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Friday, May 27, 2022

शनि जयन्ती 30 मई

 ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयन्ती के रूप में मनाया जाता है।  इस बार शनि जयन्ती 30 मई   को है। इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था इस  वर्ष शनि जयंती विशेष  है क्यूंकि 30 वर्ष बाद शनि जयंती पर शनि अपनी राशि कुंभ में है और इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। इस साल यह सोमवार को पड़ रही है, इसलिए यह सोमवती अमावस्‍या होगी। इसी कारण करके इस दिन शनि देव और भगवान शिव के पूजन का विशेष महत्व रहेगाइस दिन व्रत रखकर सायंकाल में शनि पूजन और शनि की वस्तुओं के दान और शनि के मंत्र के जाप से शनि प्रसन्न होते है।  शनि सौर मण्डल में पृथ्वी से सबसे दूर और धीमी गति का ग्रह है। शनि पश्चिम दिशा का स्वामी


और इसे ज्योतिष में न्यायधीश और सूर्य पुत्र कहा गया है। शनि प्रत्येक प्राणी को उसके कर्माे के अनुसार दण्ड देते है। वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती मकर, कुंभ व्  मीन  राशि  पर चल  रही है  कर्क  और वृश्चिक  पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है या जिन व्यक्तियों की कुडंली में शनि अशुभ स्थिति में हो या पीड़ित हो, तो उन्हें  शनि को प्रसन्न करने के लिये पीपल के वृक्ष की पूजा,पीपल के नीचे सरसो के तेल का दिया जलाना चाहिए दीन-दुःखियों, गरीबों और मजदूरों की सेवा और सहायता, काली गाय, काला कुत्ता , कौवे की सेवा करने से, सरसों का तेल , कच्चा कोयला, लोहे के बर्तन, काला वस्त्र, काला छाता, काले तिल, काली उड़द आदि के दान करने से शनि शुभफल देते है। भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना से भी शनि कष्ट नहीं देते है  पीपल और शमी वृक्ष की पूजा, सात  मुखी रुद्राक्ष पहनने से शनि दोष कम होता है

 -ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र , अलीगंज , लखनऊ

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