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Saturday, March 12, 2022

बच्चों को खिलाई पेट के कीड़े मारने की दवा

11 व 12 मार्च को मनाया जा रहा कृमि दिवस 

फतेहपुर, शमशाद खान । राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के अंतर्गत स्कूलों और आंगनबाडी केंद्रों में बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई गई। जनहितकारी इंटर कालेज एवं दीनदयाल उपाध्याय इंटर कालेज खागा के अलावा शहर क्षेत्र के मुराइनटोला, अजगवां, बकंधा आंगनबाडी केंद्रों में बच्चों को पेट के कीडे मारने की दवा खिलाई गई। सनगांव के वीरेंद्र, राजू ने बताया कि दवा खाने के बाद कोई दिक्कत नहीं है। वह पूरी तरह सामान्य है। 

बच्चों को कीड़े मारने की दवा देतीं आंगनबाड़ी कार्यकत्री।

सीएमओ डा. राजेंद्र सिंह ने बताया कि एल्बेंडाजाल के सेवन से कृमि संक्रमण से बचाव होता है। यह दवा पूर्ण सुरक्षित है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। बच्चों के पेट में कीड़े होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है और शरीर कुपोषित हो सकता है इसलिए संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास भी नहीं हो पाता है। बताया कि ज्यादा छोटे बच्चों को टेबलेट चूरा कर पानी के साथ खिलाया जाएगा। बड़े बच्चों को भी दवा चबा चबाकर ही खानी है। उन्होंने कहा कि बच्चे को किसी कोविड-19 से ग्रसित व्यक्ति से संपर्क तो नहीं हुआ है, यदि अगर ऐसा है तो यह सुनिश्चित करें कि ऐसे बच्चे को कृमि मुक्ति की दवा नहीं खिलाई जाएगी। यदि किसी भी तरह उल्टी या मिचली महसूस होती है तो घबराने की जरूरत नहीं। पेट में कीड़े ज्यादा होने पर दवा खाने के बाद सरदर्द, उल्टी, मिचली, थकान होना या चक्कर आना महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है। दवा खाने के थोड़ी देर बाद सब सही हो जाता है। इसके अलावा फिर भी किसी अन्य तरह की बड़ी परेशानी हो तो मुफ्त एंबुलेंस सेवा के टोल फ्री नंबर 108 से मदद ले सकते हैं। नोडल अधिकारी उदय प्रकाश सिंह कुशवाहा ने बताया कि जो लोग छूट जाएंगे उनके लिए 13 से 19 मार्च तक चलाया जाएगा। 3,225 आशा व 3040 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व फ्रंट लाइन वर्करों की मदद से एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजाल की दवा घर-घर जाकर खिलाई जाएगी। उन्होंने कहा किसी भी अभिभावक को यह टेबलेट रखने या बाद में खिलाने के लिए नहीं देनी है। यह दवा आशा व आगंनबाड़ी के सामने ही बच्चों को खिलानी है।

कृमि संक्रमण के लक्षण

  • - बच्चों के शरीर में खून की कमी हो जाना।
  • - बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो जाती है।
  • - थकान महसूस करते रहना।
  • - इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो जाता है।

कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय

  • - घरों के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • - नाखून साफ और छोटे रखें।
  • - साफ और स्वच्छ पानी ही पिएं।


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