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Thursday, April 28, 2022

बाल श्रम रोकना, दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्ती से हो - अनिल राजभर

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

.....................श्रम मंत्री अनिल राजभर जी ने सर्किट हाउस में बैठक कर अधिकारियों को दिए दिशा निर्देश तथा श्रम बाल श्रम को हर स्थिति में रोकने का प्रयास करें और जानकारी मिलने पर वहां पर कार्यवाही करेंविभाग की योजनाओं के लाभ हेतु अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण करायें मंत्री जी ने दिए दिशा निर्देशपंजीकरण के साथ ही नवीनीकरण हेतु अधिकतम शिविरों का आयोजन सुनिश्चित करायेबाल मजदूरी कराने वालों को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित कराये जाने के निर्देश, रोजगार मेलों का आयोजन कर बेरोजगार युवक/युवतियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करायें

जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता बर्दास्त नही की जायेगी मंत्री श्रम एवं सेवायोजन विभाग उ०प्र० श्री अनिल राजभर जी द्वारा उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के हितार्थ संचालित योजनाओं, श्रमिक पंजीयन/नवीनीकरण, जमा उपकर की समीक्षा की गई। मंत्री जी ने श्रमिकों के पंजीकरण के साथ ही नवीनीकरण हेतु अधिकतम शिविरों का आयोजन सुनिश्चित कराये जाने के निर्देश दिये। समीक्षा बैठक में मंत्री जी द्वारा सकिर्ट  हाउस में निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण/नवीनीकरण कराये जाने हेतु कैम्पो एवं प्रचार-प्रसार द्वारा किये जाने के निर्देश दिये गये। बोर्ड द्वारा संचालित समस्त योजनाओं से अधिक से अधिक श्रमिकों को आच्छादित करने हेतु भी निर्देश दिये गये जनपदों में विभागों द्वारा जो निर्माण कार्य कराये जा रहे है, उनका पंजीकरण एवं सेस एकत्र करने के भी निर्देश दिये गये। साथ ही बाल श्रम को रोके जाने हेतु अभियान चलाकर प्रभावी कार्यवाही एवं जिन सेवायोजकों के विरुद्ध अभियोजन दायर किये गये हैं उन पर प्रभावी पैरवी करते हुये उन सेवायोजको को दण्डित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया।

 



मंत्री जी द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं एवं हितलाभ की समीक्षा के अन्तर्गत मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना, सन्त रविदास शिक्षा सहायता योजना, मेधावी छात्र पुरस्कार योजना, कौशल विकास तकनीकी, उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, कन्या विवाह सहायता योजना, आवास सहायता योजना, चिकित्सा सुविधा योजना, गम्भीर बीमारी हेतु सहायता, महात्मा गांधी सहायता योजना, निर्माण कामगार मृत्यु, विकलांग सहायता एवं असक्ष्मता पेंशन योजना, निर्माण कामगार अन्त्येष्टि सहायता योजना के अन्तर्गत लिये जा रहे लाभों की समीक्षा करते हुये प्रगति बढाये जाने के निर्देश दिये। जनपद झांसी में पंजीकृत मजदूरों के सापेक्ष मात्र 61 महिलाओं को मातृत्व हितलाभ दिये जाने पर इसमें और अधिक प्रगति लाये जाने पर इस योजना का लाभ अधिकतम श्रमिक महिलाओं को मिल सके। इसी प्रकार कार्य करते वक्त मृत्यु हो जाने पर 52 श्रमिकों के परिवारजनों को लाभान्वित किया गया है। इसका लाभ भी अधिकतम पात्र श्रमिकों को दिलाये जाने के निर्देश दिये।

मंत्री जी ने श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि बाल मजदूरी कराने वाले प्रतिष्ठानों को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करायें।  मंत्री जी ने सेवायोजन विभाग के अधिकारियों को रोजगार मेलों का आयोजन कर बेरोजगार युवक/युवतियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये। उन्होने श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार 100 दिन की कार्ययोजना के अनुसार कार्यो को धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये। बैठक में उप श्रम आयुक्त श्री नदीम अहमद, श्रम प्रवर्तन अधिकारी झाँसी/कोंच (जालौन) श्री आशीष कुमार अवस्थी, श्री एस०एन० नागेश श्रम प्रवर्तन अधिकारी, झाँसी श्री डी०पी० अग्रहरि, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, ललितपुर, श्री आर0के0 चतुर्वेदी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, उरई (जालौन) एवं सेवायोजन विभाग के अधिकारीगण एवं विभाग के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक के अन्त में उप श्रम आयुक्त द्वारा उपस्थित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया गयाl

मेरा मानना हैलेकिन क्या बाल श्रम रोकना संभव है आज भी बहुत से होटल ऐसे हैं बहुत से स्थान ऐसे हैं जहां बाल श्रम के रूप में कार्य कर रहे हैं, और जिला लेवल से श्रम ऑफिस  हैं उन्हें विधिवत जानकारी होती है, साल में एकाध  बाल श्रम अभियान चलता है जिसके तहत एक दो 4 दिन तक खानापूरी के बाद फिर व्यवस्थाएं साल भर के लिए वही तैयार हो जाती हैं सब अधिकारियों की जानकारी में इसलिए बाल श्रम रोकना संभव नहीं है क्योंकि बाल श्रम को बढ़ाता है जिला स्तर से श्रम विभाग इस चीज को वाली बात उच्च अधिकारी जानते हैं 

कहां-कहां किस होटल में  कहां-कहां बाल श्रम आज हैं और काम कर रहे हैंयह जानने का प्रयास श्रम विभाग करता है और जाने के बाद उस पर कोई कार्यवाही नहीं होती है ऐसे मेरे संज्ञान में बहुत से मामले आए हैं और मैंने श्रम जिला स्तर के जो कार्यालय वहां शिकायत दर्ज की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई सिर्फ यह कहा गया कि हम अपने हिसाब से साल में हमारे जो स्पेक्टर वगैरह होते हैं और जांच करते हैं उस आधार पर हम कार्रवाई करते हैं इसलिए हम यह कह सकते हैं बाल श्रम नहीं रोका जा सकता क्योंकि कथनी करनी में फर्क है मंत्री तो निर्देश देजाते हैं लेकिन नीचे बैठे जिला स्तर  के अधिकारी उसका पालन नहीं होने देते हैं, कभी कभी किसी की मजबूरी होती है बाल श्रम करने के लिए क्योंकि घर में परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होता जो कमाई का जरिया हो इसलिए उसके सामने एक परेशानी रहती है, वाल श्रम करना पड़ता है पढ़ाई की उम्र होती है नौनिहाल होते हैं लेकिन परिवार में कोई नहीं है तो छोटे-छोटे बच्चे कहीं ना कहीं जाकर अपनी  जीविका चलाते हैं और अपनी मां का ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए इन लोगों के लिए सरकार व्यवस्था करें और इनकी शिक्षा और और पढ़ाई  लिखाई के साथ रहेने  की  व्यवस्था होनी चाहिए उन्हें बाल श्रम शायद रुक सकता है, क्योंकि जिसका कोई नहीं है वह बालक कहां जाएगा कैसे उसका जीवन चलेगा बहुत सी चीजें यह सब जमीनी प हकीकत में दिखाई देती है उन स्थिति को देखते हुए  और पहलू को  समझते हुए बाल श्रम क्यों है किस लिए  यह इतनी छोटी उम्र में कार्य कर रहा है इस पहलू को भी समझने की जरूरत है1

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