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Monday, March 21, 2022

कार्यशाला में उत्पीड़न और हिंसा पर की गई चर्चा

बदौसा, के एस दुबे । परिवर्तन कार्यक्रम के तहत 11 से 18 वर्ष के किशोर किशोरियों को जेण्डर आधारित भूमिका और पितृसत्ता ब्यवस्था में समझ बनाते हुए बाल लैंगिक शोषण और उत्पीड़न तथा हिंसा और उसका असर आदि मुद्दों पर कार्यशाला सम्पन्न हुई। फैसलिटेटर सन्तोष कुशवाहा नें कार्यक्रम के विधिवत आयोजन में सहयोग के लिए डा. एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल स्कूल के प्रबंधतंत्र, शिक्षक तथा विद्यार्थियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। मालूम हो कि परिवर्तन, ग्रीन एण्ड हैपी इंडिया ट्रस्ट बदौसा एवं सेंटर फॉर हेल्थ एण्ड शोसल जस्टिस सामाजिक संस्था के

कार्यशाला को संबोधित करती किशोरी

द्वारा बदौसा कस्बे में संचालित डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम मेमोरियल स्कूल बदौसा (बांदा)  उत्तर प्रदेश के कक्षा 7 से 10 वीं तक के 126 विद्यार्थीयों के (छात्र /छात्राओं) के 5 ग्रुप बना कर उनको जेण्डर आधारित भूमिकाएं और पितृसत्ता,सामाजिक निर्माण के नजरिये से जेण्डर और पितृसत्ता, लडकियों और महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के संदर्भ में लिंग और पितृसत्ता को समझना, जेण्डर भूमिका और पितृसत्ता, सामाजिक मान्यताओं का निर्धारण व चुनौती देने में लड़कों का भूमिका, महिलाओं की संसाधनों में भागीदारी, पहुंच व निर्णय, सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देने में लड़कों व पुरुषों की भूमिका, सामाजिक नजरिया में शरीर की छवि, बाल यौन शोषण के प्रतिबंध के लिए सुरक्षा नियम हिंसा और उसका असर विषयक अलग अलग सत्रों का आयोजन करके छात्र, छात्राओं को पास्को एक्ट, बाल विवाह, घरेलू हिंसा आदि कानूनू की जानकारी दे कर जागरूक किया गया। स्कूल के डायरेक्टर अहशान अली ने कहा जेण्डर भेदभाव, हिंसा को रोकने व समता व समानता पर परिवर्तन व सीएचएसजे संस्था द्वारा चलायी गयी कार्यशाला से प्रशिक्षक सन्तोष कुशवाहा नें उनके बेहतर जीवन के लिए कुशल प्रशिक्षण दिया। हिंसा व बाल यौन शोषण को रोकनें में बच्चों मददगार सावित होगी।


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