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Saturday, March 5, 2022

यूक्रेन से अपने घर लौटा हेमेंद्र, फफक पड़े परिजन

यूक्रेन के हालात से अवगत कराया तो अचंभित रह गए लोग 

भजापाइयों ने घर पहुंचकर पूछी कुशलक्षेम, किया स्वागत  

बांदा, के एस दुबे । यूक्रेन पढ़ाई करने के लिए गया छात्र हेमेंद्र तमाम मुसीबतों को पार करते हुए आखिरकार शुक्रवार को सुबह अपने घर पहुंच गया। छात्र के घर पहुंचते ही माता-पिता ने उसे सीने से लगा लिया और फफक कर रो पड़े। लेकिन बेटे के घर आ जाने की खुशियों ने उनकी सारी परेशानियों को दूर कर दिया। छात्र ने बताया कि बहुत बुरे हालात से गुजरते हुए बार्डर बार किया और अपने घर आ सका। भाजपाइयों ने घर पहुंचकर छात्र का स्वागत किया। 

यूक्रेन से लौटे छात्र हेमेंद्र का स्वागत करते भाजपाई

गौरतलब हो कि शहर के सेढ़ू तलैया निवासी डा.चुन्ना सिंह का पुत्र हेमेंद्र सिंह यूक्रेन में पढ़ाई करने के लिए गया हुआ था। व्हां पर रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। युद्ध के दौरान वह भी यूक्रेन के खारकीव में फंस गया। पिछले एक सप्ताह से जारी युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसा मेडिकल छात्र हेमेंद्र सिंह शुक्रवार को तड़के अपने घर सकुशल पहुंच गया। मुसीबतों के पहाड़ से निकल घर पहुंचा तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मां शकुंतला सिंह ने देखते ही जिगर के टुकड़े को अपने कलेजे से लगा लिया। बेटे को देखते ही मां की आंखों में खुशी के आंसू भर आए। वहीं पिता सेवानिवृत्त प्राचार्य डा.चुन्ना सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भी कलेजे के टुकड़े को दिल से लगा लिया। वहीं दूसरी ओर हेमेंद्र के लौटने पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों की कुशलक्षेम पूछने के लिए घर पर भीड़ लग गई। हेमेंद्र ने बातचीत के दौरान मीडिया को बताया कि वह कितनी बाधाएं पार करके और मुसीबत से वतन लौटा है। बताया कि खारकीव स्टेशन से स्पेशल ट्रेन से वह लवीव पहुंचे। वहां से पोलैंड की सीमा पर दाखिल हुए। पोलैंड से सरकार के विशेष विमान से स्वदेश लौट आए हैं। छात्र ने बताया कि दोस्तों के साथ भगवान भरोसे किसी तरह यूक्रेन का बार्डर क्रास किया। खारकीव से वह स्पेशल ट्रेन से लवीव पहुंचे। यहां मिनी बस में चार गुना किराया अदा कर पोलैंड की सीमा पर प्रवेश किया। पोलैंड पहुंचने पर उन्हें सहायता मिलना शुरू हुई। यह भ्ी बताया कि खारकीव में फंसे होने पर उन्होंने भारतीय दूतावास से मदद मांगी। लेकिन भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने उनकी मदद करने से हाथ खड़े कर लिए। दूतावास के अधिकारियों ने सिर्फ बंकर में रहने की ही सलाह दी। युद्ध भूमि पर लगातार गोलियों और बम की आवाजें उन्हें और डराती रहीं। यूक्रेन में रहने के दौरान किसी भी तरह की मदद नहीं मिली। पोलैंड सीमा पार करने के बाद ही मदद और खाना आदि मिला। इधर, कैब चालक ने अधिक किराया वसूल किया। 


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