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Monday, March 28, 2022

बीजेपी नेता ने वन नेशन वन एजुकेशन की उठाई मांग

बाँदा, के एस दुबे - भारत जैसे बहुभाषी देश मे एक देश एक पाठ्यक्रम  एक शिक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए। इस आशय का पत्र भाजपा के  पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू द्वारा देश के शिक्षा मंत्री  धर्मेंद्र प्रधान  को लिखा गया था। जिसमे कहा गया था की निजी शिक्षण संस्थानों के द्वारा मासूम  के नाजुक कंधों में मनमानी कॉपी किताब का स्कूल बैग । जिससे जहां एक और बस्ता महंगा हो जाता है वही दूसरी ओर बच्चों को कंधो, रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत भी हो जाती है ।जहां तक जानकारी है कि बच्चों की कॉपी किताब का बोझ उनके वजन का 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। परंतु नहीं  निजी शिक्षा संस्थानों के द्वारा प्राइवेट प्रकाशकों की मिलीभगत के कारण मनमानी महंगी गुणवत्ता और मानक विहीन पुस्तकें चलाई जा रही हैं। बार-बार पाठ्यक्रम बदलने का सिलसिला जारी है ।शिक्षा महंगी होती जा रही है। जिस कारण आम अभिभावक शिक्षा के बोझ से तड़प रहा है ।और बार-बार किताबें बाजार से खरीदने के लिए मजबूर हो रहा है। बार-बार पाठ्यक्रम बदलने से यदि घर में बड़े

भाई की बहन छोटी है तो वह भी अपने भाई की किताबें अगली कक्षा में प्रयोग नहीं कर पाती क्योंकि स्कूलों के द्वारा प्रत्येक वर्ष मनमाफिक प्रकाशको की मनमानी संख्या में किताबें लगाकर मासूमों के नाजुक कंधों का स्कूल बैग भारी करके उनका मानसिक शारीरिक और उनके अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। बार-बार पाठ्यक्रम बदलने से हर साल करोड़ों कुंटल किताबें रद्दी के भाव बिक जाती हैं। इससे हर साल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है ।शिक्षा दिन प्रतिदिन महंगी हो रही है। सरकार को चाहिए कि पूरे भारतवर्ष में *एक देश एक पाठ्यक्रम* एक देश एक शिक्षा लागू करने पर विचार करना चाहिए एक देश एक शिक्षा एक देश एक पाठ्यक्रम  होने से जहां आम अभिभावकों को बार-बार किताबे बदलने से मुक्ति मिलेगी वहीं पाठ्यक्रम की भी एक निर्धारित कीमत तय होगी। उन्होंने  देेश के सभी शिक्षण संस्थानों में केंद्रीय विद्यालय और सैनिक स्कूल नवोदय विद्यालय की भांति एक देश एक पाठ्यक्रम अर्थात एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाए। चाहे बच्चा अर्दली का हो या न्यायधीश का,चपरासी का हो या आईएएस का संत्री का हो या मंत्री का सभी को एक देश एक पाठ्यक्रम आधारित पठन-पाठन सामग्री लागू होना चाहिए ।स्कूल में बैठने का माध्यम अलग अलग हो सकता है। कोई प्राइमरी पाठशाला में पढ़े या कोई कन्वेंट स्कूल में परंतु पाठ्यक्रम एक होना चाहिए ।इस पर सरकार को चाहिए कि पूरे देश के शिक्षाविदों से पत्रकार बंधुओं से वरिष्ठ नागरिकों से बुद्धिजीवियों से सुझाव आमंत्रित करना चाहिए कि आखिर एक देश एक पाठ्यक्रम लागू कैसे किया जाए ।वर्तमान में भारत जिले में जितने भी विद्यालय हैं सभी विद्यालयों में अलग-अलग पाठ्यक्रम चल रहा है ।जबकि उनके मान्यता  प्राधिकारी या तो बेसिक शिक्षा है या जूनियर हैं अथवा सीबीएसई बोर्ड हैं आईसीएसई बोर्ड है राज्य शिक्षा बोर्ड हैं ।एक ही मान्यता प्राधिकारी होने के बावजूद हर स्कूल में अलग-अलग पाठ्यक्रम निजी शिक्षण संस्थान अपने मन मुताबिक चला रहे हैं। बार बार पाठ्यक्रम बदलने के लिए और महंगी किताबें पर रोक लगाने के लिए एक ही सुझाव है और एक ही विचार मेरे मन में आता है कि संपूर्ण भारत वर्ष की शिक्षा व्यवस्था पर *एक देश एक पाठ्यक्रम* एक देश एक शिक्षा एक देश एक बोर्ड यानी कि *भारतीय/ इंडियन एजुकेशन बोर्ड लागू करना चाहिए ।
अलग-अलग बोर्ड जो वर्तमान में चल रहे हैं जैसे यूपी बोर्ड ,बिहार बोर्ड, गुजरात बोर्ड ,राजस्थान बोर्ड ,आईसीएसई बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड, आईएससी बोर्ड इन सभी बोर्डों को भारतीय शिक्षा बोर्ड में मर्ज करके *एक देश एक शिक्षा* एक देश एक परीक्षा पर लागू करना चाहिए ।
जैसे अभी हाल ही में केंद्र सरकार के द्वारा भारत के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इंटरमीडिएट की परीक्षा के बाद प्रवेश के लिए जो *एक देश एक परीक्षा* का कार्यक्रम बनाया  है, वह अत्यंत ही सराहनीय है क्योंकि केंद्र सरकार ने निश्चित रूप से ऐसा अनुभव किया है कि कोई बिहार बोर्ड से कोई यूपीएमपी बोर्ड, राजस्थान बोर्ड से ,कोई सीबीएसई बोर्ड से कोई एसएससी बोर्ड से अलग-अलग अंकों के आधार पर जो मेरिट बनती थी उसी आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खासतौर से डीयू में प्रवेश के लिए प्राप्त होते थे। परंतु केंद्र सरकार ने यह एक अत्यंत ही सराहनीय कदम उठाया है कि इंटरमीडिएट के बाद सभी छात्रों को उनके नंबर के आधार पर नहीं बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा निर्धारित एक परीक्षा के आधार पर जो पात्र माने जाएंगे उसी के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए पात्र होंगे। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम अत्यंत ही सराहनीय इस विषय मेरे द्वारा कई वर्षो से केंद्र सरकार को पत्राचार किया जा रहा था। विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा यह छात्र हित में उठाया गया कदम मील का पत्थर साबित होगा।
जीतू त्रिपाठी ने कहा कि मेरे द्वारा देश के प्रधान मंत्री से लेकर शिक्षा विभाग से संबंधित सभी अधिकारी और प्रदेश के मुख्य सचिव को बराबर लिखा गया है !

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