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Wednesday, May 4, 2022

कोरोना महामारी को लेकर सुस्त नजर आ रहा स्वास्थ्य विभाग

पहली, दूसरी और तीसरी में दिखी सतर्कता, अब बैठे चुपचाप 

कोरोना टीकाकरण कराने की गति भी हो गई मंद 

बांदा, के एस दुबे । कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर में तो स्वास्थ्य विभाग ने खूब बहादुरी दिखाई है, लेकिन अब चौथी लहर का शोर सुनाई पड़ने लगा है, इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फिलहाल सुस्त बैठे नजर आ रहे हैं। कोरोना की रोकथाम के लिए न तो मास्क का इस्तेमाल किया जा रहा है और न ही कोरोना वैक्सीनेशन को ही गति पकड़ाई जा रही है, सब कुछ सुस्त पड़ा हुआ है। कोरोना का टीका लगवाने के लिए अब लोगों में जागरूक करने के लिए कोई अभियान भी नहीं चलाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में कोरोना के वार्डों को लेकर भी कोई खास तवज्जो फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीगण अब कोरोना संक्रमण को हल्के में ले रहे हैं। 

जिला अस्पताल में बिना मास्क के बैठे मरीज

कोरोना की चौथी लहर का असर महानगरों में अब दिखने लगा है, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चौथी लहर को लेकर चुपचाप बैठे हुए हैं। उन्हें परवाह ही नहीं है। जबकि चौथी लहर का असर कहीं-कहीं दिखने लगा है। कुछ मरीज भी पाजिटिव आने लगे हैं। लेकिन यहां पर न तो जांचों में तेजी दिखाई जा रही है और न ही वैक्सीनेशन में। यहां के वैक्सीनेशन सेंटर सूने पड़े हुए हैं। जिला अस्पताल स्थित वैक्सीनेशन सेंटर में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि बमुश्किल 70 से 80 लोगों को प्रतिदिन वैक्सीन लगाई जाती है। इनमें से कुछ लोग बूस्टर डोज वाले भी शामिल रहते हैं। स्कूली बच्चे तो बिल्कुल नहीं आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग चौथी लहर से कैसे निपट पाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों की मानें तो वहां के सेंटरों के हाल और भी बदतर हैं। वहां तो केवल कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। वैक्सीनेशन सेंटर में 12 से 14 वर्ष के बच्चे टीका लगवाने ही नहीं आते हैं। शुरुआती दौर में तो कुछ बच्चे आए, इसके बाद बच्चों का आना ही बंद हो गया। चौथी लहर को लेकर सरकार स्वास्थ्य विभाग को गाइड लाइन जारी कर चुकी है। लेकिन यहां चौथी लहर में बेपरवाही नजर आ रही है। वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी है। वैक्सीनेशन सेंटर सूने पड़े हुए हैं। यहां पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि दिनभर में 70 से 80 लोग वैक्सीनेशन कराने के लिए आते हैं। स्कूली बच्चे तो बिल्कुल ही नहीं आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इस ओर से मौन साधे हुए है। प्रचार-प्रसार के अभाव में वैक्सनेशन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा। सूत्रों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से चौकन्ना रहा। वैक्सीनेशन के लिए प्रसार प्रसार तेजी से किया गया। लोगों को वैक्सीनेशन के लिए गांव-घर घूमकर प्रेरित किया जाता रहा। अब चौथी लहर में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से बेफिक्र नजर आ रहा है और हाथ पर हाथ धरे बैठा है। चिकित्सक भी कोरोना की चौथी लहर को लेकर बेपरवाह बने हुए हैं। उनके चेहरे के मास्क उतर गया है। सीएमओ डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना की चौथी लहर को लेकर पूरी तैयारी है। व्यवस्थाओं को पहले से ही दुरुस्त कर लिया गया है, जो खामियां होंगी, उनको भी दूर कर लिया जाएगा। कोरोना को लेकर सभी सतर्कता बरत रहे हैं। 


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