वाचन आयोग पार्टी पर उन्हें कब्जा दिला सकता है। नियम के मुताबिक जिस पक्ष के पास दो तिहाई से अधिक सदस्य हैं, उसे पार्टी का असली हकदार मान लिया जाता है। बागी विधायकों का दावा है कि उनके पास फिलहाल अड़तीस विधायक हैं। हालांकि उद्धव ठाकरे का दावा है कि सारे जिलों के प्रमुख और कार्यकर्ता उनके साथ हैं। मगर कानून पार्टी की स्थिति का निर्णय कार्यकर्ताओं के आधार पर नहीं, प्रतिनिधियों के आधार पर करता है।अभी बागी विधायक गुवाहाटी में बैठे हैं और दोनों गुटों के बीच रस्साकशी फोन और चिट्ठी के जरिए चल रही है। अभी तक किसी ने अविश्वास प्रस्ताव की मांग नहीं की है। बागी विधायकों की कोशिश है कि पहले पार्टी पर कब्जा हो जाए, तो सरकार बनाना और स्वीकार्यता हासिल करना आसान हो जाएगा। मगर उन्हें निर्वाचन आयोग मान्यता दे भी दे तो शायद महाराष्ट्र में जनाधार संभालना आसान नहीं होगा। बागी विधायकों के पक्ष में बड़े-बड़े बैनर लग गए थे, मगर शिवसेना समर्थक अब सक्रिय हो उठे हैं और उन्होंने उन पोस्टरों पर स्याही फेंकना शुरू कर दिया है। उद्धव ठाकरे ने भी धमकाया है कि बिना उनकी तस्वीर के बागी विधायक महाराष्ट्र में निकल कर दिखा दें जबकिशिंदे गुट ने महाविकास आघाडी सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी है, मगर गठबंधन के अन्य घटक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस फिलहाल उद्धव ठाकरे सरकार को बचाने की कोशिश में हैं। अब शिंदे का गुट अपनी सदस्यता बचाने के साथ किसी तरह भाजपा का समर्थन हासिल कर लेता है तो उद्धव ठाकरे की मुश्किल बढ़ सकती है। लगभग अब निश्चित हो चुका है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार महाराष्ट्र में पुनः आ रही है, सिंधी एकनाथ शिंदे ने जो हिंदुत्व की बात पर कोई समझौता न करने की बात कही है इससे स्पष्ट होता है शिवसेना हिंदुत्व के नाम से एक बहुत बड़ी पहचान थी, पार्टी की धीरे-धीरे उधव ठाकरे ने इस पहचान को सत्ता पाने के लिए सिद्धांतों को भूल कर ऐसे लोगों से गठबंधन किया जिसे बाला साहब ठाकरे कतई पसंद नहीं करते थे।

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