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Thursday, March 24, 2022

जिले के अधिकारियों की नहीं सुनते तेलियानी ब्लॉक कर्मी

अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने वाली महिला रोजगार सेवक को बचाने में जुटे

मोटी मलाई का कर्ज उतारने के चक्कर में लटकाए हैं मामला

फतेहपुर, शमशाद खान । बिंदकी विधानसभा अंतर्गत आने वाले गांव में ग्राम रोजगार सेवक के पद पर तैनात महिला ने बिना त्यागपत्र दिए ही तथ्यों को छिपाकर क्षेत्र पंचायत सदस्य बन गई। जो क्षेत्र पंचायत अधिनियम के खिलाफ है। मामला तेलियानी विकास खंड के क्षेत्र पंचायत वार्ड नं. 29 हसनापुर सानी का है। जहां महिला रोजगार सेवक उमा कुलदीप पत्नी राम सजीवन ने बिना पद से त्याग पत्र दिए ही क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ कर जीत हासिल की और बाद में भी त्याग पत्र नहीं दिया। मामला जिम्मेदारों के संज्ञान में आने और लगातार हुई शिकायतों के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उच्चाधिकारियों के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे ब्लॉक के अधिकारी व ग्राम पंचायत समिति मामले में शिकायत के बाद उपायुक्त मनरेगा द्वारा महिला रोजगार सेवक के विरुद्ध 23

ग्राम सचिवालय हसनापुर सानी।

दिसंबर 2021 को जारी आदेश में उमा कुलदीप पत्नी राम सजीवन की सेवा समाप्त कर दंडात्मक कार्रवाई की बात कही गई। उपरोक्त आदेश का पालन करते हुए खंड विकास अधिकारी तेलियानी ने 12 जनवरी 2022 को ग्राम समिति को आदेश दिया कि उमा कुलदीप पत्नी रामसजीवन की सेवा समाप्त कर कार्रवाई करें लेकिन आदेश जारी होने के दो माह बाद भी ग्राम समिति ने कोई कार्रवाई नहीं की। विधानसभा चुनाव का हवाला देकर मामले को टाल दिया जबकि मामले की शिकायत मुख्य विकास अधिकारी सत्य प्रकाश को भी कराई गई थी। हसनापुर सानी ग्राम पंचायत के गांव रामपुर पचभिटा निवासी सतीश तिवारी ने पंचायत चुनाव के संबंध में जन सूचना मांगी थी, जिसको जन सूचना अधिकारी ने अगस्त 2021 और सितंबर 2021 में दी गई सूचना में बताया है कि मानदेय प्राप्त करने वाले ऐसे पदधारक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। पंचायतराज अधिनियम 1947 की धारा-पांच (क) उप्र. क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 13 (क) में ग्राम रोजगार सेवक आदि उम्मीदवार नहीं हो सकते हैं।

इनसेट- 

समझौते का दबाव बना रहे अधिकारी 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अधिकारी जबरन समझौते करने का दबाव बना रहे हैं। समझौता न करने पर महिला रोजगार सेवक का कुछ न कर पाने की लगातार धमकियां दे रहे हैं। ब्लॉक के अधिकारी और ग्राम पंचायत समिति की मिलीभगत से मामले को जबरन लटकाए हुए हैं। भ्रष्टाचारी को अधिकारी ही बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि महीनों पहले उपायुक्त मनरेगा और जिला पंचायत राज अधिकारी मामले में कार्रवाई के आदेश कर चुके हैं। ब्लॉक सूत्रों की माने तो एक एडीओ पंचायत सहित अन्य कर्मचारी मामले को सिर्फ इसलिए लटकाए हुए हैं ताकि कागजों पर हेराफेरी कर आरोपी महिला रोजगार सेवक को बचाया जा सके। बताया जाता है कि आरोपी को पति ब्लॉक प्रमुख रह चुका है जिसके संपर्क से ब्लॉक के कर्मचारी टेबल के नीचे से खूब मोटी मलाई खाते हैं। उसी का कर्ज उतारने के लिए मामले के लटकाए हुए हैं अन्यथा जिले के अधिकारियों के आदेश करने के बाद मामले को महीनों लटकाने का कोई औचित्य नही दिखाई दे रहा है।


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