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Friday, February 11, 2022

जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करते यात्री

सेतु बने शोपीस, रेलवे प्रशासन नहीं करता कार्रवाई  

फतेहपुर, शमशाद खान । मुख्यालय रेलवे स्टेशन में अक्सर यात्री गाड़ी एवं मालगाडी की चपेट में आने से जहां यात्री चुटहिल होते रहते हैं वही कुछ को अपनी जान से भी हाथ धोना पडता है। इसके बावजूद भी यात्रियों में जागरूकता नहीं आ रही है। एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आने जाने के लिए रेलवे ट्रैक से ऊपर से सेतु बना हुआ है लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में यात्री इस सेतु का इस्तेमाल न कर रेलवे ट्रैक पार करके अपनी जिंदगी को खतरे में डालते रहते है। जिस तरह से यात्री बेधड़क होकर रेलवे ट्रैक पार करते हैं। उससे लगता है कि जिंदगी और मौत का समय निर्धारित है जिसकी जितनी जिंदगी है वह उतने समय तक जीवित रहेगा और जिस समय जहां पर उसकी मौत लिखी है। उसे कोई टाल नहीं सकता। साथ ही यह भी कहा जाता है कि जिंदगी और मौत के निर्धारित समय का यह मतलब नहीं कि लोग अपने से जाकर रेल की पटरी पर सिर रख दे और कह दिया जाए कि उसकी मौत लिखी थी ईश्वर ने जिंदगी और मौत का समय निर्धारित करने के साथ-साथ इंसान को सोचने और

रेलवे ट्रैक पार करते यात्री।

समझने के लिए दिमाग दिया है। जिसका इस्तेमाल करना भी जरूरी है लेकिन आज इस भागमभाग जिंदगी में किसी को शायद अपने बारे में सोचने का भी समय नहीं है तभी तो लोग आधी और तूफान की तरह समय के साथ भागने के लिए बेकरार है। यह बेकरारी कभी भी किसी भी समय मुख्यालय रेलवे स्टेशन पर देखी जा सकती है। जहां यात्री जल्दबाजी के चक्कर में रेलवे ट्रैक को पार कर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आते जाते रहते है जबकि यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से प्लेटफार्म पार आने जाने के लिए स्टेशन के अंदर रेलवे ट्रैक के ऊपर से सेतु बना हुआ है लेकिन इस सेतु का इस्तेमाल यात्री न के बराबर करते है या फिर कहा जाए कि सेतु का प्रयोग ही नही हो रहा है तो शायद गलत न होगा क्योंकि आए दिन रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली यात्री एवं मालगाडियों की चपेट में आकर न जाने कितने यात्री चुटहिल होते रहते हैं। वही इस लापरवाही के चलते कुछ यात्रियों को अपनी जान भी गवानी पड़ती है परन्तु इन घटनाओं के बावजूद यात्रियों में जागरूकता देखने को नहीं मिलती है क्योंकि सुबह से लेकर शाम तक हजारों यात्री रेलवे ट्रैक से ही गुजर कर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आते जाते है इससे कुछ हद तक जीआरपी की लापरवाही भी शामिल है। यदि जीआरपी कोशिश करे तो यात्रियो की इस मनमानी पर जहां अकुश लगाया जा सकता हैं वही स्टेशन पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी भी लाई जा सकती है परंतु जीआरपी भी यात्रियों की इस मनमानी की तरफ से शायद मुंह मोडे़ हुए हैं। तभी बिना डर और खौफ के यात्रियों का हुजूम रेलवे ट्रैक पार करता हुआ देखने को मिलता है। 


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