कैंसर को मात देकर स्वस्थ हुए व्यवसायी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Thursday, February 3, 2022

कैंसर को मात देकर स्वस्थ हुए व्यवसायी

दवा के नियमित सेवन और साहस से जीती जंग

विश्व कैंसर दिवस पर विशेष

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। दृढ़ इच्छाशक्ति, परहेज, नियमित दवा का सेवन और धैर्य  हो तो किसी भी बीमारी को हराया जा सकता है। जिला मुख्यालय के सदर रोड निवासी गल्ला व्यवसायी कुलदीप कुमार ने कैंसर जैसी बीमारी से हिम्मत से लड़ते हुए स्वस्थ होकर यह साबित कर दिया है। कुलदीप कुमार को 12 सितंबर 2019 को आभास हुआ कि उनके गले में एक के बाद एक गांठ बढ़ती ही जा रही है। इसी के साथ उन्हे बांह के नीचे भी गांठ की शिकायत हुई। इस पर निर्णय लिया कि कोई बड़ी बीमारी घेर रही है। इसका सही तरीके से इलाज कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि चर्चा करने पर लोगों ने मध्य प्रदेश के जबलपुर जाकर दवा कराने की सलाह दी। इसके बाद वह जबलपुर मेडिकल कॉलेज में कैंसर विशेषज्ञ डा. अर्पण सिंह को दिखाया। डॉक्टर ने मुंबई और नागपुर में इलाज कराने की बात कही। इसी दौरान भाभा कैंसर अस्पताल वाराणसी के डा अनिल सिंह जो कुलदीप कुमार के

कैंसर के बाद स्वास्थ्य हुए व्यवसायी।

रिश्तेदार भी हैं को फोन पर सारी समस्या बताई गई। उन्होंने वाराणसी बुलाया और वहां पूरी जांच कराने के बाद पता चला कि पहले चरण का कैंसर है। यह दवा के सेवन और कीमोथेरेपी से ठीक हो जाएगा। कुलदीप कुमार बताते हैं कि पहली कीमोथेरेपी के दौरान बहुत पीडा हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इसी का परिणाम है कि चार बार की कीमोथेरेपी कराने और चिकित्सकों द्वारा बताई गई विधि के अनुसार नियमित दवा के सेवन और धैर्य से वह मार्च 2021 को पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। पिछले एक साल से पहले की तरह पूरे दिन गल्ले का व्यापार संभालते हैं।

प्रतिवर्ष चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में सरकारों और व्यक्तियों को इस बीमारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जागरूक बनाकर कैंसर से होने वाली मौतों को कम करना है। इस वर्ष 22वां विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष इस दिवस की थीम क्लोज द केयर गैप है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवरामपुर के प्रभारी डा. लखन स्वरूप गर्ग ने बताया कि कैंसर शरीर की कोशिकाओं के समूह की असामान्य, अव्यवस्थित एवं अनियंत्रित वृद्धि है। यदि कोशिकाओं के समूह की असामान्य, अव्यवस्थित और अनियंत्रित वृद्धि की समय पर जांच व इलाज न हो तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है। कैंसर शरीर की कोशिकाओं के भीतर डीएनए की क्षति के कारण होता है। डीएनए की क्षति सभी सामान्य कोशिकाओं में होती रहती है, लेकिन इस क्षति में सुधार स्वयं के शरीर द्वारा हो जाता है। कभी-कभी इस क्षति का सुधार नहीं हो पाता। जिससे कोशिकाओं के गुणों में परिवर्तन हो जाते हैं। संचित डीएनए की क्षति अंत में कैंसर को जन्म दे सकती है। बताते हैं कि कैंसर के लिए कोई विशेष कारक जिम्मेदार नहीं है। इसमें शारीरिक कैंसरकारी तत्व जैसे पराबैगनी और आयनीकरण विकिरण, रासायनिक कैंसरकारी तत्वः एसबेस्टस, तंबाकू, एफ्लोटाकसिन दूषित आहार, आर्सेनिक दूषित पेयजल, जैविक कैंसरकारी तत्व वायरस, बैक्टीरिया या हेपेटाइटिस बी और सी वायरस, मानव पेपिलोमा वायरस एचपीवी जैसे परजीवियों से होने वाला संक्रमण। वृद्धावस्था कैंसर के विकास के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण कारक है। तंबाकू और अल्कोहल का सेवन अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक निष्क्रियता आदि है।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages