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Monday, March 28, 2022

नव संवत्सर 2079 के राजा शनि देव होंगे

हिन्दू नव वर्ष  विक्रमी संवत का आरम्भ 2 अप्रैल से होगा ‘नल’ नामक विक्रमी संवत 2079 और चैत्र मास की नवरात्रि पर्व का शुभारंभ 2 अप्रैल 2022 ,दिन शनिवार,चैत्र ,रेवती नक्षत्र तथा इन्द्र योग में होगा। विक्रमी संवत्सर के राजा शनि और मन्त्री गुरु से प्रारम्भ होगा। जिस वार को नवसंवत्सर का आरंभ होता है, उस वार का अधिपति ग्रह वर्ष का राजा कहलाता है। इस बार शनिवार के दिन हिन्दू नववर्ष का आरंभ हो रहा है। इसलिए संवत्सर के राजा शनि होंगे। इस वर्ष का मंत्री मण्डल के पद इस प्रकार है- राजा-शनि, मन्त्री-गुरु, सस्येश-सूर्य , दुर्गेश-बुध, धनेश-शनि, रसेश-मंगल, धान्येश-शुक्र , नीरसेश-शनि, फलेश-बुध, मेघेश-बुध  होंगे | साथ ही संवत्सर का निवास कुम्हार का घर एवं समय का वाहन घोड़ा होगा | समय अर्थात सम्वत  का निवास माली  के घर होने से शुभफल की वर्द्धि  होगी अनाज , फल, सब्जी का अच्छा उत्पादन होगा इस साल कुल 4 ग्रहण लगेंगे. इनमें से 2 सूर्य ग्रहण हैं और 2 चंद्र ग्रहण हैं. 

 


चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 1 अप्रैल 2022 को दिन में 11:54 बजे प्रारंभ होगी नव संवत्सर का आरंभ रेवती नक्षत्र इन्द्र योग और मिथुन लग्न में होगा लग्नेश बुध दशम भाव में नीच राशि में होंगे सूर्य चंद्रमा के साथ युति  बनाकर स्थित होंगे लग्न से अष्टम भाव में शनि मंगल की युति शुभ नहीं कही जा सकती शनि स्वराशि का है और मंगल उच्च राशि का है भाग्य स्थान का  शनि और आय का स्वामी मंगल का अष्टम भाव में स्थित होना अर्थव्यवस्था की दृष्टि से अनुकूल नहीं कहा जा सकता, जनता में असंतोष भाव रहेगा, आर्थिक अपराधों में वृद्धि होगी, शनि तीसरी  दृष्टि से दशम भाव को देखेगा जोकि सरकार सरकार पक्ष में  आंतरिक असंतोष बढ़ेगा, पंचमेष  शुक्र और दशमेश गुरु की नवम  भाव में युति राजयोग  का निर्माण कर रही है जो शुभफलप्रद  है विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ेगी सरकार के लोक कल्याण कार्यों में वृद्धि होगी, आर्थिक विकास होगा, विदेशो  से सम्बन्धो में सुधर होगा, धार्मिक क्रिया कलापों में सामान्य वृद्धि होगी | वर्ष प्रवेश लग्न में कालसर्प दोष का निर्माण भी हो रहा है जो कि कुछ पड़ोसी देशों से तनाव आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि, रोग और महामारी  की आशंका रहेगी, यदि वर्ष का प्रवेश मिथुन लग्न में हो तो युद्ध की आशंका रहती है प्राकृतिक आपदाओं का दुष्प्रभाव दिखेगा।इस दिन नये वर्ष के पचांग का पूजन कर वर्षफल सुना जाता है। निवास स्थानों पर ध्वाजा और बन्दनवार लगाते है। महाराष्ट्र में गुडी पड़वा पर घर-घर में ध्वाजायें फैरायी जाती है। इसदिन नीम के नये कोमल पत्तों, जीरा, काली मिर्च, हींग, नमक को पीसकर खाने से  वर्ष भर अरोग्यता रहती है

नवसम्वत  में धीमी गति के मुख्य ग्रह राहु केतु 12 अप्रैल को , गुरु 13  अप्रैल को और शनि 29  अप्रैल को राशि परिवर्तन करेंगे जिसका प्रभाव सभी पर पड़ेगा, ग्रहो का राशि अनुसार फल -

  1. मेष राशि- चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा,चल अचल संपत्ति धन के स्रोत मिलेंगे ,स्वास्थ्य का ध्यान रखें, नौकरी व्यवसाय में परिवर्तन का योग है
  2. वृष राशि - मान सम्मान प्राप्त होगा, कार्य में सफलता मिलेगी, नौकरी में पदोन्नति व्यापार में वृद्धि होगी, मांगलिक कार्य होंगे विद्यार्थियों के लिए शुभ है संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेंगे
  3. मिथुन राशि - संघर्ष के बाद सफलता मिलेगी, जमीन जायदाद में इन्वेस्ट करेंगे, कार्य का विस्तार होगा, शत्रु पर विजय होगी, मान सम्मान की हानि संभव है, व्यवसाय में लाभ होगा
  4. कर्क राशि -  धन वृद्धि, पदोन्नति ,मान सम्मान में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य का ध्यान रखें, तीर्थ यात्रा
  5. सिंह राशि - धन संपत्ति में वृद्धि, रोग,  शत्रु पर विजय भाग्य में वृद्धि, रुका हुआ धन प्राप्त होगा, सुख सुविधा मिलेगी, मानहानि हो सकती हैं संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेंगे, दांपत्य सुख मिलेगा
  6. कन्या राशि -  मिश्रित परिणाम मिलेंगे, विदेश यात्रा का अवसर प्राप्त होगा, स्वास्थ्य का ध्यान रखें,  व्यवसाय में उन्नति होगी यश कीर्ति वृद्धि होगी 
  7. तुला राशि - अनावश्यक भ्रमण करना पड़ सकता है, धोखे से बचें, आर्थिक कष्ट कार्य में सफलता , स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है, स्थान परिवर्तन का योग, व्यवसाय में वृद्धि
  8. वृश्चिक राशि - सुख शांति आनंद में वृद्धि, कार्यों में सफलता, पदोन्नति व्यवसाय में उन्नति  माता-पिता से दूरी हो सकती है, संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेंगे
  9. धनु राशि - निवेश करेंगे, संतान पक्ष



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