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Thursday, February 24, 2022

शिक्षक जब जागता है तो समाज में होता है बदलाव : गोपाल

नोटा जीते तो उस विधानसभा, लोकसभा सीट पर फिर हो चुनाव : अनिल शर्मा

संगोष्ठी में सर्वसम्मति से पारित हुए दो प्रस्ताव

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। शिक्षक जब जाग जाता है तो समाज में बदलाव होता है। एडीआर व यूपी इलेक्शन वाच पिछले दो दशको से मतदाताओं को जागरुक करने व चुनाव सुधार कार्य कर रहा है।

यह विचार गोपालदास निर्मला देवी शिक्षा निकेतन इंटर कालेज के सभागार में एडीआर व यूपी इलेक्शन वाच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चुनाव सुधार पर युवा संवाद विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी गोपाल भाई ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह हे कि जब जब देश में संकट आया शिक्षकों ने तब तब समाज को जागृत किया है। इससे समाज में बदलाव आए जो देश और समाज के हित में थे। उन्होंने आचार्य चाणक्य का उदहारण देते हुए कहा कि शिक्षक को आज चुनाव सुधार और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कार्य करना चाहिए। इस अवसर पर एडीआर व यूपी इलेक्शन वाच के प्रदेश कोआर्डिनेटर मुख्य अतिथि अनिल शर्मा ने कहा कि पिछले दो दशको से प्रो त्रिनोचन शास्त्री, प्रो जगदीश छोकर व रिटायर्ड मेजर जनरल अनिल वर्मा के नेतृत्व में

संगोष्ठी में विचार रखते प्रदेश कोआर्डिनेटर।

एडीआर देश में मतदाताओं को जागरुक करते हुए चुनाव सुधार का कार्य कर रहा है। श्री शर्मा ने कहा कि मतदाता यदि जागरुक हो जाए, अपने वोट से जन प्रतिनिधि बनाने वाले यदि अपनी समस्याओं व हक के लिए एकजुट हो जाएं तो जन प्रतिनिधियों को मतदाताओं की समस्याओं का निराकरण करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। श्री शर्मा ने कहा कि एडीआर और सुप्रीम कोर्ट तथा ला कमीशन के सिफारिशों के बाद चुनाव आयोग ने मतदाताओं को ईवीएम मशीन में नोटा (यानि हमे कोई प्रत्याशी पसंद नहीं है) का अधिकार दिया है। ईवीएम में सब प्रत्याशियों के नीचे नोटा का बटन रहता है। यदि आपकों जितने प्रत्याशी चुनाव में खड़े हैं उनमे से कोई पसंद नहीं है तो नोटा का बटन दबाकर अपना मतदान पूरा कर सकते हैं। श्री शर्मा ने कहा कि नोटा के लिए ऐसा कानून संसद में बनना चाहिए कि यदि नोटा को जिस विधानसभा या लोकसभा सीट पर सब प्रत्याशियों से ज्यादा वोट मिल जाए तो वहां दुबारा चुनाव होने चाहिए, क्योंकि वहां के मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को खारिज कर दिया है।

इस अवसर पर अवधेश चतुर्वेदी, अशोक श्रीवास्तव, चन्द्रभान सिंह, रामराज यादव, कमलेश राजपूत, धर्मजीत सिंह, अनुराधा दीक्षित, गुंजन श्रीवास्तव, किरण उपाध्याय, मीना गुप्ता, क्षिप्रा विश्वकर्मा, माधुरी रिछारिया आदि शिक्षकों ने नोटा को कानून बनाने का प्रस्ताव रखा। जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। इस मौक ेपर विद्यालय के प्रबंधक अशोक गुप्ता ने कहा कि यदि लोकतंत्र में मतदाता जागरुक हो जाए तो उसे सच्चे और अच्छे जनप्रतिनिधि मिलने लगें। प्रधानाचार्य शिवप्रकाश शुक्ला ने कहा कि मतदाताओं को जनप्रतिनिधियों के बारे में जानकारी रखना चाहिए। जब जानकारी होती है तो हमारे भीतर सवाल उठते हैं। उससे ही समस्याओं का हल होता है। गोष्ठी का संचालन एडीआर के जिला कोआर्डिनेटर रमेश द्विवेदी ने किया है।


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