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Tuesday, April 12, 2022

जनसंख्या नियंत्रण कानून आज की अत्यधिक आवश्यकता.....................

देवेश प्रताप सिंह राठौर

 वरिष्ठ पत्रकार.

............................................. भारतवर्ष जब आजाद हुआ था उस समय भारत वर्ष की आबादी 33 करोड़ थी आज 4 गुना अधिक आबादी हो गई है, इन 75 वर्षों में जिस तरह से जनसंख्या ने गति पकड़ी है उससे अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले एक दो दशक में भारत की जनसंख्या किस हाल में  पहुंचेगी इसका जवाब और समझना बड़ा मुश्किल है ,जनसंख्या नियंत्रण आज की बहुत बड़ी आवश्यकता है, केंद्र सरकार और  राज्य सरकार या देश की सभी राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण पर विधायक लाएं और जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए  बहुत जरूरी कानून बनाने की जरूरत है, मैं केंद्र सरकार से कई पूर्व लेखों में मैंने जनसंख्या नियंत्रण पर लिखा था जनसंख्या नियंत्रण अगर नहीं हुआ भारत एक गंभीर स्थित की तरफ जनसंख्या के हिसाब से जा रहा है, इसमें एक वर्ग की जो सोच है कि हम इतनी जनसंख्या बढ़ा दें और हम जनसंख्या के बल पर पूरे भारतवर्ष में राज्य करें सभी लोग सचेत रहें होशियार रहें और यह मन बना ले अगर जनसंख्या नियंत्रण नहीं हुआ हमारे बच्चों का भविष्य हमारी नई पीढ़ी जो तैयार हो रही है


