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Monday, May 9, 2022

मां ही मंदिर मां ही पूजा........

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

............................................................मातृ दिवस  के अवसर पर मैं उन सभी माताओं को चरणों पर सर रखकर प्रणाम करता हूं साथ में अपनी मां को भी जिसने मुझे जन्म दिया और मेरे हर दुख को हर तकलीफ को अपने आंचल में लेकर मेरे कष्टों को सहा यह सिर्फ एक मां ही कर सकती है, मेरी मां को खत्म हुए लगभग 16 वर्ष हो गए हैं 8 अक्टूबर 2006 को मृत्यु हुई थी पिताजी की मृत्यु 8 अगस्त 1993 को हुई थी मुझे यह दोनों दिन आज तक याद है मेरी जिंदगी यह सबसे खराब दिनथोड़ा बहुत अवसर मां को दे पाया लेकिन उस अवसर से मुझे संतोष प्राप्त नहीं हुआ मैं सोचता था कि मैं अपने मां बाप हूं वह सारी सुविधाएं के साथ बुढ़ापे में मैं उनकी से ताकत बन सकूं, ढाल बन सकूं परंतु ऐसा नहीं हुआ आज मैं अपनी इस लेखनी के माध्यम से उन लोगों को याद दिलाता हूं जो पत्नी या


परिवार के कारण मां-बाप का तिरस्कार करते हैं, जवानी में तो उनको जवानी के रंग में याद नहीं आएगा लेकिन जैसे ही जैसे हो परिस्थितियां बदलती है उस समय उस व्यक्ति को अपनी करनी का अफसोस होता है और जब अफसोस करना चाहिए उस समय अय्याशी करता है, अपनी जवानी और अपने रंग में अपने अधिकार क्षेत्र को भूल जाता है,उस समय वह व्यक्ति जानता है कि मैं गलत कर रहा हूं लेकिन परिवार पत्नी के कहने से वह अपने मां-बाप को जिस तरह से पीड़ा देती है ,आज के संस्कार विहीन परिवार जो सिर्फ सिर्फ लड़की दमाद तक ही सीमित रह गयाहै । इस भजन को बहुत से गीत कारों ने संगीतकारों ने अपनी अपनी दोनों में अलग अलग तरीके से संभार। और संजोया है जैसे कुछ गीतकार और संगीतकार के नाम आपके समझ में अंकित कर रहा हसरत जयपुरी, अनु मलिक ,मोहम्मद अजीज, हसरत जयपुरी  मां का भजन हो जान डाल दिए कठोर से कठोर हृदय वाला भी एक बार सुनेगा कलेजा कांप जाएगा, कठोर से कठोर हृदय को भी रुलाने को मजबूर कर दिया आज इस गाने को मातृ दिवस पर अवसर पर उन सभी माताओं के चरणों को प्रणाम करके समर्पित कर रहा हूं.........


...........................रमता जोगी बहता पानी,

माँ की कहे कहानी,

माँ का नाम सदा रहता है,

बाकी सब कुछ फ़ानी।


माँ ही मंदिर माँ ही पूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर।।


माँ के पुण्य से जगत बना है,

ईश्वर को भी माँ ने जना है,

माँ ममता का एक कलश है,

जीवन ज्योत है अमृत रस है,

क्या अम्बर और क्या ये धरती,

माँ की तुलना हो नहीं सकती,

युग आते है युग जाते है,

माँ की गाथा दोहराते है,

माँ की गाथा दोहराते है,

बड़े बड़े ग्यानी कहते है,

माँ का रुतबा सबसे ऊँचा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर।।


मिट्टी हो गयी माँ की काया,

भटक रहा है फिर भी साया,

कड़ी धुप में सोच रही है,

लाल पे अपने कर दू छाया,

शूल बनी है माँ की विवशता,

व्याकुल है सूझे ना रस्ता,

व्याकुल है सूझे ना रस्ता,

सरल बहुत है कहना सुनना,

कठिन बड़ा ही हैं माँ बनना,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर।।


जनम जनम की माँ दुखियारी,

करके हर कोशिश ये हारी,

भई बावरी उलझ गयी है,

बच्चे का सुख ढूंढ रही है,

भूख से मुन्ना तड़प रहा है,

मन का धीरज टूट गया है,

आँचल में है दूध की नदिया,

और आँखों मे नीर भरा है,

और आँखों मे नीर भरा है,

सब को सहारा देने वाली,

कौन बने अब तेरा सहारा,

कौन बने अब तेरा सहारा,

कौन बने अब तेरा सहारा।


माँ ही मंदिर माँ ही पूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पूजा मां ही मंदिर।   मातृ   दिवस के अवसर पर आप सभी लोगों की सबकी मां को सादर प्रणाम चरण स्पर्श करता हूं

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