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Monday, March 21, 2022

जल जनित रोगों में डायरिया के होते हैं सर्वाधिक मामले

पेयजल की गुणवत्ता जांच भी है जरूरी 

(विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर विशेष)

बांदा, के एस दुबे । हमारा शरीर 60 से 70 प्रतिशत जल से ही बना हैप् स्वस्थ शरीर के लिए स्वच्छ व शुद्ध जल अतिआवश्यक हैप् अशुद्ध पेयजल से शरीर में अनेक बीमारियां होती हैं। इससे जान तक जा सकती है। यह जानकारी दी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने दी। 

उन्होने बताया कि जल हमारे शरीर का तापमान संतुलित बनाए रखने के साथ कई उप पाचन क्रियाओं में भी सहायक होता है। हमारे रक्त भी लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है। दूषित पेयजल से हमारे शरीर में कई जल जनित बीमारियां पैदा होती हैंप् इसमें डायरिया प्रमुख हैप् आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश में सभी जल जनित बीमारियों के मुकाबले सर्वाधिक मौतें डायरिया से होती हैं। डायरिया में निर्जलीयकरण होने से कुपोषण होने की आशंका बढ़ जाती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफ़ाइल 2018 के अनुसार भारत में सालाना लगभग 3.7 करोड़ लोग जल जनित रोगों से ग्रसित होते हैं और प्रतिवर्ष 1.5 करोड बच्चे डायरिया से अपनी जान गंवा देते हैं। इसमें सर्वाधिक मामले ग्रामीण इलाकों, मलिन बस्तियों या जुगगी झोपड़ियों के होते हैं। इसके पीछे अक्सर जागरूकता का अभाव दिखता है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरएन प्रसाद ने बताया कि जल में अनेकों प्रकार के बेकटेरिया एवं चेमिकल पाये जाते हैं। जिनमें से कुछ हमारे शरीर के लिए हानिकारक भी साबित होते हैं। इनसे कई प्रकार कि बीमारिया हमारे शरीर में जन्म लेती है। इसलिए पानी को स्वच्छ रखने के साथ साथ पेयजल कि जांच करना भी बहुत आवश्यक है। क्यूकी डायरिया जैसी खतरनाक जल जनित बीमारी की चपेट में छोटे बच्चे जल्दी आते है। इसलिए बच्चों से संबन्धित स्वच्छता एवं शुद्ध पेयजल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बताया कि बुंदेलखंड में पीने योग्य पानी का पीएच 7 से 8 के बीच रहता है। उन्होने बताया कि पेयजल में मुख्य रूप से निम्न रसायनिक पदार्थों कि जांच आवश्यक है। क्लोराइड, फ्लोरीदे, सल्फेट, लेड, नाइट्रेट, कोपर, आइरन, जिंक, पोटेशियम, मेग्नीशियम। इसके साथ ही जल के पीएच लेवेल कि जांच आवश्यक है।


जल जनित बीमारियों से बचाव के उपाय

  • - सर्वप्रथम पेयजल के श्रोत के आसपास साफ सफाई रखने का प्रयास करें।
  • - सुनिश्चित करें कि पानी बिल्कुल साफ और रेत और गाद से मुक्त हो। दिखाई पड़ने वाली गंदगी को हटाने के लिए पानी को छान लें।
  • - केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं, या तो पोर्टेबल पानी या पानी को शुद्ध करने वाले संयंत्र से पानी लें। नहीं तो पीने वाले पानी को उबाल कर इस्तेमाल करे।
  • - पानी को शुद्ध करने वाले उपकरण जैसे फिल्टर, आरओ यूनिट आदि लें, नियमित रूप से सर्विस करें और रखरखाव करें।
  • - सुनिश्चित करें कि संग्रहित पानी रोगाणु रहित हो।
  • - एंटीसेप्टिक तरल जैसे डेटाल गन्दा सा दिखने वाले स्नान के पानी में डालें।
  • - हाथ की स्वच्छता : नियमित रूप से घर लौटने के बाद, शौचालय का उपयोग करने से पहले, खाने से पहले और खाने के बाद या कुछ भी पीने से पहले साबुन से हाथ धोएं।


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