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Tuesday, March 8, 2022

पाठा में पढ़ा रहीं परिवार नियोजन का पाठ

दस्यु प्रभावित क्षेत्र में कराईं 100 महिला नसबंदी 

आशाओं के साथ दंपतियों को भी प्रेरित कर रही संगिनी सुधा 

31 आशा कार्यकर्ताओं का उठा रहीं जिम्मा 

बांदा, के एस दुबे । कभी दस्युओं की दहशत से सहमे पाठा क्षेत्र में अब परिवार नियोजन का शोर सुनाई दे रहा है। परिवार खुशहाल बनाने के लिए ग्रामीण महिलाएं भी आगे आकर जिम्मेदारी निभा रही हैं। दंपतियों व क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए आशा संगिनी सुधा पूरी शिद्दत से अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रही हैं। पाठा क्षेत्र में इस साल 100 से ज्यादा महिला व एक पुरूष नसबंदी कराकर सुधा परिवार नियोजन का पाठ पढ़ा रही हैं। 

नरैनी क्षेत्र के सढ़ा गांव की रहने वाली आशा संगिनी सुधा देवी ने वर्ष 2006 में आशा कार्यकर्ता के पद पर कार्यभार संभाला था। अपना कार्य बेहतर ढ़ग से करने की वजह से उन्हें वर्ष 2013 में पदोन्नति मिली और आशा संगिनी बना दिया गया। संगिनी के तौर पर सुधा को 31 आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी दे दी गई। इसमें आधा दर्जन से ज्यादा गांव दस्यु प्रभावित क्षेत्र के हैं। इन गांवों में डकैतों सबसे ज्यादा आंतक रहा है। जिससे यहां स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित रहती थीं। यह ऐसे गांव हैं जहां पुलिस भी जाने से कतराती थी। लेकिन अब पाठा क्षेत्र के गांवों में परिवार नियोजन पाठ पढ़ाया जा रहा है। सुधा ने बताया कि अपनी आशा कार्यकर्ता के साथ इस साल इन गांवों में 100 से ज्यादा महिलाओं को प्रेरित कर नसबंदी करवा चुकी हैं। इसमें 18 महिलाओं की नसंबदी सिर्फ उसने ही करवाई हैं। 

मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एके श्रीवास्तव का कहना है कि दस्यु प्रभावित गांव होने से स्वास्थ्य सेवाओं को संचालन नहीं हो पाया। लेकिन अब ग्राम स्तर पर मिलने वाली सभी सेवाएं ग्रामीणों को बेहतर ढ़ग से दी जा रही हैं। आशा संगिनी सुधा की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि यहां ग्रामीण छोटे परिवार के महत्व को समझ पाए। परिवार नियोजन के संसाधनों को अपना रहे हैं। 

बघेलाबारी गांव में ग्रामीणों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करती आशा संगिनी सुधा देवी।

पुरूषों को भी किया प्रेरित, एक हुई नसबंदी

बांदा। आशा संगिनी सुधा बताती हैं कि महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों को परिवार नियोजन के लिए प्रेरित करना बहुत मुश्किल है। लेकिन कई पुरूष बात को समझकर परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधन अपना रहे हैं। बघेलाबारी गांव में इस साल एक पुरूष ने आगे आकर नसबंदी करवाई है। उन्होंने बताया कि बघोलन गांव जहां एसटीएफ जवानों को चलती वैन में गोलियां बरसा कर शहीद कर दिया गया था, वहां इस साल सबसे ज्यादा 8 महिला नसबंदी हुई हैं। 

दस्यु प्रभावित क्षेत्र में यह गांव हैं शामिल 

बांदा। आशा संगिनी सुधा ने बताया कि उस पर 31 आशा कार्यकर्ताओं का जिम्मा है। सढ़ा, रक्सी, मूड़ी, गोरेमऊ, छतैनी, महुई, कुलसारी, कल्यानपुर, खेरिया गांवों की आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर पहुंचा रही हैं। इसके अलावा दस्यु प्रभावित क्षेत्र के बघेलाबरी, डढ़वामानपुर, कुरूहूं, बघोलन, बरछा डड़िया, संग्रामपुर गांव उनके क्षेत्र में शामिल हैं।


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