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Wednesday, April 13, 2022

क्या ? अब चीन और ताइवान युद्ध.....

देवेश प्रताप सिंह राठौर

वरिष्ठ पत्रकार 

....................................... प्रश्न है क्या विश्व युद्ध होकर रहेगा हालातों को देखा जाए उनके इतिहास को देखा जाए तो विश्व युद्ध की संभावना पूरी बन रही है, वर्चस्व और विस्तार वादी नीति की सोच रखने वाला चीन विश्व के लिए बहुत बड़ा खतरा बन रहा है ,क्योंकि चीन की विस्तार वादी योजना हमेशा उसके दिमाग पर चलती रहती है,किस तरह किन हालातों में किस पर घात लगाकर हमला कर दे यह चीन की फितरत रही है,विश्वसनीयता के नाम पर चीन सिर्फ धोखा देता है इसलिए चीन के लगे हर पड़ोसी देशों को चीन से सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वह है कहता कुछ है करता कुछ है उस पर विश्वास किया जाना अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने के बराबर है, अब हम बात करते हैं चीन और ताइवान के बीच युद्ध होगा या नहीं इन सवालों को ढूंढते हैं ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने  एक बैठक के बाद कहा कि ताइवान को क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों पर अपनी निगरानी और सतर्कता बढ़ानी चाहिए


और विदेशी गलत सूचनाओं से निपटना चाहिए, हालांकि उसने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया त्साई इंग-वेन ने यूक्रेन से जुड़े मुद्दे पर बैठक की थी,ताइवान की सरकार का कहना है कि द्वीप की स्थिति और यूक्रेन की स्थिति मौलिक रूप से भिन्न है,त्साई ने यूक्रेन की स्थिति के लिए सहानुभूति व्यक्त की है. हालांकि, इधर ताइवान को भी चीन से सैन्य खतरे का सामना करना पड़ रहा है, ताइवान लगातार चीन से निपटने में जुटा हुआ है,ताइवान की बात करें, तो यह एक गृह युद्ध के बाद 1949 में मुख्य चीनी भूभाग से राजनीतिक रूप से अलग हो गया था, इसके केवल 15 औपचारिक राजनयिक सहयोगी हैं लेकिन वो अपने व्यापार कार्यालयों के जरिए अमेरिका और जापान समेत सभी प्रमुख देशों के साथ अनौपचारिक संबंध रखता है, चीन इस संप्रभु देश मानने से इनकार करता है,   ताइवान को हथियार बेचने को लेकर चीन ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। चीन का कहना है कि वह बोइंग और लॉकहीड मार्टिन समेत अमेरिकी कंपनियों पर विरोधी ताइवान को हथियारों की आपूर्ति करने को लेकर प्रतिबंध लगाएगा।ताइवान ने मंगलवार को कहा कि चीन सीधे सैन्य संघर्ष में उलझे बिना उसकी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करके और लोगों की राय को प्रभावित करके द्वीप को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने एक द्विवार्षिक रिपोर्ट में कहा कि चीन ताइवान पर दबाव बनाने के लिए ‘ग्रे जोन’ रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है। ‘ग्रे जोन’ रणनीति के तहत कोई विरोधी बड़े पैमाने पर सीधे संघर्ष से बचते हुए अपने हित साधने के लिए अप्रत्यक्ष तरीके से दबाव बनाता है। चीन ताइवान पर अपना दावा करता ताइवान के खिलाफ जो रणनीति अपना रहा है, उसमें साइबर युद्ध छेड़ना, दुष्प्रचार करना और ताइवान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए मुहिम चलाना शामिल है, ताकि ताइवान को कोई युद्ध किए बिना चीन की शर्तें मानने पर मजबूर किया जा सके। उल्लेखनीय है कि चीन और ताइवान 1949 के गृहयुद्ध में अलग हो गए थे।

