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Thursday, April 14, 2022

महोत्सव के अंतिम दिन कलाकारों ने बिखेरा जलवा

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । 49वें राष्ट्रीय रामायण मेले के पांचवे समापन सांध्य दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। लखनऊ से पधारी दूरदर्शन के विशेष कलाकारें में प्रख्यात लोकगायिका मानसी रघुवंशी जिन्होने कई स्थानों पर अनेक सांस्कृतिक समारोह में अपनी प्रस्तुतियां दी है। गुरूवार को रामायण मेला में अपनी खनकती आवाज के जरिये कार्यक्रम का आरंभ मानसी रघुवंशी के गीतों में उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, रामहि राम रटन लागी जिभिया, सिया जी  बहिनिया हमार हो राम लगिहै पहनुवा, चित्रकूट के घाट घाट पर शबरी देखे बाट राम मेरे आ जाओ, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया, लोक गीतों को सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति भावना से परिपूर्ण इस प्रस्तुती के बाद मानसी के साथ आए भजन गायक दूसरे कलाकार ऋषिराज पाण्डेय वनितीश सिंह सूर्यवंशी ने भी भजन गायन प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इसके पूर्व डा. आरके चौरिहा ने सोहर गीत गाकर लोगों का भरपूर मनांरजंन किया। वृन्दावन रास लीला संस्थान के स्वामी देवकीनन्दन शर्मा जी की

मंचन करते कलाकार।

टीम ने पाचवें दिवस प्रातः राम हनुमान युद्ध लीला का बडे भाव से मंचन किया। इस लीला में राम से अधिक राम कर नामा का प्रभाव मंचन कर दर्शाया गया। माँ भगवती लोकगीत पार्टी के रामखेलावन विश्वकर्मा ने तुम बिन लाखों लाज हरि। अनुरंजना ने चित्रकूट पावन नगरिया घूमन चलो ओ मोरी गुइयां गीत प्रस्तुत किये। लखन लाल बुदेलखण्डीय लोक नृत्य समिति महोबा की ओर से करन सिहं परिहार ने मूरख बंदे क्या है जग तेरा, लखन लाल यादव ने विद्या दान के बिना, और स्वागत मात्र के बिना और मधुलता सोनी ने चंदन के पालना में झूले मोरी मइया गीत प्रस्तुत किया। रामाधीन आदि ने मोहे ले चल अपनी नगरिया। अवधबिहारी संवरिया गीत प्रस्तुत करने से दर्शकों ने तालियों की गडगडाहट से उनका स्वागत कर मनोबल बढाया। रघुबीर सिंह यादव द्वारा गाये गये भजन नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का रहो न जाये रमइया बिन आदि का दर्शकों ने झूम झूम कर आनंद लिया। उक्त कार्यक्रम का संचालन करते हुए मेले के महामंत्री डा. करूणा शंकर द्विवेदी ने मेले के संदर्भ में बताया कि चित्रकूट के पावन पुनीत परिवेश में रामायण मेले का 49वाँ महोत्सव पूर्ण सांदर्यं और सुंदर मंचीय प्रस्तुतियों के साथ गतिमान है। उन्होने बताया कि रामायण मेला के सिद्धान्तों, उसके स्वरूप और प्रकृति में कुछ तात्विक भिन्नता है। इससे भक्ति मंच के साथ-साथ विचार मंच की प्रमुखता है। इसमें भावना और विवेक का सुंदर सामंजस्य है। भक्ति से हृदय परिष्कृत होता है और मानवीय गुणों का आविष्कार होता है। श्री द्विवेदी ने बताया कि विचार का संबन्ध मस्तिष्क से है। इससे विवेक बृति जाग्रत हेती है। रामायण मेला के मौलिक सिद्धांतों में भक्ति तथा विवेक का समन्वय अंतरर्निहित है। प्रवचन व्याख्यान तथा सांगीतिक प्रस्तुतियों से जहां श्रोता गण भक्ति रस से ओता प्रोत होते है वहीं उनका विवेक भी जाग्रत हेता है और आनंद की अनुभूति होती है। इसी कारण से रामायण में सभी वर्ग, जाति, सम्प्रदाय के लोंगों की साझेदारी है और सभी लोग इससे अबाध रूप से आनंद और दृष्टिबोध करते है।

इस्कान संस्था ने वितरित किया भोजन महाप्रसाद

चित्रकूट। पंच दिवसीय 49वें राष्ट्रीय रामायण मेले के दौरान इस्कान शाखा चित्रकूट से संबंधित सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने मिलकर सैकडों लोंगों को भोजन महाप्रसाद निशुल्क वितरण किया। इस्कान चित्रकूट शाखा के अध्यक्ष अनंत बल्देव अर्विदं दास ने बताया कि श्रीकृष्ण नाम कृष्ण कथा का प्रसाद ग्रहण करने वालों की चेतना शुद्ध होती है। इसीलिए इस्कान द्वारा मंगलाआरती, प्रसाद वितरण, और नगर संकीर्तन को जन जन तक पहुचाने का प्रयास करते है। इससे मानव की बौद्धिक चेतना, में पवित्रता आती है। गौरतलब है कि इस्कान निशुल्क भोजन वितरण करने वाली विश्व की सबसे बडी संस्था हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, है। 


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