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Friday, March 25, 2022


 वनगमन का मार्मिक प्रसंग सुन श्रोताओं के छलके आंसू

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। रामायण मेला परिसर सीतापुर में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के चौथे दिन संत मुरलीधर जी महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्या काण्ड में वर्णित भगवान राम के वन गमन के प्रसंग के तहत निषादराज का मार्मिक वर्णन किया। भगवान राम के वन गमन के आदेश की मार्मिक चौपाइयां सुनकर श्रोताओं की आंखे छलक उठी। महाराज ने बताया कि वर्तमान में जिसके माता-पिता इस दुनिया में जीवित है वह सबसे भाग्यशाली इंसान है। माता पिता की जो सेवा करता है वह इस संसार रूपी सागर से पार उतर जाता है जो इनकी आत्मा को दुखाता है, वह इस संसार सागर में डूब जाता है। कहा कि रामायण में दासी मंथरा के भड़काने से केकई ने राजा दशरथ से राम के वन गमन का आदेश तो दिलवा दिया। अपने पिता की आज्ञा की अनुपाना करने को भगवान राम अयोध्या से वन को चले गए, लेकिन अयोध्या के लोगों के हृदय में राम हमेशा विराजित रहे। वे भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा में संन्यासियों सा जीवन व्यतीत करने लगे। इस अवसर पर भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन, विष्णु गोयल, डा. चंदा शर्मा सहित संत व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा रसपान कराते संत मुरलीधर महराज।

मानस प्रवक्ता ने की मां मंदाकिनी की आरती

चित्रकूट। रामघाट के पवित्र स्थल पर संत मुरलीधर जी महाराज ने सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ मां मंदाकिनी की दिव्य आरती की। आरती से पूर्व मंदाकिनी के घाट को सुंदर दीपमाला से सजाया गया। हजारों की संख्या में टिमटिमाते दीपक दीपावली के त्योहार से प्रतीत हो रहे थे। वैदिक मंत्रोचार के साथ आरती प्रारंभ हुई। आरती का सुंदर मनोरम दृश्य देख श्रद्धालु भक्तिमय नजर आए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां मंदाकिनी की पवित्रता बनाए रखने की प्रतिज्ञा ली है।


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