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Wednesday, April 27, 2022

भ्रष्टाचारी नाम एक, काम अनेक ........................

देवेश प्रताप सिंह राठौर

.......................   भारत जैसे भ्रष्टाचार के कई रंग-रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजारी, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि। भ्रष्टाचार के कई कारण है। भ्रष्टाचार में मुख्य घूस यानी रिश्वत, चुनाव में धांधली, ब्लैकमेल करना, टैक्स चोरी, झूठी गवाही, झूठा मुकदमा, परीक्षा में नकल, परीक्षार्थी का गलत मूल्यांकन, हफ्ता वसूली, जबरन चंदा लेना, न्यायाधीशों द्वारा पक्षपातपूर्ण निर्णय, पैसे लेकर वोट देना, वोट के लिए पैसा और शराब आदि बांटना, पैसे लेकर रिपोर्ट छापना, अपने कार्यों को करवाने के लिए नकद राशि देना यह सब भ्रष्टाचार ही है। भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह है। आज भारत देश में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी जड़े तेजी से फैल रही है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगा। भ्रष्टाचार का प्रभाव अत्यंत व्यापक है।जीवन का कोई भी क्षेत्र इसके प्रभाव से मुक्त नहीं है। यदि हम इस वर्ष की ही बात करें तो ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जो कि भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। जैसे आईपील में खिलाड़ियों की स्पॉट फिक्सिंग, नौकरियों में अच्छी पोस्ट पाने की लालसा में कई लोग रिश्वत देने से भी नहीं चूकते हैं। आज भारत का हर तबका इस बीमारी से ग्रस्त है। यह एक संक्रामक रोग की तरह है। समाज में विभिन्न स्तरों पर फैले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कठोर दंड-व्यवस्था की जानी चाहिए। आज भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि व्यक्ति रिश्वत के मामले में पकड़ा जाता है और रिश्वत देकर ही छूट जाता है।

 


जब तक इस अपराध के लिए को कड़ा दंड नही दिया जाएगा तब तक यह बीमारी दीमक की तरह पूरे देश को खा जाएगी। लोगों को स्वयं में ईमानदारी विकसित करना होगी। आने वाली पीढ़ी तक सुआचरण के फायदे पहुंचाने होंगे।  भ्रष्टाचार हमारे नैतिक जीवन मूल्यों पर सबसे बड़ा प्रहार है। भ्रष्टाचार से जुड़े लोग अपने स्वार्थ में अंधे होकर राष्ट्र का नाम बदनाम कर रहे हैं।  दुनियाभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए ही 9 दिसंबर को 'अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस' मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर 2003 को एक प्रस्ताव पारित कर 'अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस' मनाए जाने की घोषणा की। भ्रष्टाचार के खिलाफ संपूर्ण राष्ट्र एवं दुनिया का इस जंग में शामिल होना एक शुभ घटना कही जा सकती है, क्योंकि भ्रष्टाचार आज किसी एक देश की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की समस्या है। सोने की चिड़िया कहलाने वाले देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े फैला चुका है।बहुत खराब स्थित है वर्तमान सरकार केंद्र से लेकर उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार भ्रष्टाचारी से मुक्ति प्रदान करने का पूरा प्रयास कर रही है, परंतु जिला प्रशासन से लेकर हर विभाग में बैठे लोग आज भी कार्यों को करने में रुचि कम रखते हैं और तरीका बदल दिया है,और एक बात और बहुत महत्वपूर्ण लगती है कोई भी व्यक्ति विभाग में जा रहा है एक शब्द बहुत ही अच्छा है जब कोई किसी से मिलना ना चाहे और वह मन में विचार कर ले कि हमें  नहीं मिलना है तो सबसे बड़ा जो शब्द है जिसकी कोई काट नहीं वह भ्रष्टाचारी का सबसे बड़ा नाम है, मीटिंग साहब मीटिंग में है जबकि साहब कोई मीटिंग में नहीं है और यह सब पहले से सेट होता है अधिकारी को मालूम होता है कर्मचारी को पता होता है मैं किस हालातों में किस को भेजना है और किस को मीटिंग बताकर यहीं से भगा देना है ,यह सब भ्रष्टाचारी के रूप हैं यह आज भी पूर्ण रूप से व्याप्त है, सरकार के पास भ्रष्टाचारी की बहुत बड़ी चुनौती है और यह भ्रष्टाचार ई कैसे दूर होगी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि आज की स्थिति में किसी का वेतन प्रतिमाह 3 लाख महीने हो याऔर उसके बाद संपत्ति डेढ़ सौ दो सौ करोड़ की हो क्या यह संभव है इतनी तनखा में इतनी संपत्ति को बनाना,दूसरा विषय किसी की तनख्वा 50हजार है और उसके पास 40 एवं50 करोड़ या 10 करोड़ या 5 करोड़ की संपत्ति है, उसके पास बैकग्राउंड इतना मजबूत नहीं है कितनी संपत्ति पूर्व में उसके पास रही हो क्या इतनी तनख्वाह से क्या यह सब व्यवस्थाएं और 4या5 लग्जरी टॉप की गाड़ियां रखना क्या संभव है नहीं, यही भ्रष्टाचारी है,आज के समय में अगर कोई व्यक्ति ₹1लाख प्रति माह तनखा पा रहा है,वह बच्चों की पढ़ाई करने में घर चलाने में साधारण तौर से खर्च हो जाते हैं और उसके सामने एक सबसे सस्ती गाड़ी आज के परिवेश में अल्टो भी रखने में असमर्थ है, अगर वह ईमानदार है तो,तो इतनी तनख्वाह पाने वाला एक साधारण अधिकारी या कर्मचारी की भी जांच होनी चाहिए सरकार के द्वारा नौकरी से पूर्व उसकी हैसियत क्या थी और नौकरी के बाद उसकी हैसियत क्या है और उसका वेतन क्या है और उसकी आज प्रॉपर्टी क्या है इस सब का डाटा सरकार को प्रतिवर्ष उन लोगों का लेना चाहिए, अगर कोई भ्रष्टाचारी करता है तो प्रॉपर्टी बहुत सारे लोगों के नाम ले लेता है सब बताता है मेरे पास कुछ नहीं है मुझे लगता है कि इन हालातों में भ्रष्टाचारी समाप्त होना संभव नहीं है,  नियम बनाए जाते हैं नियमों का पालन करने के लिए लेकिन यहां नियम बनते हैं उस नियम को तोड़ने के लिए जिस के रास्ते बहुत निकाल लेते हैं वह लोग,  संपत्तियों का लेने का तरीका,यह नीचे से लेकर ऊपर तक बैठे सभी जानते हैं उसका रूप बदल देते हैं खुद ना लेकर परिवार नातेदार और उनके अपने मित्रों के नाम प्रॉपर्टीखरीद लेते हैं और बताते हैं मेरे पास कुछ नहीं है इस तरह से आज भ्रष्टाचारी में बहुत अधिक लोग हैं हमारे देश के प्रधानमंत्री हमारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री निस्वार्थ भाव से देश क्यों भ्रष्टाचारी से मुक्त करना चाहते हैं परंतु जिला स्तर से पूर्व सरकारों द्वारा फैलाई गई भ्रष्टाचारी कैसे दूर होगी एक कठिन समस्या है यह भ्रष्टाचारी पकड़ पाना संभव नहीं है,आज भारत में ऐसे कई व्यक्ति मौजूद हैं जो भ्रष्टाचारी है। आज पूरी दुनिया में भारत भ्रष्टाचार के मामले में 94वें स्थान पर है।

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