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Sunday, April 10, 2022

श्री राम के बगैर जीवन निरर्थक : प्रपन्नाचार्य

49वें राष्ट्रीय रामायण मेले का हुआ भव्य शुभरंभ

स्थानीय महंतो-संतो ने निशानों के साथ निकाली शोभायात्रा

शोधकर्ता चन्द्रिका प्रसाद ‘ललित’ ने बारामासी ग्रंथ का किया वर्णन

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भगवान श्री राम की जयन्ती के अवसर पर चित्रकूट में 49वें राश्ट्रीय रामायण मेला महोत्सव का उद्घाटन स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य आचार्य ने करते हुए कहा कि भगवान श्री राम के आदर्श चरित्र को मानव को अपने जीवन में उतारने से रामायण मेले की परिकल्पना पूरी होती है और जीवन सार्थक होता है। उन्होने बताया कि श्रीराम जा जन्म आदर्ष चरित्र प्रस्तुत करने के लिए भी जन्म हुआ था। यदि उनके जीवन का अनुकरण मानव अपने जीवन में करें तो जीवन के सारे रिस्तों में व्यवहारिकता व संस्कृति में सुधार आ सकता है। श्रीराम के नाम के बगैर प्रकाश को निखारने वाली आलौकिक षक्तियाँ प्रकाषहीन होती है। श्री प्रपन्नाचार्य ने कहा कि राम के बगैर जीवन निरर्थक है। उन्होने चित्रकूट की महिमा को उजागर करते हुए चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर तुलसी दास चन्दन घिसे तिलक देत रघुवीर की छाप राश्ट्रीय मेला पर पडी है वह अमिट है। इसी क्रम में उद्घाटन सभा की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार षुक्ल ने सभी को चैत्र रामनवमी की बधाइयाँ देते हुए कहा कि 49वाँ राश्ट्रीय रामायण मेला बडे ही षुभ मुहुर्त में सम्पन्न होने जा रहा है। बताया कि जो कुछ भी है वह राम में है। श्रीराम के चरित्र को जानना, व उन्हे कैसे पाने के उपाय हों व श्रीराम के चरित्रों को जीवन में उतारने से सभी व्यवहारिक रिश्तों को मानव बडे कुशल ढ़ंग से निभाकर पूरा कर सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि गोबिंद से पहले गुरू आते है। व गुरू के पाने से ही गोबिन्द बडे सरल ढंग से मिल जाते है। उन्होने बताया कि, ”गुरू गोबिन्द दोउ खडे काके लांगु पाये, बलि हारि गुरू आपकी गोबिन्द दियो बताये”। तुलसी दास ने भगवान राम के विभिन्न रूपों की चर्चा की है, उस चर्चा से मानव जीवन को लाभान्वित किया जा सकता है। उन्होने कहा कि 50वाँ राष्ट्रीय रामायण मेला तो अद्भुत होगा ही लेकिन 49वाँ राश्ट्रीय रामायण मेला सबसे अच्छा होने की कामना की।

मेले का शुभारंभ करते बद्री प्रपन्नाचार्य

इसके पूर्व स्थानीय संतो महन्तों ने अपने अपने निशानों के साथ हाथी, घोडों बैण्ड बाजों की ध्वनी पर मंदाकिनी तट रामघाट से रामायण मेला तक शोभा यात्रा निकाली। मेला प्रागण में पहुच कर मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया ने माल्यार्पण कर चंदन लगा स्वागत किया। इसके पूर्व प्रातः से रामायण की अखण्ड अर्चना प्रारम्भ हूई। राष्ट्रीय रामायण मेले के उद्घाटन सत्र में गोस्वामी तुलसी दास द्वारा लिखा गया एक ऐसा दुर्लभ ग्रथं अभी तक हिंदी साहित्य में जानकारी नहीं थी उसकी जानकारी देते हुए हिंदी जगत के ख्याति लभ्द शोधकर्ता डॉ चन्दिका प्रसाद दीक्षित ललित ने ग्रंथ खोज निकाला है। जिसका नाम बारामासी है। बारामासा शैली में जायसी आदि महाकवियों ने प्रायः बिरह का वर्णन किया है और असाढ मास से ऋतु क्रम का चक्र निर्धारित किया है किन्तु गोस्वामी तुलसी दास ने इसे चैत्र मास से प्रारम्भ किया है। जिससे विक्रमी संवत प्रारम्भ होता है, प्रमाण के लिए चैत चिर जिवे न कोई, जीव जम को ग्रास है। मूढ अन्धी चेप्त निष्चय सपन सो जगवास है।। उन्होने बताया कि अन्तिम पंक्ति इस प्रकार है जिसमें कवि के नाम की छाप भी है, विष्वास करि कहै तुलसी, प्रेम हरि गुण गाव रे। इस काव्य की दूसरी विषेशता यह है कि इसमें विरह के स्थान पर भक्ति काव्य ज्ञान एवं समाजसेवा का संदेष दिया गया है। बताया कि कुल 12 छंद है जो काली ष्याही से हाथ के बने कागज पर लिखे गये है। उन्होने बताया कि यह प्रति बांदा के चन्दन दास साहित्य षोधसंस्थान में संरक्षित है। इस खोज के लिए डॉ0 ललित को राश्ट्रीय रामायण मेला में पधारे हुए सैकडों विद्वानों ने बधाइंया दी है। इसके पूर्व मेले के महामंत्री करूणा षंकर द्विवेदी ने मेले की भूमिका प्रारंभ से लेकर अब तक की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य व जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल व मेले के अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने दीप प्रज्वलन किया। पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र ने उद्घाटन सत्र में सभी लोंगों का स्वागत कर मेले को अगले वर्ष 50वाँ अदभुत राश्ट्रीय रामायण मेला होने की जानकारी दी। जिसकी तैयारियां जोर से होने जा रही है। भीषण गर्मी के कारण मेले के दोपहर के कार्यक्रम स्थगित करते हुए प्रातः और देर रात्रि तक उन कार्यक्रमों को किया जा रहा है। 

मौजूद डीएम, कार्यकारी अध्यक्ष।

रासलीला व दीवारी नृत्य ने मन मोहा

चित्रकूट। रात्रिकालीन अवसर पर वृन्दावन की ख्यातिलब्ध रासलीला का मंचन तथा दिवारी नृत्य का आयोजन किया गया। जिससे दर्शकों ने सराहा व तालियों कि गडगडाहट से उनका मनोबल बढाया।


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