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Sunday, May 29, 2022

आत्मविश्वास का होना अति आवश्यक.......................

देवेश प्रताप सिंह राठौर

  आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच एक बहुत ही पतली रेखा है, जब आप सोचते हैं कि आप एक नौकरी कर सकते हैं, इसे आत्मविश्वास कहा जाता है, लेकिन जब आपको लगता है कि केवल आप ही नौकरी कर सकते हैं या केवल आप ही इसे बेहतरीन तरीके से कर सकते हैं, तो यह आत्मविश्वास से अधिक है।वर्तमान समय में अगर हमें कुछ पाना है, किसी भी क्षेत्र में कुछ करके दिखाना है, जीवन को खुशी से जीना है, तो इन सबके लिए आत्मविश्वास का होना परम आवश्यक है। आत्मविश्वास में वह शक्ति है जिसके माध्यम से हम कुछ भी कर सकते है। आत्मविश्वास से हमारी संकल्प शक्ति बढ़ती है और संकल्प शक्ति से बढ़ती है हमारी आत्मिक शक्ति।  दुनिया में ईश्वर ने सभी को अनंत शक्तियां प्रदान की हैं। हर किसी में कोई न कोई खास बात होती है। बस, जरूरत है अपने अंदर की उस खास शक्ति को पहचानने की, उसे निखारने की। जो काम दूसरे लोग कर सकते हैं, वो काम आप क्यों नहीं कर सकते? अपने आप पर भरोसा कीजिए फिर दुनिया भी आप पर भरोसा करेगी।   संघर्ष जीवन का वह मूलमंत्र है जिसका अनुभव हर कोई व्यक्ति करता  है और संसार में बहुत ही कम व्यक्ति होंगे जो इसका  अनुभव पाने से वंचित रहे  हो , समाज में हर कोई नाम, शोहरत, पैसा , इज्जत कमाना या फिर पढ़ाई में अव्वल होना  चाहे जो भी लक्ष्य हो वह बिना संघर्ष  के अधूरा है!संघर्ष जीवन में उतार  चढ़ाव का अनुभव करता है , अच्छे -बुरे का ज्ञान करवाता है, सक्रिय रहना सिखाता है समय की कीमत सिखाता है, जिससे प्रेरित होकर हम सशक्तिकरण के साथ फिर लक्ष्य के प्रति समर्पित होते है और जीवन जीना  सीखते है ,दुनिया में हर व्यक्ति सफलता को  पाना चाहता  और सफलता की उम्मीद करता  है और सफलता पाने के लिए वह व्यक्ति अथक प्रयास करता रहता है और कुछ


व्यक्ति सफलता को आसानी से प्राप्त कर लेते है और कुछ सफलता  के पीछे  भागते रह  जाते है लेकिन उन्हें समय पर सफलता नहीं प्राप्त होती है,  जो  व्यक्ति सफलता को आसानी से  प्राप्त  कर लेते है संघर्ष वो भी करते है पर उन्हें थोड़े संघर्ष में ही सफलता मिल जाती है क्योकि वह व्यक्ति उस सफलता की तलाश में था जो उसे आसानी से मिल  जाये या फिर उसकी किस्मत उससे संघर्ष करवाना ही न चाहती हो, परन्तु कुछ व्यक्ति ऐसी सफलता की राह में निकल जाते है जिसकी डगर बहुत कठिन होती है और वे पूरा संघर्ष करने के बाद भी असफल हो जाते है या फिर सफलता के पास पहुंचने से पहले हार मान जाते है , जो हार मान कर पीछे हट जाते है उनके लिए वह संघर्ष बेकार रहता है क्योकि वह उस संघर्ष से कुछ नहीं सीखते और खुद में इतना टूट जाते है की गलत कदम उठा लेते है , और जो सफलता तक पहुंचने तक हार नहीं मानते जीवन का असली मूलमंत्र सीख जाते है, क्योकि जो संघर्ष वह सफलता पाने के लिए कर रहे है वह उन्हें बहुत कुछ सीखा जाता , सबसे अहम तो वह ठोकर खाकर सम्भलना और गिरकर उठना सीखा देता है , सबसे बड़ी खाशियत यही तो है संघर्ष की, कि  इंसान को जीवन जीने  का तरीका सीखा देती  है !दुनिया में सबसे कीमती चीज होता है किसी का भरोसा, विश्वास बनना, क्योकि आजकल के जमाने में लोग एक दुसरे पर भरोसा या विश्वास नहीं करते,भरोसे या विश्वास को बनाने में कई साल लग जाते है उसे टूटने में समय नहीं लगता, इन्ही सब विश्वास और भरोसे पर बने कुछ चुनिन्दा कोट्स को पढ़े हमें इस आर्टिकल में,