वह है आने वाले भविष्य में खतरनाक स्थित पर जनसंख्या के हिसाब से पहुंच जाएंगे और जो अन्य देशों में हो रहा है अरब कंट्री में वह हम लोग खेलेंगे जनसंख्या नियंत्रण कानून आज की देश हित में सबसे बड़ी राष्ट्रभक्त में सबसे बड़ी और देश को बचाने के लिए सबसे बड़ी अब घड़ी आ गई है जनसंख्या की वृद्धि को हर हालत में रोकना है जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाकर इसे रोकना इसके लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून आज की अत्यधिक आवश्यकता है और क्यों है कुछ आंकड़े हैं आपके समक्ष  रखता हूं ,भारत की आबादी वर्तमान में आजादी के 75 वर्षों के बाद क्या स्थित है 137 करोड़ है, वहीं चीन की आबादी 143 करोड़ है। ऐसे में 2027 तक चीन को पीछे करके भारत दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। इसमें कोई दो-राय नहीं कि बढ़ती आबादी किस तरह से नई-नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। बता दें, जनसंख्या के लिहाज से भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। आजादी के समय भारत की जनसंख्या 33 करोड़ थी जो अब तक चार गुना बढ़ गई है।  संयुक्त राष्ट्र की विश्व आबादी पर जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, उसमें कहा गया है कि 2027 तक भारत की आबादी दुनिया में सर्वाधिक होकर 150 करोड़ के पार पहुंच जाएगी।अभी भारत की आबादी 137 करोड़ है, वहीं चीन की आबादी 143 करोड़ है। ऐसे में 2027 तक चीन को पीछे करके भारत दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। इसमें कोई दो-राय नहीं कि बढ़ती आबादी किस तरह से नई-नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। बता दें, जनसंख्या के लिहाज से भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। आजादी के समय भारत की जनसंख्या 33 करोड़ थी जो अब तक चार गुना बढ़ गई है।भूभाग के लिहाज से हमारे पास 2.5 फीसदी जमीन है। 4 फीसदी जल संसाधन हैं। जबकि विश्व में बीमारियों का जितना बोझ है उसका 20 फीसदी बोझ अकेले भारत पर है। वर्तमान समय में जिस गति से विश्व की आबादी बढ़ रही है उसके हिसाब से प्रत्येक साल 8 करोड़ लोगों की वृद्धि हो रही है और इसका दबाव प्राकृतिक संसाधनों पर स्पष्ट रूप से पड़ रहा है। इतना ही नहीं विश्व समुदाय के समक्ष स्थानांतरण की समस्या भी उभर रही है क्योंकि बढ़ती आबादी के चलते लोग बुनियादी सुख-सुविधा के लिए दूसरे देशों में पनाह लेने को मजबूर हैं।चिंता की बात यह है कि भारत के कई राज्य विकास में भले ही पीछे हों परन्तु उनकी जनसंख्या विश्व के कई देशों की जनसंख्या से अधिक है। उदाहरणार्थ तमिलनाडु की जनसंख्या फ्रांस की जनसंख्या से अधिक है तो वहीं उड़ीसा अर्जेंटीना से आगे है। मध्यप्रदेश की जनसंख्या थाईलैंड से ज्यादा है तो महाराष्ट्र मैक्सिको को टक्कर दे रहा है। उत्तर प्रदेश ने ब्राजील को पीछे छोड़ा है तो राजस्थान ने इटली को पछाड़ा है! गुजरात ने साऊथ अफ्रीका को मात दे दी तो पश्चिम बंगाल वियतनाम से आगे बढ़ गया। यही नहीं हमारे छोटे-छोटे राज्यों जैसे झारखंड, उत्तराखंड, केरल ने भी कई देशों जैसे यूगांडा, आस्ट्रिया, कनाडा, उज्बेकिस्तान को बहुत पीछे छोड़ दिया है। अपनी इस उपलब्धि के साथ हम यह कह सकते हैं कि भारत में जनसंख्या के आधार पर विश्व के कई देश बसते हैं। पिछले दो दशकों में भारत ने काफी तरक्की की है, लेकिन दूसरी तरफ जनसंख्या वृद्धि से बेरोजगारी, स्वास्थ्य, परिवार, गरीबी, भुखमरी और पोषण से संबंधित कई चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। हालांकि इन समस्याओं का विश्व के प्राय: सभी देशों को सामना करना पड़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत देश में कुछ फरमाए से हैं, भारत देश में कुछ जातियां ऐसी हैं धर्म ऐसे हैं जिनका उद्देश्य है बच्चे पैदा करना अधिक से अधिक करना कोई कमाना नहीं है कोई जरिया नहीं है लेकिन बच्चे 8 एवं 10 है कोई साइकिल का पंचर बना रहा है कोई मकैनिक की दुकान खोले कोई हवा भर रहा है ,कोई कूड़ा  बीन रहा है  कोई कबाड़ी की दुकान खोले हैं और कोई चोरी कर रहा है और कोई गुंडागर्दी कर रहा है इस धारणा के लोग उस धर्मों में व्याप्त है, उनकी सोच यह है कि हम 10 पैदा करेंगे और बच्चों को पढ़ाना लिखा ना तो है नहीं ,लेकिन वह 10 लोग बचपन से ही उनको काम पर लगा दिया जाता है किसी मोटर मकैनिक की दुकान पर किसी पंचर बनाने वाली दुकान पर किसी अन्य स्थानों पर वह काम करने लगते हैं और उनका अभिभावक   कि हमने 8 बच्चों को पैदा किया है तो 8 बच्चे 10 एवं11 साल से काम करने लगते हैं ₹100 भी लाएंगे तो हमारे ₹800 प्रतिदिन के हो गए हैं यह सोच है कि इनकी सोच को पढ़ा-लिखा समाज कैसे इनको पाएगा यह बहुत ही चिंता का विषय है, इस पर सरकार को ध्यान देते हुए शीघ्र से शीघ्र जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की आवश्यकता है,  आज की आवश्यकता है नहीं तो वह रूप विकराल होगा हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों  को बचाने के लिए मुहिम करने की जरूरत पड़ेगी हम संख्या बल में बहुत ही कम हो जाएंगे वह स्थित मत आने दो जनसंख्या नियंत्रण कानून आज की अत्यधिक आवश्यकता है।

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