कृष्ण और रुक्मणी विवाह के मधुर बेला का भक्तों ने लिया आनन्द - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Saturday, April 16, 2022

कृष्ण और रुक्मणी विवाह के मधुर बेला का भक्तों ने लिया आनन्द

श्रीमद्भागवत गीता पाठ का आठवां दिन

बांदा, के एस दुबे । संकटमोचन मंदिर के सामने पटरी पार कटरा एक मैरिज हाल में चल रही श्रीमद् भागवत गीता पाठ का आठवें दिन श्री परमपूज्य आचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी महाराज ने श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनाया साथ ही कलाकारों द्वारा उनकी सुंदर सुंदर स्वरूप से भक्तो को प्रसंग का मंचन कर मंत्रमुग्द किया।


अपने प्रवचनों में उमाकांत त्रिवेदी महाराज ने बताया कि श्री कृष्ण के पास जब रुक्मणी ने संदेश भेजा था कि रुक्मणी के घरवाले इनका विवाह कहीं और करना चाहते हैं तब उन्होंने श्री कृष्ण से कहा वह श्री कृष्ण से ही विवाह करना चाहती हैं क्योंकि विश्व में उनके जैसा अन्य कोई पुरुष नहीं है,भगवान श्री कृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मणी ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी को भी पति के रूप में वरण नहीं करेंगी, उधर श्री कृष्ण भगवान को भी इस बात का पता लग चुका था कि रुकमणी परम रूपवती तो है ही इसके साथ साथ परम सुलक्षणा भी हैं,अपने वर्णन में उन्होंने बताया कि भीष्मक का बड़ा पुत्र रुकनी भगवान श्री कृष्ण से शत्रुता रखता था वह अपनी बहन रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था।

जब रुकमणी ने गिरजा की पूजा करते हुए उनसे प्रार्थना की हे मा तुम सारे जगत की मां हो इसलिए मेरी भी अभिलाषा पूर्ण करो मैं श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ विवाह नहीं कर सकती रुक्मणी जब मंदिर से बाहर निकली तो उन्हें एक ब्राह्मण दिखाई दिया देखकर वह बहुत प्रसन्न हुई उन्हें यह समझने में बिल्कुल भी संशय नहीं रहा कि श्री कृष्ण भगवान ने ही उसके समर्पण को स्वीकार कर लिया है और श्री कृष्ण जी ने विद्युत तरंग की भांति पहुंचकर उनका हाथ थाम लिया और अपने रथ पर बिठाकर द्वारका की ओर चल पड़े ,भगवान श्री कृष्ण रुकमणी को द्वारका ले जाकर उनके साथ विधिवत विवाह किया।उन्होंने बताया कि प्रद्युम्न उन्हीं के गर्भ से उत्पन्न हुए थे जो सृष्टि में कामदेव के अवतार थे।श्री कृष्ण की पटरानीयों में रुक्मणी का सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्थान था उनके प्रेम और उनकी भक्ति पर भगवान श्री कृष्ण मुग्ध थे ,उनके प्रेम और उनकी कई कथाएं और भी बहुत प्रेरक हैं,इस दोरान कथा में सम्मिलित लोगों ने भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह में उपहार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।भक्तजनों में मुरलीधर गुप्त, सुरेन्द्र तिवारी, श्रद्धा अग्रवाल, कपिल अग्रवाल, रामप्रताप, गोमती ,ओमवती राजकुमार राज डीके अग्रवाल ,योगेश कुमार , प्रमोद ,मुकेश शर्मा, संजीव श्रीवास्तव, वेद मनोहर लाल शर्मा, संजय सक्सेना, ज्योति गुप्ता, पूजा गुप्ता,  यश चित्रांशी, उदय पाल चौहान, दीपक ठाकुर ,चितरंजन सक्सेना, आदि तमाम लोग उपस्थित रहे।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages