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Friday, May 20, 2022

रोजगार की तलाश में महानगरों में पलायन कर गये सुखारी पुरवा के लोग

ग्रामीणों ने समाजसेवी राजाभइया से साझा किया अपना दर्द

बांदा, के एस दुबे । सुखारी पुरवा में दुखों का डेरा है द्यगाँव की जवानी रोजी रोटी की जुगाड़ में पलायन कर गयी है द्य गाँव में सन्नाटा सा पसरा है। सरकारी योजनायें सिसिकिंयाँ  भर भर दम तोड़ रही हैंद्य जिन मजदूरों ने मनरेगा में काम किया था एक वर्ष बाद भी उन्हें अपनी मजदूरी का भुगतान नही मिला है द्य सरकारी योजनाओं  के नाम पर गाँव में लगे हैंडपंप भी अपने भाग्य पर आंशू बहा रहे हैं।


जानकारी के अनुसार सुखारी पुरवा महुवा ब्लाक के गुमाई ग्राम पंचायत का मजरा है गाँव में 135 परिवार हैं जो सभी कर्जदार हैंद्य 85 परिवार के पास जॉब कार्ड है जो घरो में धूल फाक रहे हैं। पिछले एक वर्ष से किसी को एक धेले का काम नही मिलाद्य फरवरी 2021 में मनरेगा के तहत नाली निर्माण कार्य में गाँव की रामसखी ,लवलेश, जानकी, संतोष, सुनील, पप्पू,रमेश सहित दो दर्जन से ज्यादा मजदूरों ने काम किया था जिन्हें मजदूरी के नाम का एक धेला नही मिला द्य मजदूर रामसखी बताती हैं कि मजदूरी के लिए कई बार प्रधान व पंचायत मित्र से मांग कर चुकी हैं किन्तु वे  यह कर टाल देते हैं कि मजदूरी ऊपर से ही नही आई हैं द्य गाँव में रोजगार न मिलने के कारण गाँव के विजयकरण, लवलेश, सुनील सहित कई परिवार स्थायी रूप से गाँव से पलायन कर गये हैं द्य गाँव की राजाबेटी ने बताया की यहाँ कोई रोजगार नहीं हैं इस लिए  रोजी रोटी की जुगाढ़ में गांव के लोग बड़े शहरो में भटक रहे हैं गाँव के जालंधर, नथुवा,रमेश पप्पू ,राजू ,लुसनु लवलेश,सुनील अंगद सहित आधा गाँव खली हो गया हैं द्य घरों में ताले लटक रहे हैं द्ययह सभी लोग गांव से  ईटा भट्टो में काम करने के लिए हरियाणा पंजाब दिल्ली चले गये हैं। यहाँ दिब्यंग जानो को पेंसन भी नसीब नही हुयी। दिब्यांग रज्जू बताते है की गांव में 4 दिब्यांगो को पेंसन नही मिल रही है कई बार आवेदन किया किन्तु कोई सुनवाई नही है द्य गांव में 4 हैण्ड पम्प है जिसमे दो खराब पड़े हैं द्य पिछले दिनों गांव के लोग चंदा करके छेदीलाल के दरबाजे का हैण्ड पम्प बनवाया था तब लोगों को पानी नसीब हुआ था द्यगांव का हर परिवार कर्जदार हो चुका है। गांव की स्थितियों का जायजा लेने गांव पहुंचे विद्याधाम समिति के मंत्री राजा भैया बताते है की महगाई की मार से गांव गांव में ऐसे ही हालात उत्पन्न हो रहे है। प्रसाशन को चाहिए की ऐसे पिछड़े गांवों को चिन्हित कर सामुदायिक सहभागिता के साथ रोजगार के मजबूत  प्लान तैयार कराएँ तथा गांव के समग्र विकास के लिए ईमानदारी से योजनाओं का क्रियान्वयन हो तभी गांव को इस बदहाली से बचाया जा सकता है।


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