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Wednesday, March 2, 2022

तीसरा विश्व युद्ध परमाणु का होगा..................

देवेश प्रताप सिंह राठौर .......

यूक्रेन रूस की लड़ाई अगर परमाणु में तब्दील हो गई तो विश्व युद्ध को कोई भी ताकत रोक नहीं पाएगी,रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब परमाणु हथियारों वाली कमान को तैयार रहने का निर्देश देकर अपना इरादा साफ कर दिया है कि उन्हें अब किसी का डर नहीं। इससे दुनिया के ज्यादातर देश सकते में हैं। खासतौर से अमेरिका और यूरोपीय संघ के उन देशों की नींद उड़ना लाजिमी है जो यूक्रेन के साथ खड़े हैं और उसे रूस से मुकाबला करने के लिए हथियार दे रहे हैं।यूक्रेन पर रूस के हमले को एक हफ्ता हो चुका है। रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। दोनों तरफ से भारी गोलाबारी के बीच लोगों की जान को खतरा बना हुआ है। इसमें अब तक दोनों तरफ के सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। भारत से वहां पढ़ने गया कर्नाटक का एक छात्र भी उस गोलीबारी का शिकार हो गया। भारत के हजारों विद्यार्थी वहां फंसे हुए हैं। इनकी तादाद करीब बीस


हजार बताई जा रही है, जिसमें से करीब डेढ़ हजार भारत लाए जा सके हैं। अब भारत सरकार ने वहां से अपने विद्यार्थियों को वापस लाने का अभियान तेज कर दिया है।हालांकि युद्ध शुरू होने से पहले ही यूक्रेन ने बाहरी लोगों से कह दिया था कि वे अपने वतन वापस लौट जाएं। कई देशों ने अपने नागरिकों को वहां से निकाल भी लिया। मगर वहां फंसे छात्रों को निकालने का कोई प्रयास नहीं किया गया। जो छात्र कई गुना अधिक कीमत पर टिकट खरीद सकते थे, वे तो आ गए। बाकी वहीं फंसे रहे। सभी विद्यार्थियों के लिए अपने पैसे से इतना महंगा टिकट खरीदना संभव नहीं था। फिर भारत सरकार उन्हें आश्वस्त करती रही कि जो जहां है, वह वहीं रहे। उनको कोई खतरा नहीं है। मगर स्थिति ऐसी भयावह हो जाएगी, इसका किसी को अंदाजा न रहा  , हजारों छात्रों को भूमिगत रेलवे स्टेशनों पर छिप कर रहना पड़ा। फिर भारत सरकार ने कहा कि विद्यार्थी किसी तरह यूक्रेन की सीमा पार कर हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया आदि देशों में पहुंच जाएं तो उन्हें वहां से भारतीय विमानों से लाया जा सकेगा। इस पर विद्यार्थियों में यूक्रेन छोड़ने की जल्दी मच गई। मगर उन सीमाओं तक पहुंचने के कोई साधन उपलब्ध नहीं। युद्ध की वजह से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। इस तरह बहुत सारे छात्र, जो कुछ पैसे खर्च कर सकते थे, उन्होंने लाखों रुपए खर्च करके सीमा तक पहुंचने की कोशिश की। मगर उन देशों की सरकारों ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया। वहां की पुलिस ने उन्हें मारा-पीटा भी। वहां का मौसम शून्य से चार पांच सेंटीग्रेड नीचे रहता है। ऐसे में खुले आसमान के नीचे बहुत सारे छात्रों को वक्त गुजारना पड़ रहा है।बहुत सारे लोग पढ़ाई-लिखाई और रोजी-रोजगार के सिलसिले में दूसरे देशों का रुख करते हैं। जब वे जाते हैं, तो सरकार की इजाजत होती है। अगर वे कभी किसी संकट में फंस जाते हैं तो संबंधित देश की जिम्मेदारी होती है कि उन्हें सुरक्षित बाहर निकाले। मगर भारत सरकार ने इस मामले में ढिलाई बरती, जिसका नतीजा है कि हजारों विद्यार्थी मुसीबत झेल रहे हैं। जिस तरह के चित्र वहां से आ रहे हैं, और छात्र अपनी जैसी मुसीबत बयान कर रहे हैं, वह दहलाने वाला है। इसके लिए कोई व्यावहारिक रास्ता तत्काल तलाशने की जरूरत है।रूस-यूक्रेन का युद्ध भले दो देशों के बीच होता दिख रहा हो, पर इसकी मार किसी न किसी रूप में पूरी दुनिया को झेलनी पड़ेगी। संकट सिर्फ यही नहीं है कि हमले में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं, लाखों लोग बेघर हो रहे हैं, शरणार्थी बन कर दूसरे देशों में जा रहे हैं और यूक्रेन में भारी तबाही हो गई है, बल्कि इसका असर अमेरिका, यूरोप से लेकर चीन तक पर पड़े बिना नहीं रहने वाला। डर यह है कि रूस-यूक्रेन की यह जंग दुनिया के ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था को फिर से चौपट न कर दे।    गौरतलब है कि यूरोप के देश पहले से ही भयानक आर्थिक संकट में हैं। यानी युद्ध की वजह से जो हालात पैदा हो रहे हैं, वे हर देश के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। फिर, पिछले दो साल में ज्यादातर देशों में गरीबी बढ़ी है, बेरोजगारी भी बढ़ रही है और लोगों की आय में भारी गिरावट आई है। इस वक्त सरकारों के सामने बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को और गड्ढे में जाने से बचाने की है। ऐसे में रूस-यूक्रेन संकट लंबा खिंच गया तो दुनिया एक और नए जंजाल में फंस जाएगी। भारत की सरकार ने नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में यूक्रेन से लगभग सभी छात्रों को सकुशल वापसी भारत में हो गई है। जो लोग भ्रमित कर रहे हैं भारत सरकार कुछ कर नहीं रहा है वह सिर्फ पक्ष की पार्टियां के लोग हैं जो सरकार को बदनाम करने की राजनीति कर रहे हैं।

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