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Saturday, May 21, 2022

मुगलों ने हिंदुओं की आस्था, विश्वास के मंदिरों को तोड़े है..........

 देवेश प्रताप सिंह 

हम जब इतिहास के पन्नों को खंगालेगे तुम मुगल शासकों की अन्याय की सीमा पराकाष्ठा हद पार कर दी फिर भी हिंदू उनके आतंक और क्रूरता को सहते रहे और अपनी आस्था और विश्वास का मंदिर यह लोग तोड़ते  रहे और मस्जिदे बनाते रहे मकबरे बनाते रहे यह हालात रहे इस देश के मुगल शासक काल में हमारी आस्था को चोट पहुंचाने का काम मुगल शासक और मोगली लोग करते रहेआपको बताएंगे कि क्या सच में भारत में 60 हजार से ज्यादा हिंदू, जैन और बौद्ध मंदिरों को तोड़ दिया गया था,साथ ही उन 10 मंदिरों की कहानी बताएंगे जिसके बारे में पूरी दुनिया को मालूम है। काशी, मथुरा, दिल्ली, आगरा से लेकर मध्य प्रदेश के धार तक मंदिर-मस्जिद का विवाद जारी है। इन विवादों में हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने हिंदुओं की आस्था पर चोट पहुंचाई थी। 60 हजार से ज्यादा मंदिरों को तोड़ डाला गया था। कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण कराया गया था। ऐसे में


आज हम आपको बताएंगे कि क्या सच में भारत में 60 हजार से ज्यादा हिंदू, जैन और बौद्ध मंदिरों को तोड़ दिया गया था? साथ ही उन 10 मंदिरों की कहानी बताएंगे जिसके बारे में पूरी दुनिया को मालूम है। तोड़े गए ये जानने के लिए हमने इतिहासकार अशोक गौतम से बात की। उन्होंने कहा, 'मुगलकाल में आक्रांताओं ने काफी तरह से भारत की संस्कृति, हिंदू धर्म की आस्था को खंडित करने की कोशिश की। मंदिरों को तोड़ने का काम इसी में से एक है। मुगल काल में तोड़े गए मंदिरों की एकदम सही संख्या बता पाना मुश्किल है, क्योंकि उस दौरान का इतिहास भी मुगल शासकों ने अपने अनुसार लिखवाया था। हां, ये जरूर कहा जा सकता है कि कई हजार मंदिरों को मुगलों ने तोड़ दिया। कई के सबूत आज भी मौजूद हैं।'काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। कोर्ट आदेश पर 17 मई से पहले इस परिसर का सर्वे होना है। हालांकि, इससे पहले मुस्लिम पक्ष इस सर्वे पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।  मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर विवाद है। 12 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई। 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में पूरी जमीन लेने और श्री कृष्ण जन्मभूमि के बराबर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की भी मांग की गई है। इस मामले में मथुरा की सेशन कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने इस मामले में 19 मई तक फैसला सुरक्षित रखा है।   राजधानी दिल्ली स्थित कुतुब मीनार को लेकर भी विवाद जारी है। मीनार की दीवारों पर सदियों पुराने मंदिरों के अवशेष साफ दिखाई पड़ते हैं। इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर की वास्तुकला मौजूद है। इसे मीनार के आंगन में साफ देखा जा सकता है। मीनार के अंदर भगवान गणेश और विष्णु की कई मूर्तियां हैं। कुतुब मीनार के प्रवेश द्वार पर एक शिलालेख है जिस पर लिखा है कि इसमें प्रयुक्त खम्भे और अन्य सामाग्री 27 हिन्दू और जैन मंदिरों को ध्वस्त करके प्राप्त की गई थी। ताजमहल को लेकर भी विवाद जारी है। इसे लेकर भी हाईकोर्ट में एक याचिका लगी थी। जिसे गुरुवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका लगाने वालों का दावा है कि ताजमहल तेजो महालय नाम का शिव मंदिर है।  मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला को लेकर विवाद है। इंदौर हाईकोर्ट में दो मई को याचिका दायर की गई है। इसमें भोजशाला को पूर्णत: हिंदुओं के अधिकार में देने की मांग की गई है। कश्मीर घाटी के अनंतनाग में कर्कोटा समुदाय के राजा ललितादित्य मुक्तिपाडा ने लगभग 725-61 ईस्वी में इस ऐतिहासिक और विशालकाय मार्तण्य सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। ये कश्मीर के सबसे पुराने मंदिरों में शुमार है। अनंतनाग से पहलगाम के बीच एक जगह है, जिसे मटन कहा जाता है। कहा जाता है कि इसे मुस्लिम शासक सिकंदर बुतशिकन ने तुड़वाया दिया था।   मुस्लिम इतिहासकार हसन अपनी किताब 'हिस्ट्री ऑफ कश्मीर' में लिखते हैं कि 1393 के आसपास सबसे ज्यादा कश्मीरी पंडितों पर सुल्तान बुतशिकन ने कहर बरपाया था। इतिहासकार नरेंद्र सहगल ने भी इसका जिक्र अपनी किताब व्यथित जम्मू कश्मीर में किया है। इसमें उन्होंने लिखा है, 'पंडितों पर जब अत्याचार हो रहा था तब हजरत अमीर कबीर (तत्कालीन धार्मिक नेता) ने ये सब अपनी आंखों से देखा। उसने मंदिर नष्ट किया और बेरहमी से कत्लेआम किया।'गुजरात के काठियावाड़ में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर है। ये समुद्र के किनारे स्थित है। इसका जिक्र महाभारत, श्रीमद्भागवत और स्कंद पुराण में भी विस्तार से है। कहा जाता है कि चंद्रदेव ने भगवान शिव को अपना नाथ मानकर यहां उनकी तपस्या की थी। चंद्रदेव को सोम नाम से भी जाना जाता है। इसलिए इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा। आक्रांताओं ने इसे 17 बार लूटा और क्षतिग्रस्त किया, लेकिन हर बार ये उतनी ही मजबूती के साथ फिर खड़ा हुआ। यह मंदिर ईसा पूर्व से पहले ही अस्तित्व में आ गया था। इसका पुनिर्निर्माण 649 ईस्वी में वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं ने किया। पहली बार इस मंदिर को 725 ईस्वी में सिंध के मुस्लिम सूबेदार अल जुनैद ने तुड़वाया। इसके बाद राजा नागभट्ट ने इसका पुनिर्निर्माण 815 ईस्वी में करवाया। 1024 में फिर से महमूद गजनवी ने इसपरहमला  बोला और मंदिर की पूरी संपत्ति लूटने के बाद इसे नष्ट कर दिया। महमूद गजनवरी के आक्रमण के बाद 1093 ईस्वी में गुजरात के राजा भीमदेव, मालवा के राजा भोज ने इसका पुनिर्निर्माण कराया। 1297 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति नुसरत खां, 1395 में मुजफ्फरशाह, 1412 में उसके बेटे अहमद शाह, 1665 ईस्वी और 1706 में औरंगजेब ने इस पर हमला किया। मंदिर को क्षतिग्रस्त किया और लूटपाटइतिहासकारों के मुताबिक, 1528 में बाबर के सेनापति मीर बकी ने अयोध्या के राम मंदिर को तुड़वाकर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। 1949 में कुछ लोगों ने गुंबद के नीचे राम मूर्ति की स्थापना कर दी थी। 1992 में कारसेवक ने विवादित ढांचे को तोड़ दिया। कोर्ट की लंबी लड़ाई के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया। ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी जगह 1660 ईस्वी में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था। 1770 में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। इसमें मराठा जीते। जीत के बाद मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया।

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