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Saturday, February 26, 2022

फाइलेरिया मरीज शरीर की सफाई का रखें ख्याल : सीएमओ

फाइलेरिया रोगियों को दिया गया रोग प्रबंधन का प्रशिक्षण

प्रशिक्षकों ने बताए बचाव के तरीके 

11 मरीजों को बांटी मार्बिडिटी मैनेजमेंट किट  

बांदा, के एस दुबे । फाइलेरिया ग्रस्त मरीजों को अपने अंगों को साबुन से नियमित साफ सफाई करनी चाहिए। साथ ही चिकित्सक द्वारा बताए गए नियमित व्यायाम को करने से सूजन नहीं बढ़ती है और व्यक्ति सामान्य जीवन जी पाता है। यह बातें सीएमओ कार्यालय परिसर में आयोजित घरेलू रोग प्रबंधन के प्रशिक्षण में सीएमओ डा. एके श्रीवास्तव ने कहीं 

सीएमओ ने कहा कि फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहा जाता है। यह क्यूलेक्स मच्छर काटने की वजह से होता है। इस मच्छर के काटने से पुवेरिया नाम के परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और इस वजह से यह रोग होता है। वयस्क मच्छर छोटे-छोटे लार्वा को जन्म देते हैं, जिन्हें माइक्रो फाइलेरिया कहा जाता है। यह मनुष्य के रक्त में रात के समय एक्टिव होता है। इस कारण स्वास्थ्य टीम रात में ही पीड़ित का ब्लड सैंपल लेती हैं। उन्होंने फाइलेरिया के 11 मरीजों को मार्बिडिटी मैनेजमेंट किट प्रदान करते हुए कहा कि घर पर रहकर ही मरीज खुद अपनी देखभाल कर सकता है। 

मार्विडिटी मैनेजमेंट कैंप में फाइलेरिया मरीजों को किट देने के बाद सीएमओ डा. एके श्रीवास्तव व अन्य

जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने फाइलेरिया रोगियों को किट में एक एंटीफंगल क्रीम, एक मेडिकेटेड साबुन, एक सफेद टावेल व एक-एक बाल्टी व मग दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 की लाइनलिस्ट के आधार पर जनपद में लिम्फोटीमा के 632 मरीज चिन्हित हैं। इनमें 65 मरीजों को मार्बिडिटी मैनेजमेंट प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हर साल एमडीए कार्यक्रम के तहत टीमें घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की खुराक खिलाती हैं। लगातार पांच साल तक इसका सेवन करने वालों को फाइलेरिया बीमारी नहीं होती है। यह बीमारी होने पर मरीज सीएमओ कार्यालय में स्थित यूनिट में आकर अपना इलाज ले सकते हैं। इस मौके पर पाथ संस्था के डा. रवि राज सिंह, बायोलाजिस्ट भावना वर्मा, वेक्टर जनित रोग सलाहकार प्रदीप कुमार, सीनियर लैब टेक्नीशियन बृज बिहारी आदि उपस्थित रहे। 

ऐसे करें बचाव

  • - रात को सोते वक्त मच्छरदानी प्रयोग करें
  • - फुल आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए 
  • - आस-पास गंदगी या कूड़ा जमा न होने दें
  • - नालियों में पानी को रुकने न दिया जाए 
  • - रोगी को दवा खाली पेट नहीं लेनी चाहिए 


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