विश्वास से व्यक्ति का जीवन खुशहाली से भरा रहता है, और जब प्रेम पुरे विश्वास से किया जाता है तो वो लम्बे समय तक बना रहता है, प्रेम या किसी भी कार्य की विश्वास नीव होती है जो एक दुसरे पर भरोसा करने में मादा करता,व्यावहारिकता की अधिकतमता यह है कि परिकल्पनाओं का पता लगाया जाना चाहिए कि उनके व्यावहारिक परिणाम क्या होंगे। इस सुझाव में और अधिक विशिष्ट अवधारणाओं और विचारों में सुधार हुए हैं, उदाहरण के लिए, 'सत्य' की परिभाषा में, अनुसंधान के शुरुआती बिंदु को कैसे परिसीमित किया जाए, और हमारे अनुभवों की समझ और महत्में,व्यवहारिकतालेकिन आवश्यक उपकरण उत्पन्न करते हैं ताकि हम अपने आस-पास के उपयोग का उपयोग कर सकें और जो उचित समझे उसी के अनुसार उसे अनुकूलित कर सकें.दूसरे शब्दों में, सोच केवल तभी मान्य है जब यह जीवन के कुछ तरीकों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी है।आत्मविश्वास आता कहां से है यानी आत्मविश्वास कैसे बढ़ाया जा सकता हैहमारे अंदर आत्मविश्वास तब आता है जब हमारे पास सही ज्ञान होता है,अति आत्मविश्वास आश्वासन का अत्यधिक स्तर हैकि एक व्यक्ति में उसकी प्रतिभा और गुण होते हैं। आत्मविश्वास के विपरीत, जिसे एक सकारात्मक विशेषता के रूप में देखा जा सकता है, अति आत्मविश्वास नहीं है। यह एक व्यक्ति की नकारात्मक विशेषता है। आत्मविश्वास एक व्यक्ति को अवसरों और चुनौतियों के लिए खुला रहकर अपनी उच्चतम क्षमता तक पहुंचने की अनुमति देता है। लेकिन अति आत्मविश्वास व्यक्ति की सफलता में बाधक का काम करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब कोई व्यक्ति अति आत्मविश्वासी होता है, तो उसे अपनी गलतियाँ और खामियाँ दिखाई नहीं देती हैं। यह व्यक्ति के आदर्श और श्रेष्ठ के रूप में एक अग्रभाग बनाता है। दुर्भाग्य से, यह व्यक्ति के खिलाफ काम करता है, उसे वास्तविकता को देखने से रोकता है। जब ऐसा होता है, तो व्यक्ति मानता है कि उसे किसी अभ्यास की आवश्यकता नहीं है और वह बिना किसी प्रशिक्षण या प्रयास के निष्पादित कर सकता है। है।आत्म-विश्वास सकारात्मक है क्योंकि यह अवसरों और चुनौतियों के लिए खुला रहकर व्यक्ति को बढ़ने देता है। (साथियों मैं देवेश प्रताप सिंह राठौर  आपसे निवेदन करता हूं अगर आपको या आर्टिकल मेरा पसंद हो तो आगे शेयर अवश्य करिएगा )लेकिन, अति आत्मविश्वास नकारात्मक है क्योंकि यह व्यक्तिगत विकास के खिलाफ एक बाधा के रूप में काम करता है।आत्मविश्वासी व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करता है, लेकिन अति आत्मविश्वासी व्यक्ति अपनी गलतियों और खामियों को नहीं देखता है।

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