अमेरिका ने साम्यवादी चीन को मान्यता देने के लिए 1979 में ताइवान से औपचारिक कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए थे, लेकिन वह कानून के तहत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ताइवान अपनी रक्षा स्वयं कर सके और वह उसके प्रति सभी खतरों को गंभीर चिंता का विषय मानता है।,सीएनएन टाउन हॉल, में यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका, ताइवान की रक्षा के लिए आगे आएगा, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था, ‘हां, ऐसा करना हमारी प्रतिबद्धता है।’ इसके तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद ताइवान को राष्ट्रवादी चीनी नियंत्रण में वापस कर दिया गया था । हालाँकि, 1949 में चीनी कम्युनिस्ट सेनाओं ने मुख्य भूमि पर राष्ट्रवादी ताकतों को हरा दिया और वहां पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की। राष्ट्रवादी सरकार और सेनाएँ ताइवान भाग गईं, जिसके परिणामस्वरूप ताइवान फिर से चीन से अलग हो गया। आगामी वर्षों में आरओसी ने चीनी मुख्य भूमि के साथ-साथ ताइवान पर अधिकार क्षेत्र का दावा किया, हालांकि 1990 के दशक की शुरुआत में ताइवान की सरकार ने चीन के लिए यह दावा छोड़ दिया। बीजिंग में चीनी सरकारने कहा है कि ताइवान पर उसका अधिकार क्षेत्र है और उसने एक-चीन नीति का प्रस्ताव देना जारी रखा है - एक ऐसी स्थिति जो दुनिया के कुछ देशों में विवाद करती है। हालांकि, दोनों संस्थाओं को फिर से कैसे या कब, कैसे या कब, इस पर कोई समझौता नहीं हुआ है।ताइवान, आकार में मोटे तौर पर अंडाकार, नीदरलैंड या संयुक्त राज्य अमेरिका के मैसाचुसेट्स , रोड आइलैंड और कनेक्टिकट राज्यों के क्षेत्र में अनुमानित है । यह पूर्वी और दक्षिण पूर्व एशिया के तट पर द्वीपों की एक श्रृंखला का हिस्सा है जो दक्षिण जापान से फिलीपींस के माध्यम से इंडोनेशिया तक फैली हुई है । ताइवान उत्तर और उत्तर पूर्व में पूर्वी चीन सागर से घिरा है, उत्तर पूर्व में रयूकू द्वीप (जापान का सबसे दक्षिणी भाग) के साथ। पूर्व में प्रशांत महासागर का विशाल विस्तार पाया जाता है, और दक्षिण में बाशी चैनल है, जो ताइवान को फिलीपींस से अलग करता है। पश्चिम में ताइवान  जो ताइवान को चीनी मुख्य भूमि से अलग करता है।हालाँकि, ताइवान के पश्चिमी तट पर इसकी तटरेखाओं और चट्टानों की उम्र और संरचनाओं का विन्यास कुछ भूवैज्ञानिकों को सुझाव देता है कि ताइवान कभी एशियाई मुख्य भूमि का हिस्सा था। सामान्य तौर पर, द्वीप की राहत में एक उत्थानित क्रस्टल ब्लॉक होता है जो उत्तर-उत्तर-पूर्व से दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम तक जाता है। द्वीप का आंतरिक भाग पहाड़ी है और पूर्व की ओर प्रशांत की ओर तेजी से नीचे की ओर और पश्चिम में ताइवान जलडमरूमध्य की ओर अधिक धीरे-धीरे ढलान है ।ताइवान के कई बेहतरीन बंदरगाह पश्चिमी तटरेखा के साथ स्थित हैं- उदाहरण के लिए, दक्षिण-पश्चिम में ताई-नैन ताइनान विशेष नगरपालिका के काओ -हिसुंग (गाओक्सियोंग ) और एन-पिंग (अनपिंग) जिले- अपवाद के साथ सुआओ द्वीप के उत्तरी सिरे पर पूर्वोत्तर तट पर खाड़ी और ची-लंग (जिलोंग, या कीलुंग)। अधिकांश कृषि भूमि और फलस्वरूप अधिकांश आबादी द्वीप के पश्चिमी भाग में पाई जाती है।ताइवान में अपने आकार के लिए अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में नदियाँ हैं, लेकिन वे ज्यादातर छोटी और छोटी हैं और नौगम्य नहीं हैं - तान-शुई (दानशुई, या तमसुई) नदी के बाद के विवरण के अपवाद हैं, जो पहाड़ों से उत्तर की ओर बहती हैं और ताइवान जलडमरूमध्य में खाली होने से पहले ताइपे के पास से गुजरता है। ताइवान की अधिकांश नदियाँ चुंग-यांग रेंज की ढलानों पर उत्पन्न होती हैं, और जो पूर्व की ओर बहती हैं, वे अधिक तेज़ होती हैं और उनमें पश्चिम की ओर बहने वाली धाराओं की तुलना में तेज़ प्रवाह वाली धाराएँ होती हैं। पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों की तलहटी, पहाड़ों को छोड़ने के बाद, चौड़ी और उथली हो जाती है और इस तथ्य के साथ कि उन नदियों में काफी गाद होती है, जिससे जल संसाधनों का प्रबंधन मुश्किल हो जाता है। मध्य ताइवान में चो-शुई (झुओशुई) नदी 116 मील (186 किमी) में द्वीप की सबसे लंबी है, और दक्षिण में काओ-पिंग (गाओपिंग) नदी में सबसे बड़ा जल निकासी बेसिन है । सिंचाई और जल निकासी चैनल ताइवान की कई नदियों कोचीन की सरकारी भोंपू मीडिया ग्लोबल टाइम्स अखबार के एक लेख में कहा गया है कि, अमेरिका और ताइवान के बीच 'मिलीभगत' इतनी 'दुस्साहसिक' है, कि स्थिति अब काबू में आने की संभावना काफी कम है और दोनों देश आमने-सामने खड़़े हो चुके हैं। ग्लोबल टाइम्स में धमकी देते हुए कहा गया है कि, चीन के लोग ताइवान का साथ देने वाले अमेरिका से युद्ध करने के लिए तैयार हैं। वहीं, ग्लोबल टाइम्स ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ताइवान 'आग से खेल रहा है'। ताइवान, एक लोकतंत्र जो खुद को एक संप्रभु राज्य मानता है, उसने चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अपील की है, कि वो ताइवान की हवाई सीमा में लड़ाकू विमानों को भेजना बंद करे। आपको बता दें कि शुक्रवार से अब तक चीन 150 से ज्यादा लड़ाकू विमानों को ताइवान के एयरस्पेस में भेज चुका है और आशंका है कि कभी भी ताइवान पर चीन हमला कर सकता है।

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