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Thursday, March 17, 2022

गिले-शिकवे को मिटाता है, होली रंगों का त्योहार

देवेश प्रताप सिंह राठौर

.........................होली हमारे देश में हर समुदाय के लोग बड़े-धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस दिन सभी लोग अपने गिले-शिकवे भूलकर एक दूसरे को गले लगकर एक दूसरे के ऊपर रंग-गुलाल लगाते हैं। इस दिन शाम के वक्त लोग नए-नए कपड़े पहन कर एक दूसरे के घर जाते हैं। होली के दिन लोगअपने घर में में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर साल फाल्गुन मास महीने में मनाया जाता है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाती है। इसके पीछे पौराणिक कथाएं भी कही जाती है। इस दिन ही प्रह्लाद के पिता हिरणकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद से अपने पुत्र को मारने की कोशिश की थी। जिससे गुस्सा होकर भगवान विष्णु ने होलिका को आग में जला दिया था। होली हर क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती हैं। इस दिन लोग तरह-तरह के लोकगीत गाते है। मथुरा और वृंदावन की होली पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। आपको बता दे कि यहां 15 दिनों तक होली मनाई जाती है। होली के दिन लोग सवेरे-सवेरे


उठकर भगवान की पूजा अर्चना कर प्रसाद चढ़ाते है। होली बच्चों के लिए बेहद खास पर्व होता हैभारत में बहुत से त्यौहार मनाये जाते हैं इनमे से एक होली का त्यौहार भी मनाया जाता है। जिसे सभी लोग रंगों के साथ गुलाल लगाकर मनाते हैं। पहले समय में होली को सिर्फ गुलाल और चन्दन लगा कर मनाया जाता था। भारत में अलग-अलग जगहों में होली अलग-अलग नाम से वृन्दावन की होली, काशी की होली, ब्रज की होली, मथुरा की होली आदि प्रसिद्ध है। होली के दिन सभी लोग अपने घरों में विभन्न प्रकार के पकवान बनाते हैं और महमानों को बुलाते हैं होली के पहले दिन सभी लोग रात को एकत्र हो कर होलिका दहन करते हैं और डीजे लगा कर नाच गाना करते हैं। होली को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ हर समुदाय के लोग मनाते हैं।आज दुनिया के कई देशों में भारतीय त्यौहार भी धूमधाम और परंपरा के साथ मनाए जाते हैं। जो निश्चित ही यह बोध कराता है कि हमारी संस्कृति सर्वग्राही है, सर्वव्यापक है। लेकिन मुख्य सवाल यह है कि हम भारतीय जन अपने त्यौहारों की व्यापकता को विस्मृत करते जा रहे हैं। उनका स्वरूप बदल दिया है। इसीलिए हमारे देश की नई पीढ़ी अपने भारत से दूर होती दिखाई देने लगी है। यह दृष्टिकोण जहां मानसिक विचारों में संकुचन का भाव पैदा कर रहा है, वहीं अपनी संस्कृति से दूर होने का अहसास भी करा रहा है।भारत के मुख्य त्यौहारों में शामिल होली का त्यौहार विविधता को एक रूप में स्थापित करते हुए सामाजिक एकता का बोध कराने वाला है। जिस प्रकार अनेक रंग मिलकर नया रंग बनाते हैं, उसी प्रकार भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले जन भी एक ही भाव से होली का त्यौहार मनाते हैं। यहां क्षेत्रीयता के आधार पर विभाजन करने वाली दीवारें धराशायी हो जाती हैं। पूरे भारत में होली का उल्लास ही दिखाई देता है। सब एक ही रंग में रंगे हुए दिखाई देते हैं। इसलिए होली को भारत की एकता का त्यौहार निरूपित किया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।सोहार्द का पर्व है ही होली एक सभी को लेकर चलने वाला एक ऐसा पर्व है जो बिना किसी खर्च के पूर्ण उत्साह और उल्लास से मनाया जा सकता है। यह पकवानों का भी पर्व है। होली प्रेम-प्रतीति का, एकता और भाई-चारे का, मानवता, सौहार्द और अपनेपन का पर्व है। होली पर सभी भेदभाव भुलाकर, गले मिल कर प्रेम बांटना चाहिए। दूसरे की भावना का ध्यान रख कर थोड़ा सा रंग लगाने से घर-परिवार और समाज में शांति और सोहार्द बना रहता है।

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